MP Panchayat Sachiv Transfer Policy: मध्यप्रदेश में इस समय तबादलों (Transfers) का दौर चल रहा है।
इसी बीच सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के ट्रांसफर को लेकर एक नई और बेहद सख्त गाइडलाइन जारी कर दी है।
सरकार के इस कदम का सीधा असर राज्य के 23 हजार से ज्यादा पंचायत सचिवों पर पड़ने वाला है।
इस नई नीति का सबसे बड़ा और मुख्य बदलाव यह है कि अब कोई भी पंचायत सचिव अपनी मनमर्जी की जगहों पर नहीं टिक पाएगा।
नए नियमों के मुताबिक, अब कोई भी सचिव अपने खुद के होम टाउन (गृहग्राम) या फिर अपने ससुराल वाली ग्राम पंचायत में नौकरी नहीं कर सकेगा।
इतना ही नहीं, निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार ने एक और कड़ा नियम जोड़ा है।
अगर किसी ग्राम पंचायत में सचिव का कोई सगा-संबंधी या रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच चुन लिया जाता है, तो उस सचिव को तुरंत वहां से हटा दिया जाएगा।
कलेक्टर और सीईओ को मिले निर्देश
यह नई गाइडलाइन सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के आदेशों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
इसके क्रियान्वयन के लिए विभाग ने राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) को साफ निर्देश दे दिए हैं।
अधिकारियों से कहा गया है कि वे तय समय सीमा के अंदर इस पूरी ट्रांसफर प्रक्रिया को निपटाएं।
15 जून तक पूरे करने होंगे तबादले
9 जून को सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार, जिले के अंदर होने वाले ये सभी तबादले 15 जून तक हर हाल में पूरे करने होंगे।
ट्रांसफर की यह पूरी प्रक्रिया 1 जून से ही मान्य मानी जाएगी।
नियमों के तहत, ट्रांसफर का प्रस्ताव जिला कलेक्टर की सिफारिश और जिले के प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगा।
इसके बाद अंतिम ट्रांसफर ऑर्डर जिला पंचायत के सीईओ द्वारा जारी किए जाएंगे।
इसमें जिला स्तर और एक जिले से दूसरे जिले (अंतरजिला) में होने वाले तबादलों के नियम भी तय कर दिए गए हैं।
इन स्थितियों में ट्रांसफर होना बिल्कुल तय है:
सरकार ने कुछ ऐसी परिस्थितियां तय की हैं, जिनमें पंचायत सचिव का तबादला होना अनिवार्य (Compulsory) होगा:
1. रिश्तेदारी होने पर: यदि किसी पंचायत में सचिव का कोई रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाता है।
2. लोकल कनेक्शन खत्म: सचिव को उसके पैतृक गांव या ससुराल वाली पंचायत में पोस्टिंग नहीं मिलेगी।
3. 10 साल का नियम: जो सचिव पिछले 10 साल या उससे ज्यादा समय से एक ही जगह पर डटे हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर वहां से हटाया जाएगा।
4. ज्यादा समय वालों को पहले विदाई: अगर 10 साल वाले सचिवों की संख्या ट्रांसफर की तय लिमिट से ज्यादा होती है, तो जो सबसे ज्यादा समय से वहां जमा है, उसका ट्रांसफर पहले होगा।
शिकायत और गड़बड़ी पर बैन के बावजूद होगा ट्रांसफर
आमतौर पर ट्रांसफर का समय बीत जाने के बाद प्रतिबंध लग जाता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में बैन के बाद भी तबादले हो सकेंगे।
जैसे- अगर किसी सचिव पर भ्रष्टाचार, पैसों की हेराफेरी (वित्तीय अनियमितता) या कोई गंभीर शिकायत हो।
इसके अलावा लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू (EOW) या अन्य जांच एजेंसियों के मामलों में फंसे सचिवों का भी कभी भी ट्रांसफर किया जा सकेगा।
महिला और अनुकंपा वाले सचिवों को बड़ी राहत
एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर (अंतरजिला संविलियन) केवल सचिव की खुद की इच्छा (स्वैच्छिक) पर ही होगा। इसमें महिला सचिवों को विशेष सहूलियत दी गई है।
विवाहित, विधवा या तलाकशुदा महिला सचिव अपने पति, ससुराल या माता-पिता के रहने वाले जिले में ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकती हैं।
वहीं, अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले सचिव भी अपने मूल जिले में जाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
इसके लिए उन्हें अपने वर्तमान जिले के सीईओ को आवेदन देना होगा। यदि संबंधित जिले में पद खाली होगा, तो प्रस्ताव भोपाल भेजा जाएगा।
हालांकि, इस ट्रांसफर के बाद सचिव की सीनियरिटी (वरिष्ठता) नए जिले की लिस्ट में सबसे नीचे चली जाएगी और इस सुविधा का लाभ पूरी सर्विस में केवल एक बार ही मिलेगा।
