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मध्यप्रदेश में पानी नहीं, ‘ज़हर’ बह रहा! NGT की बड़ी चेतावनी, 52 में से 50 सैंपल फेल; 50 ज़िलों में बैक्टीरिया का ख़तरा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Water Contamination: मध्यप्रदेश में इस समय नल से आने वाला पानी सुरक्षा के मामले में बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

हाल ही में आई जांच रिपोर्टों ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश के ज़्यादातर हिस्सों में जो पानी सप्लाई हो रहा है, वह पीने लायक बिल्कुल नहीं है।

इस गंभीर मामले पर अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल ज़ोन बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है और पूरी राज्य सरकार व प्रशासन को फटकार लगाई है।

NGT ने साफ़ कर दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही की कीमत आम जनता को अपनी जान देकर नहीं चुकानी पड़ेगी।

कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?

इस पूरे मामले की शुरुआत इंदौर के भागीरथपुरा इलाके से हुई थी। दिसंबर 2025 में यहाँ अचानक हैजा (Cholera) फैल गया।

देखते ही देखते इस बीमारी ने विकराल रूप ले लिया, जिसमें 36 बेकसूर लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग अस्पताल पहुँच गए।

जब मामले की अंदरूनी जांच की गई, तो पता चला कि पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन में सीवर (गंदे नाले) का पानी मिल गया था।

लोग वही दूषित पानी पीते रहे, जिससे संक्रमण तेज़ी से फैला।

लोगों ने शुरुआत में पानी के स्वाद और बदबू की शिकायत भी की थी, लेकिन प्रशासन ने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया।

इसके अलावा, कई घरों में पानी को उबालकर या फ़िल्टर करके पीने की आदत नहीं थी, जिससे बीमारी और तेज़ी से फैली।

जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

इस त्रासदी के बाद जब मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने प्रदेश भर से भूजल (Groundwater) के 52 सैंपल लिए, तो उनके नतीजे बेहद डरावने थे:

* 50 सैंपल फेल: जांच किए गए 52 में से 50 नमूनों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया।

 * 40 नमूनों में ई-कोलाई: 40 सैंपलों में बेहद ख़तरनाक ई-कोलाई (E. Coli) बैक्टीरिया मिला, जो सीधे तौर पर इंसानी मल या सीवर की गंदगी मिलने से पनपता है।

 * भोपाल भी सुरक्षित नहीं: राज्य की राजधानी भोपाल के नगर निगम ने जब जांच की, तो यहाँ भी 4 बोरवेल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया, जिन्हें बाद में बंद करना पड़ा।

इन आंकड़ों ने यह साबित कर दिया कि दूषित पानी का ख़तरा सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मध्यप्रदेश की समस्या बन चुका है।

हाईकोर्ट की 29 सूत्रीय गाइडलाइन और NGT का बड़ा आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पहले ही 29 बिंदुओं की एक गाइडलाइन तैयार की थी।

अब NGT ने इन सभी नियमों को पूरे मध्यप्रदेश में सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है।

* 24×7 हेल्पलाइन और मोबाइल ऐप: अब राज्य के हर शहर और नगर निगम क्षेत्र में एक 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। इसके अलावा एक स्पेशल मोबाइल ऐप लॉन्च होगा।

* पानी की क्वालिटी की लाइव ट्रैकिंग: नागरिक इस ऐप के ज़रिए अपने इलाके के पानी की क्वालिटी जांच सकेंगे।

* टंकी की सफाई का हिसाब: ऐप पर यह जानकारी साफ़ दिखेगी कि पानी की ओवरहेड टंकी आखिरी बार कब साफ हुई थी और अगली सफाई किस तारीख को होगी।

* शिकायत ट्रैकिंग: लोग पानी से जुड़ी अपनी शिकायतों को इस ऐप पर ट्रैक कर सकेंगे, जिसे 311 ऐप से भी जोड़ा जाएगा।

अफ़सरों की तय होगी जवाबदेही

NGT ने सरकार को कड़े शब्दों में कहा है कि जलापूर्ति व्यवस्था (Water Supply System) में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अगर किसी इलाके में पाइपलाइन लीकेज या गंदे पानी की सप्लाई की शिकायत मिलती है, तो सीधे संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनकी जवाबदेही तय होगी।

आगे क्या होगा?

याचिकाकर्ता राशिद नूर खान और कमल कुमार राठी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए NGT ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी।

इसके साथ ही हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी जल्द आने वाली है, जिसके आधार पर आगे और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

यह पूरा घटनाक्रम चेतावनी देता है कि पीने का साफ़ पानी अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।

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