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केन-बेतवा प्रोजेक्ट में घोटाले का दावा! उमंग सिंघार बोले- ‘जो मुस्लिम परिवार 1980 में गांव छोड़ गया, उसके खाते में डाल दिए करोड़ों रुपए’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ken Betwa Link Project Scam: मध्य प्रदेश की सियासत में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 44 हजार करोड़ रुपए की इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

सिंघार का सीधा आरोप है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में आदिवासियों और स्थानीय किसानों के अधिकारों को कुचला जा रहा है और चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया है।

बिना ग्राम सभा की मंजूरी के कागजों पर खेल

उमंग सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिन आदिवासी गांवों की जमीन इस परियोजना के लिए ली जा रही है, वहां नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई गईं।

कानून के मुताबिक, ऐसी परियोजनाओं के लिए स्थानीय ग्राम सभाओं की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है।

लेकिन नेता प्रतिपक्ष का दावा है कि कई गांवों में कोई ग्राम सभा आयोजित ही नहीं की गई, बल्कि दफ्तरों में बैठकर फर्जी तरीके से रिकॉर्ड तैयार कर लिए गए।

यहाँ तक कि एक ग्राम पंचायत में तो सरपंच की जगह किसी दूसरे ही व्यक्ति के नकली दस्तखत कर फाइलें आगे बढ़ा दी गईं।

सिंघार ने इस पूरी प्रक्रिया को गैर-कानूनी बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

 

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आदिवासी गांव में बाहरी लोगों को करोड़ों का मुआवजा

भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए सिंघार ने खरिहानी गांव का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “इस आदिवासी गांव में कुल 11 करोड़ रुपए का मुआवजा मंजूर हुआ था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसमें से 8 करोड़ रुपए ऐसे लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए, जो साल 1980 से 1990 के बीच ही गांव छोड़कर जा चुके हैं।”

उन्होंने सवाल उठाया कि जिस आदिवासी गांव में कोई मुस्लिम परिवार सालों से नहीं रह रहा, अचानक कागजों पर उनका नाम कैसे आ गया और उनके खातों में करोड़ों रुपए कैसे चले गए?

सिंघार ने छतरपुर के जिला कलेक्टर पर आरोप लगाया कि वे इस पूरे मामले की जांच को दबाने की कोशिश कर रहे हैं और इसके पीछे सत्ताधारी दल के स्थानीय नेताओं की मिलीभगत है।

बुजुर्ग महिलाओं पर पुलिस की सख्ती और प्रताड़ना

नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि 14 जुलाई को उन्होंने पन्ना और छतरपुर जिलों के प्रभावित इलाकों का जमीनी दौरा किया था।

वे कूपी गांव में लगभग 5 से 7 घंटे तक विस्थापित परिवारों के बीच रहे, जहां महिलाओं ने रो-रोकर उन्हें अपनी आपबीती सुनाई।

सिंघार का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की मांग कर रहे आदिवासियों और किसानों पर पुलिस ने बर्बरता से लाठीचार्ज किया।

इस दौरान 80 साल तक की बुजुर्ग महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया और उनके साथ मारपीट की गई।

सिंघार ने सरकार से पूछा कि आखिर एक प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए गरीब किसानों पर इतनी सख्ती क्यों की जा रही है?

चंदा दो, धंधा लो’ का आरोप: 60 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड का दावा

इस पूरे मामले को राजनीतिक चंदे से जोड़ते हुए उमंग सिंघार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने आरोप लगाया कि केन-बेतवा परियोजना का निर्माण कर रही नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी (NCC) ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए बीजेपी को 60 करोड़ रुपए का चंदा दिया है।

सिंघार के मुताबिक, इसी ‘चंदे और ठेके की राजनीति’ के कारण मध्य प्रदेश सरकार कंपनी के दबाव में काम कर रही है और प्रभावित आदिवासियों की जायज मांगों को अनसुना कर रही है।

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उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी का जो नया आलीशान दफ्तर बन रहा है, वह इसी तरह की कमीशनखोरी की राजनीति का नतीजा है।

न्याय की आस में जल सत्याग्रह पर डटे हैं किसान

फिलहाल स्थिति यह है कि पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के साथ-साथ मझगांय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित हुए सैकड़ों आदिवासी और किसान ‘जल सत्याग्रह’ कर रहे हैं।

वे नदी के ठंडे पानी में उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।

‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में प्रभावित लोग आमरण अनशन और मिट्टी सत्याग्रह भी कर रहे हैं।

आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि सरकार या तो उन्हें सम्मानजनक मुआवजा और सही तरीके से पुनर्वास की व्यवस्था दे, या फिर वे इसी पानी में अपनी जान दे देंगे।

आंदोलनकारी लगातार ‘भारत माता की जय’ और ‘अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है’ के नारे लगा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इस पूरे मामले का स्वतंत्र सोशल ऑडिट नहीं कराया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक और मजबूती से लड़ेंगे।

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