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अक्षय तृतीया 2026: 19 या 20 अप्रैल? जानें सही तारीख, सोना खरीदने का मुहूर्त और लक्ष्मी कृपा के अचूक उपाय

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Akshaya Tritiya 2026 Date: हिंदू धर्म में ‘अक्षय तृतीया’ यानी आखा तीज का स्थान बहुत ऊंचा है।

जैसा कि नाम से ही साफ है—’अक्षय’, जिसका अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो, जो कभी खत्म न हो।

मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों का फल अनंत काल तक मिलता है।

साल 2026 में इस पर्व को लेकर लोगों के मन में तारीखों को लेकर थोड़ी उलझन है कि त्योहार 19 अप्रैल को मनाएं या 20 अप्रैल को।

आइए, जानते हैं अक्षय तृतीया की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इस दिन का विशेष महत्व।

तारीख का कंफ्यूजन: 19 या 20 अप्रैल?

पंचांग की गणना के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:50 बजे शुरू हो जाएगी।

लेकिन, हिंदू परंपरा में ‘उदया तिथि’ का विशेष महत्व है, यानी वह तिथि जो सूर्योदय के समय मौजूद हो।

चूंकि 20 अप्रैल को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए अक्षय तृतीया का मुख्य पर्व 20 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाया जाएगा।

ज्योतिषियों का मानना है कि व्रत, दान और पूजा-पाठ के लिए 20 अप्रैल का दिन ही सर्वश्रेष्ठ है।

हालांकि, खरीदारी की शुरुआत कुछ लोग 19 अप्रैल की दोपहर से ही कर सकते हैं।

क्यों खास है अक्षय तृतीया 2026?

इस बार की अक्षय तृतीया कोई सामान्य दिन नहीं है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 20 अप्रैल को अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है।

करीब 30 साल बाद ग्रहों की ऐसी स्थिति बन रही है जो निवेश और नई शुरुआत के लिए ‘सोने पर सुहागा’ मानी जा रही है।

इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ भी कहा जाता है। यानी इस दिन कोई भी शुभ काम (जैसे शादी, सगाई, मुंडन या नया बिजनेस) करने के लिए आपको किसी पंडित से मुहूर्त पूछने की जरूरत नहीं है। पूरा दिन अपने आप में सिद्ध है।

सोना खरीदने और पूजा का शुभ मुहूर्त

अगर आप इस दिन लक्ष्मी जी की विशेष कृपा पाना चाहते हैं और सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन समयों का ध्यान रखें:

  • पूजा का समय: सुबह 05:00 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक। (यह समय ईश्वर की आराधना के लिए सर्वोत्तम है)।
  • सुबह की खरीदारी (चर, लाभ, अमृत मुहूर्त): सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक।
  • दोपहर की खरीदारी (शुभ मुहूर्त): दोपहर 01:58 बजे से दोपहर 03:35 बजे तक।
  • शाम/रात की खरीदारी: शाम 06:49 बजे से रात 10:57 बजे तक। (यह सबसे लंबा और शुभ मुहूर्त है)
  • अगले दिन की खरीदारी (20 अप्रैल सुबह): सुबह 05:51 से 07:27 बजे तक।

मां लक्ष्मी को घर बुलाने के आसान उपाय

अक्षय तृतीया पर धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है।

अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं या सुख-शांति चाहते हैं, तो ये उपाय जरूर करें:

1. कौड़ी का उपाय: मां लक्ष्मी को पूजा के दौरान 7 पीली कौड़ियां चढ़ाएं। पूजा के बाद इन्हें लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। माना जाता है कि इससे पैसा टिकने लगता है।

2. चांदी का सिक्का और हल्दी: एक लाल कपड़े में चांदी का सिक्का और साबुत हल्दी की गांठ बांधकर मां के चरणों में रखें और फिर इसे तिजोरी में रख दें।

3. दीपक का दान: शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और लक्ष्मी जी का प्रवेश होता है।

4. जल और अन्न दान: अक्षय तृतीया पर गर्मी का मौसम रहता है, इसलिए प्यासे को पानी पिलाना, मटके का दान करना, सत्तू, खरबूजा और अनाज का दान करना महापुण्य फलदायी माना गया है।

5. गौ सेवा: इस दिन गाय को गुड़ और हरा चारा खिलाने से पितृ दोष और कुंडली के अन्य दोष शांत होते हैं।

खरीदारी और निवेश का महत्व

सिर्फ सोना ही नहीं, इस दिन भूमि (जमीन), वाहन या किसी नए व्यापार में निवेश करना भी भविष्य में समृद्धि लाता है।

अगर आप सोना नहीं खरीद सकते, तो चांदी का कोई छोटा सामान या तांबे-पीतल के बर्तन खरीदना भी शुभ फल देता है।

अक्षय तृतीया का दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमारे द्वारा किया गया अच्छा काम, दिया गया दान और भगवान की भक्ति कभी बेकार नहीं जाती।

यह दिन नई उम्मीदों और नई शुरुआत का प्रतीक है।

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डिस्क्लेमर: ऊपर दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशेष अनुष्ठान से पहले संबंधित विशेषज्ञ या ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।

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