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नर्मदापुरम में मूंग खरीदी पर संग्राम: 40 किसान नेता हिरासत में, जेल में बैठकर जारी है विरोध; आत्महत्या की चेतावनी दी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Farmers Protest: मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम संभाग में मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है।

संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन ने अब उग्र रूप ले लिया है।

सोमवार को किसानों का प्रस्तावित भोपाल कूच और मुख्यमंत्री आवास का घेराव पुलिस की सख्त नाकाबंदी के कारण रुक गया, जिसके बाद किसान नर्मदापुरम के पवित्र सेठानी घाट पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।

पुलिस की सख्त नाकाबंदी और गिरफ्तारियां

किसानों को भोपाल जाने से रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन ने रविवार रात से ही मोर्चा संभाल लिया था।

नर्मदापुरम, हरदा, इटारसी, डोलरिया, सिवनी मालवा और पिपरिया सहित कई इलाकों में भारी बैरिकेडिंग की गई।

* हिरासत और नजरबंदी: हरदा में 25 और नर्मदापुरम में करीब 14 किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया है।

* अस्थायी जेल: हरदा में गिरफ्तार किसानों को एक अस्थायी जेल में रखा गया है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि किसानों को शांतिपूर्ण माहौल में रखा गया है और उनके लिए चाय-नाश्ते का इंतजाम किया गया है।

* बातचीत न होने से नाराजगी: अस्थायी जेल में बंद किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है और कोई भी वरिष्ठ अधिकारी उनसे सीधी बातचीत करने को तैयार नहीं है।

सेठानी घाट बना आंदोलन का नया केंद्र

भोपाल जाने से रोके जाने के बाद नाराज किसान नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर जमा हो गए।

देखते ही देखते वहां टेंट लगा दिया गया और किसानों की भीड़ जुटने लगी। घाट पर किसानों ने अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया:

* हनुमान चालीसा का पाठ और कथा: किसानों ने सरकार को ‘सद्बुद्धि’ देने के लिए घाट पर भगवान सत्यनारायण की कथा कराई और हनुमान चालीसा का पाठ किया।

* कड़ा रुख और चेतावनी: राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष राकेश गौर ने स्पष्ट किया कि अगर पुलिस ने किसानों पर दबाव बनाने या उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की, तो वे नर्मदा नदी में कूद जाएंगे या जहर खा लेंगे।

* आगे की रणनीति: क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के नेताओं ने चेताया है कि यह आंदोलन अब पीछे नहीं हटेगा। अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो आने वाले दिनों में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।

आम जनता और राहगीरों की बढ़ी परेशानी

किसानों को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा की गई कड़ी बैरिकेडिंग का असर आम जनता पर भी पड़ा।

* यातायात डायवर्जन: भोपाल चौराहे पर रास्ता बंद कर दिए जाने से लोगों को फोरलेन के जरिए बुधनी भेजा गया। इस वजह से आम लोगों, नौकरीपेशा कर्मचारियों और शिक्षकों को लगभग 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ा।

* प्रशासन का पक्ष: एएसपी अभिषेक राजन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है, किसी को बेवजह रोका नहीं जा रहा है।

सीएम से मुलाकात न होने पर भड़का गुस्सा

किसान नेताओं के अनुसार, उन्होंने 20 जुलाई को ही प्रशासन के जरिए मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से मिलने का समय मांगा था।

* तीन बार बदला समय: प्रशासन ने पहले 26 जुलाई को मुलाकात का समय दिया, जिसे बाद में बदलकर सुबह 9 बजे और फिर शाम 6 बजे किया गया।

* अंतिम समय पर रद्द: जब किसान भोपाल जाने की तैयारी कर चुके थे, तब प्रशासन ने बताया कि मुख्यमंत्री दिल्ली चले गए हैं। इस रवैये से नाराज होकर किसानों ने आपात बैठक बुलाई और घाट पर ही धरना देने का फैसला किया।

फिलहाल, इटारसी-नर्मदापुरम मार्ग सहित पूरे संभाग में पुलिस बल सतर्क है।

किसानों ने गांवों में मौजूद ट्रैक्टरों को तैयार रहने का संदेश दिया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और संवेदनशील हो सकती है।

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