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मध्य प्रदेश में TET विवाद को लेकर 12 शिक्षक संघों का बड़ा ऐलान, 8 अप्रैल से प्रदेशव्यापी आंदोलन

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Teacher TET Dispute: मध्य प्रदेश में TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है।

लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी एक आदेश ने राज्य के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि प्रदेश के 12 प्रमुख शिक्षक संगठनों ने आपसी मतभेद भुलाकर एक ‘अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा’ का गठन किया है और सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

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विवाद का मुख्य कारण: ‘रेट्रोस्पेक्टिव’ बदलाव

इस विवाद का मुख्य कारण है वह नियम, जिसे ‘रेट्रोस्पेक्टिव’ (पिछली तारीख से लागू) कहा जा रहा है।

शासकीय शिक्षक संगठन के प्रांताध्यक्ष राकेश दुबे का तर्क है कि जो शिक्षक 1995 से 2011 के बीच उस समय के सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं के तहत नियुक्त हुए थे, उन पर आज यानी 27 साल बाद परीक्षा की शर्त थोपना न केवल नीतिगत रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी अनुचित है।

शिक्षकों का कहना है कि दशकों बाद ऐसे नियम नहीं बदले जा सकते।

क्यों डरे हुए हैं शिक्षक?

DPI द्वारा जारी आदेश में कई बिंदुओं पर स्पष्टता का अभाव है। आदेश यह साफ नहीं करता कि:

  1. किन विशिष्ट संवर्गों को यह परीक्षा देनी अनिवार्य होगी?
  2. क्या पुराने शिक्षकों की नौकरी पर इस परीक्षा के कारण कोई खतरा मंडराएगा?
  3. अगर कोई शिक्षक परीक्षा पास नहीं कर पाता, तो उसकी सेवा शर्तों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इसी स्पष्टता की कमी ने शिक्षकों के मन में यह डर बैठा दिया है कि यह कदम उनकी नौकरी छीनने या उन्हें डिमोट करने की एक साजिश हो सकता है।

8 से 18 अप्रैल तक, आंदोलन का पूरा रोडमैप

अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने सरकार को अपनी ताकत दिखाने के लिए चरणबद्ध तरीके से आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है:

  • 8 अप्रैल: प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन।

  • 11 अप्रैल: ब्लॉक स्तर पर धरना प्रदर्शन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों (विधायक/सांसद) को अपनी समस्याओं से अवगत कराना।

  • 18 अप्रैल: आंदोलन का सबसे बड़ा दिन, जब हजारों शिक्षक राजधानी भोपाल में जुटेंगे और ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ निकालेंगे।

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संयुक्त मोर्चे की प्रमुख मांगें

शिक्षक संगठनों ने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं:

  1. रिव्यू पिटीशन: सुप्रीम कोर्ट के जिस फैसले का हवाला देकर यह आदेश जारी हुआ है, उसके खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करे। शिक्षकों का दावा है कि अन्य राज्य पहले ही ऐसा कर चुके हैं।

  2. DPI आदेश की रद्दी: जब तक कोर्ट में मामला लंबित है, तब तक लोक शिक्षण संचालनालय के इस विवादित आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।

  3. वरिष्ठता का मुद्दा: आजाद अध्यापक संघ की अध्यक्ष शिल्पी शिवान के अनुसार, केवल TET ही नहीं, बल्कि नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता की गणना और सेवा अवधि का पुराना मामला भी इस आंदोलन का अहम हिस्सा है।

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TET क्या है और क्यों अनिवार्य है?

TET यानी Teacher Eligibility Test एक योग्यता परीक्षा है जो कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए अनिवार्य मानी जाती है।

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे लागू किया गया था।

हालांकि, विवाद इसकी अनिवार्यता पर नहीं, बल्कि इसे पुराने शिक्षकों पर ‘अचानक’ और ‘अस्पष्ट’ तरीके से थोपने पर है।

बच्चों की शिक्षा पर भी असर

शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब डेढ़ लाख शिक्षक मानसिक तनाव और असुरक्षा के साये में रहेंगे, तो वे स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा कैसे दे पाएंगे?

यह लड़ाई अब केवल अधिकारों की नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के भविष्य की भी बन गई है।

अब देखना यह है कि 8 अप्रैल से शुरू होने वाले इस आंदोलन के आगे सरकार झुकती है या बीच का कोई रास्ता निकालती है।

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