Panna Well Collapse Accident: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है।
यहाँ अजयगढ़ इलाके के बीहरपुरवा गांव में एक खेत में कुएं की खुदाई चल रही थी, तभी अचानक मिट्टी धंस गई।
इस मलबे में दबने से 5 गरीब मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई।
मरने वालों में आशीष यादव, राजकुमार यादव, रामपाल यादव, चुन्नू यादव और चुनवाद पाल शामिल हैं।
इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह है कि जान गंवाने वाले आशीष, राजकुमार, रामपाल और चुन्नू, चारों एक ही परिवार के सदस्य थे।

इस घटना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
यह पूरा काम सरकारी योजना ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी जी राम जी (VB GRAM J) के तहत कराया जा रहा था।
परिजनों का गंभीर आरोप: “3 घंटे बाद आई सरकारी टीम”
हादसा मंगलवार सुबह करीब 10 बजे का बताया जा रहा है। मृतकों के परिवार वालों और ग्रामीणों में प्रशासन को लेकर भारी गुस्सा है।
परिजनों का सीधा आरोप है कि हादसे की तुरंत सूचना देने के बाद भी कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या सरकारी रेस्क्यू टीम 3 घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची।

जब प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली, तो ग्रामीणों ने खुद हिम्मत दिखाई।
उन्होंने निजी तौर पर जेसीबी मशीन का इंतजाम किया और मलबे को हटाकर मजदूरों को बाहर निकालने का काम शुरू किया।
परिजनों का कहना है कि अगर सरकारी टीम समय पर आ जाती और रेस्क्यू जल्दी शुरू हो जाता, तो शायद इन पांचों मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी।

2 मजदूरों की किस्मत अच्छी थी, पानी पीने बाहर आए और बच गए
गांव वालों के मुताबिक, बीहरपुरवा के रहने वाले बिन्नू अहिरवार के खेत में पिछले 10 दिनों से कुएं को गहरा करने (खुदाई) का काम चल रहा था।
कुल 7 मजदूर इस काम में लगे हुए थे। मंगलवार दोपहर को करीब 12 बजे दो मजदूर कुएं से बाहर पानी पीने के लिए निकले थे।
जैसे ही वे दोनों ऊपर आए, वैसे ही कुएं की गीली और भारी मिट्टी अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। नीचे काम कर रहे बाकी 5 मजदूर उसी मलबे में समा गए।

ग्रामीणों ने जब खुद रेस्क्यू शुरू किया, तो सबसे पहले राजकुमार यादव और चुनवाद पाल के शव बाहर आए।
इसके बाद बाकी तीन मजदूरों की लाशें निकाली जा सकीं।
सरपंच पर लगा ज्यादा पैसों का लालच देने का आरोप
मृतक मजदूरों के रिश्तेदार राकेश यादव ने रोते हुए प्रशासन और स्थानीय सरपंच पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
राकेश ने बताया कि यह कुआं पिछले साल की खुदाई और पानी के रिसाव की वजह से अंदर ही अंदर खोखला और कटा हुआ था।
यह जगह इतनी खतरनाक थी कि कोई भी मजदूर वहां उतरने को तैयार नहीं था।

राकेश का आरोप है कि सरपंच को इस खतरे का अच्छे से अंदाजा था। इसलिए मजदूरों को मनाने के लिए उसने एक चाल चली।
सरपंच ने सामान्य मजदूरी (350 रुपए) को बढ़ाकर 500 रुपए प्रतिदिन देने का लालच दिया।
ज्यादा पैसों की जरूरत के चक्कर में मजदूर इस खतरे को भांप नहीं पाए और कुएं में उतर गए।
राकेश ने कहा, “हमारी मांग है कि हमारी आवाज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचे, ताकि इस लापरवाही के जिम्मेदार सरपंच और देरी से पहुंचने वाले अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो।”

कलेक्टर ने दिया जांच का भरोसा
हादसे की खबर फैलने के बाद पन्ना की कलेक्टर ऊषा परमार मौके पर पहुंचीं।
उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया।
कलेक्टर ने पीड़ित परिवारों को हर संभव सरकारी मदद देने का भरोसा दिया है।
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कराई जाएगी और जो भी इस हादसे या लापरवाही के लिए दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
