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धूप के बीच राहत की खबर: MP में 11 सितंबर तक थमी मूसलाधार बारिश, 12 सितंबर से फिर भीगेगा प्रदेश

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Weather Update: मध्य प्रदेश में भारी बारिश का दौर फ़िलहाल थम गया है। मानसून ने प्रदेश में अगले तीन दिनों के लिए एक छोटा ब्रेक लिया है।

मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, 11 सितंबर तक राज्य के किसी भी हिस्से में मूसलाधार या अति भारी बारिश होने के कोई संकेत नहीं हैं।

इस दौरान केवल कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी ही देखने को मिलेगी।

11 सितंबर से बंगाल की खाड़ी में हलचल

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 11 सितंबर को बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम हिस्से में एक नया कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बनने जा रहा है।

इस नए मानसूनी सिस्टम का असर 12 सितंबर से मध्य प्रदेश में दिखाई देने लगेगा।

हालांकि, इस ब्रेक के दौरान अगर स्थानीय स्तर पर नमी और गर्मी बढ़ती है, तो लोकल सिस्टम एक्टिव होने से कुछ जिलों में अचानक तेज बौछारें पड़ सकती हैं।

सैटेलाइट तस्वीरों में साफ़ दिखा आसमान

मंगलवार को आई मौसम विभाग की नई सैटेलाइट तस्वीरों में मध्य प्रदेश के ज़्यादातर हिस्सों से घने बादल गायब नज़र आए।

राजधानी भोपाल सहित राज्य के कई प्रमुख शहरों में तेज़ धूप निकली।

हालांकि, श्योपुर, उज्जैन, इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे पश्चिमी जिलों में बादल छाए रहे और हल्की बारिश दर्ज की गई।

12 सितंबर से सिस्टम एक्टिव होते ही छतरपुर, पन्ना, दमोह और कटनी जिलों में फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश का बारिश गणित

प्रदेश में अब तक औसतन 31.2 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, लेकिन बारिश का वितरण पूरे राज्य में एक समान नहीं रहा है:

 * पूर्वी हिस्सा: जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में पिछले हफ्ते हुई अच्छी बारिश से आंकड़ों में बड़ा सुधार आया है।

बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, जबलपुर और मंडला जैसे जिलों में बारिश की कमी अब सिमटकर 4% से 24% तक ही रह गई है।

 * पश्चिमी हिस्सा: इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, बैतूल, धार, मंदसौर और विदिशा सहित कई पश्चिमी जिलों में स्थिति अब भी चिंताजनक है, जहाँ सामान्य से 7% से लेकर 55% तक कम पानी गिरा है।

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