Food Adulteration in MP: मध्य प्रदेश से आए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि हम बाजार से जो कुछ भी खरीद कर खा रहे हैं, वह शुद्धता की कसौटी पर खरा नहीं उतर रहा है।
पिछले एक साल के दौरान प्रदेश भर से 13,920 खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 1,635 सैंपल जांच में फेल पाए गए।
इसका सीधा गणित यह है कि मार्केट में मौजूद हर 8वीं चीज या तो मिलावटी है या फिर बेहद घटिया क्वालिटी की।
ढीला सिस्टम, बेखौफ मिलावटखोर
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठता है।
जब 1,635 सैंपल फेल हुए, तो कायदे से उन सभी पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी।
लेकिन हकीकत यह है कि केवल 22 मामलों में FIR दर्ज की गई।
यानी 1,600 से ज्यादा मामलों में मिलावट करने वाले लोग बिना किसी बड़ी सजा के बच निकले।
जब तक कानून का खौफ नहीं होगा, तब तक मुनाफे के लिए लोगों की जान से खिलवाड़ बंद नहीं होगा।
कम होती निगरानी, बढ़ता जोखिम
बीते तीन सालों के रिकॉर्ड देखें तो एक और चिंताजनक ट्रेंड नजर आता है।
सरकार द्वारा सैंपल लेने की संख्या लगातार कम की जा रही है:
- 2021-22: 16,059 सैंपल (2,900 फेल)
- 2023-24: 13,998 सैंपल (2,022 फेल)
- 2024-25: 13,920 सैंपल (1,635 फेल)
जब जांच का दायरा ही सिमटता जाएगा, तो मिलावट को पकड़ना और भी मुश्किल हो जाएगा।
यह स्थिति “आंखें मूंद लेने” जैसी है, जिससे जनता का स्वास्थ्य दांव पर लगा है।
ICMR की रिपोर्ट: थाली का पोषण संतुलन बिगड़ा
सिर्फ मिलावट ही नहीं, हमारी खाने की आदतें भी हमें बीमार कर रही हैं।
ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के ‘इंडिया डायबिटीज’ अध्ययन में 18,000 लोगों के डेटा से पता चला है कि भारतीय थाली से ‘प्रोटीन’ गायब होता जा रहा है।
हमारी कुल कैलोरी का 60% से 70% हिस्सा केवल खराब कार्बोहाइड्रेट (मैदा, पॉलिश किए हुए चावल, चीनी) से आ रहा है।
यह असंतुलन टाइप-2 डायबिटीज, पेट का मोटापा और दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है।
सेहत का संकट और आपके अधिकार
संविधान का अनुच्छेद 21 हमें सम्मान के साथ जीने और अच्छे स्वास्थ्य का अधिकार देता है। लेकिन मिलावटी खाना इस मौलिक अधिकार का हनन है।
दूध में यूरिया, मसालों में रंग और तेल में मिलावट अब आम बात हो गई है।
यह एक धीमा जहर है जो आने वाली पीढ़ी को खोखला कर रहा है।
आम आदमी क्या करे? (सावधानी के उपाय)
- लेबल पढ़ें: पैकेट के पीछे लिखी सामग्री (Ingredients) को ध्यान से देखें।
- FSSAI मार्क: बिना FSSAI लोगो वाले प्रोडक्ट कभी न खरीदें।
- खुले सामान से बचें: जहां तक संभव हो, खुले तेल और मसालों के बजाय भरोसेमंद ब्रांड्स का चुनाव करें।
- जागरूक बनें: अगर किसी सामान में मिलावट का शक हो, तो ‘खाद्य सुरक्षा विभाग’ में शिकायत जरूर करें।
