MP Dowry Death Cases: मध्य प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक बहुत ही डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
चाहे परिवार की मर्जी से हुई अरेंज मैरिज हो या खुद की पसंद से की गई लव मैरिज, सूबे में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।
हालात ये हो चुके हैं कि मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन एक महिला दहेज की बलि चढ़ रही है।
हाल ही में भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है।

सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक ट्विशा के लिए इंसाफ की मांग की जा रही है, लेकिन यह कहानी सिर्फ एक ट्विशा की नहीं है।
छिंदवाड़ा, ग्वालियर और गुना जैसे जिलों से भी ऐसी ही दिल दहला देने वाली कहानियां सामने आई हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश पूरे देश में दहेज हत्या के मामलों में तीसरे नंबर पर आ गया है।
साल 2024 में राज्य की 450 महिलाओं ने दहेज प्रताड़ना के कारण अपनी जान गंवाई है।

सोशल मीडिया से सड़कों तक गुस्सा: क्या है ट्विशा मौत का पूरा सच?
इन दिनों मध्य प्रदेश में एक ही नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है—ट्विशा शर्मा।
ट्विशा की मौत कैसे हुई और इसके पीछे की असली वजह क्या थी, यह रहस्य अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है।
इस घटना को लेकर आम जनता और परिजनों में भारी गुस्सा है।
ट्विशा को न्याय दिलाने के लिए सेना के रिटायर्ड जवान सड़कों पर उतर आए हैं और रैलियां निकाल रहे हैं।

वहीं, इंस्टाग्राम पर हजारों लोग सोशल मीडिया पर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में लड़के और लड़की, दोनों पक्षों के आरोप एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं:
ससुराल पक्ष का दावा: लड़के वालों का कहना है कि ट्विशा को नशे की लत थी और इसी वजह से यह हादसा हुआ।
मायके पक्ष का गंभीर आरोप: ट्विशा के माता-पिता का कहना है कि उन्होंने शादी में अपनी हैसियत के हिसाब से स्कॉर्पियो गाड़ी दी थी।
लेकिन ससुराल वाले इससे खुश नहीं थे, वे लगातार फॉर्च्यूनर कार की मांग कर रहे थे और इसके लिए ट्विशा को प्रताड़ित किया जा रहा था।

फिलहाल यह मामला जबलपुर कोर्ट में है। ट्विशा के पिता न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
परिजनों का गुस्सा और दुख इस कदर भारी है कि उन्होंने साफ कह दिया है कि जब तक उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा और दोषियों को सजा नहीं होगी, वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
पुलिस ने इस मामले में आरोपी समर्थ को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन हाई कोर्ट में री-पोस्टमार्टम (दोबारा पोस्टमार्टम) की याचिका भी दायर की गई है।

तीन और दर्दनाक कहानियां:
ट्विशा का मामला कोई इकलौता मामला नहीं है। मध्य प्रदेश के अलग-अलग कोनों से पिछले कुछ समय में तीन और ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जो यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या हम एक सभ्य समाज में रह रहे हैं?
छिंदवाड़ा: लव मैरिज के बाद मिली सिर्फ प्रताड़ना और मौत
छिंदवाड़ा की रहने वाली एक युवती ने 22 फरवरी 2022 को अपनी पसंद से प्रेम विवाह (लव मैरिज) किया था।
माता-पिता को लगा था कि बेटी ने अपना जीवनसाथी खुद चुना है, तो वह खुश रहेगी। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही खुशियां गम में बदल गईं।
बेटी ने अपने पिता को रोते हुए बताया कि ससुराल वाले उसे बेरहमी से मारते-पीटते हैं। साल 2023 में वह आखिरी बार अपने पिता से मिली थी, जिसके बाद ससुराल वालों ने उसका मायके से संपर्क लगभग काट दिया।
6 अप्रैल 2024 को पिता को अचानक अस्पताल से फोन आया कि उनकी बेटी भर्ती है। जब तक पिता दोपहर में नागपुर के अस्पताल पहुंचे, बेटी दम तोड़ चुकी थी।
घरवालों का आरोप है कि उसे जहर देकर मारा गया है और ससुराल वालों ने उन्हें बिना बताए गुपचुप तरीके से उसे दूसरे शहर के अस्पताल में शिफ्ट कर दिया था।
ग्वालियर: मौत से आधा घंटा पहले भाई को किया फोन—’मुझे बचा लो’
ग्वालियर के सुरैयापुरा की रहने वाली 21 साल की पलक रजक की 12 मई को बेहद संदिग्ध हालत में मौत हो गई।
पलक की शादी को अभी सिर्फ एक साल ही हुआ था। वह इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव थी और उसके 10 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स थे।
बाहर से हंसती-मुस्कुराती दिखने वाली पलक अंदर से कितनी घुट रही थी, इसका अंदाजा उसकी आखिरी रील्स और पोस्ट से लगाया जा सकता है, जिसमें उसने अकेलेपन का जिक्र किया था।

मौत से ठीक आधा घंटा पहले पलक ने अपने भाई प्रिंस को फोन किया था और रोते हुए कहा था, “मुझे यहां से ले जाओ, वरना ये लोग मुझे मार डालेंगे।”
जब तक भाई भागता हुआ अस्पताल पहुंचा, पलक की लाश स्ट्रेचर पर पड़ी थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मरने से पहले पलक तीन दिनों से भूखी थी।

गुना: ढाई साल की शादी और अस्पताल से लौटी लाश
गुना जिले के नसीरा गांव में 24 साल की भावना यादव की संदिग्ध मौत का मामला भी ऐसा ही है।
भावना की शादी ढाई साल पहले गिर्राज यादव से हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही उसे दहेज के लिए सताया जाने लगा।
मायके वालों ने पुलिस को एक ऑडियो सबूत भी सौंपा है, जिसमें प्रताड़ना की बात साफ हो रही है।
बीते बुधवार को भावना की तबीयत बिगड़ी और ससुराल वालों ने कहा कि पारिवारिक विवाद के कारण उसने जहर खा लिया।
अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
देश में तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश: क्या कहते हैं आंकड़े
एनसीआरबी (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। दहेज हत्या के मामलों में उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है।
- राज्य का नाम – दहेज हत्या के कुल मामले (2024)
- उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) 2038
- बिहार (Bihar)1078
- मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) 450
मध्य प्रदेश में दर्ज हुए इन 450 मामलों में से 232 केस पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत दर्ज हैं, जबकि 218 केस नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज किए गए हैं।

इसका सीधा सा मतलब है कि राज्य में हर 24 घंटे में एक बेटी दहेज की भेंट चढ़ रही है।
लव मैरिज भी नहीं रही सुरक्षित
आमतौर पर माना जाता है कि लव मैरिज में लड़का-लड़की एक-दूसरे को जानते हैं, इसलिए वहां दहेज जैसी कुप्रथा आड़े नहीं आएगी।
लेकिन आंकड़े इस सोच को गलत साबित कर रहे हैं।
समाजशास्त्रियों और कानूनी जानकारों के मुताबिक, लव मैरिज के बाद जो तलाक के मामले कोर्ट में पहुंच रहे हैं, उनमें से करीब 35% मामलों में दहेज प्रताड़ना की धाराएं लगी होती हैं।
यानी प्यार की बुनियाद पर शुरू हुए रिश्ते भी बाद में पैसों और गाड़ियों की लालच की वजह से टूट रहे हैं या फिर युवतियों की जान ले रहे हैं।

महिला आयोग का कड़ा रुख: कहां आ रही है दिक्कत?
राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते इन मामलों को देखते हुए मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग बेहद गंभीर हो गया है।
आयोग के सचिव सुरेश तोमर ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
उनका कहना है कि आयोग के पास लगातार ऐसी शिकायतें आ रही हैं जहां महिलाओं को समय पर न्याय नहीं मिल पाता।
सुरेश तोमर ने सिस्टम की कमियों को उजागर करते हुए कहा कि कई मामलों में पुलिस शुरुआती स्तर पर ही लापरवाही बरतती है।
पुलिस या तो एफआईआर (FIR) दर्ज करने में बहुत देरी करती है या फिर रिपोर्ट को ठीक से और मजबूत धाराओं के साथ नहीं बनाती है।
इसका सीधा असर पुलिस की अंतिम जांच पर पड़ता है और आरोपी कानूनी कमियों का फायदा उठाकर बच निकलते हैं।
महिला आयोग ने अब ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय करने की बात कही है।
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