Supreme Court Action on NCERT: सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की किताबों में न्यायपालिका से जुड़े विवादित चैप्टर मामवे में बेहद सख्त रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर न्यायपालिका की गलत छवि पेश करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अदालत ने इस मामले में सबसे कड़ी कार्रवाई उन लोगों पर की है, जिन्होंने इस विवादित अध्याय को तैयार किया था।
लेखकों पर गिरी गाज: अब नहीं मिलेगा काम
कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार को भविष्य में सरकारी पाठ्यक्रम तैयार करने की किसी भी प्रक्रिया से तुरंत हटा दिया जाए।
BREAKING NEWS 🚨 📢
Supreme Court bars teachers involved in Judiciary Chapter controversy from authoring any NCERT books in future.
Michel Danino
Suparna Divakar
Alok Prasanna Kuma
— News Arena India (@NewsArenaIndia) March 11, 2026
इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि इन व्यक्तियों को ऐसी किसी भी जिम्मेदारी में शामिल न किया जाए जिसमें पब्लिक फंड (जनता का पैसा) इस्तेमाल होता हो।
न्यायपालिका की गरिमा सर्वोपरि
विवाद उस चैप्टर को लेकर था जिसमें न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार को लेकर ऐसी टिप्पणियां की गई थीं, जिन्हें कोर्ट ने ‘अनुचित’ माना।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह रचनात्मक आलोचना के खिलाफ नहीं है, लेकिन शिक्षा के माध्यम से बच्चों के मन में संस्थाओं के प्रति गलत धारणा पैदा करना गलत है।
अदालत ने आदेश दिया है कि अगर ‘चैप्टर 4’ को दोबारा लिखा गया है, तो उसे तब तक नहीं छापा जाएगा जब तक कि एक नई विशेषज्ञ समिति उसे अपनी मंजूरी न दे दे।
We have started systemic changes in NCERT, nothing will be published without being vetted by domain experts, SG Tushar Mehta tells SC
— Press Trust of India (@PTI_News) March 11, 2026
अब जज और वकील तय करेंगे सिलेबस
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा और न्यायपालिका के बीच एक नया तालमेल बिठाने के लिए सरकार को एक हफ्ते के भीतर एक ‘हाई-लेवल कमेटी’ बनाने का निर्देश दिया है।
इस कमेटी में एक रिटायर्ड सीनियर जज, एक जाने-माने विद्वान और एक प्रतिष्ठित वकील को शामिल किया जाएगा।
साथ ही, अब से उच्च कक्षाओं (Higher Classes) के लिए कानून से जुड़ा कोई भी सिलेबस तैयार करने में नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, भोपाल की भूमिका अनिवार्य होगी।

मीडिया और लापरवाह अधिकारियों को चेतावनी
इस फैसले में कोर्ट ने उन अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जिन्होंने इस चैप्टर को हरी झंडी दी थी।
नेशनल सिलेबस एंड टीचिंग लर्निंग मटेरियल कमेटी (NSTC) के उन सदस्यों की भूमिका की भी जांच होगी, जिनकी निगरानी में यह विवादित सामग्री पब्लिश हुई।
इसके अलावा, कोर्ट ने उन मीडिया संस्थानों को भी कड़ी चेतावनी दी है जिन्होंने इस मुद्दे पर अपमानजनक टिप्पणियां की थीं।
सरकार से ऐसे लोगों की पहचान करने को कहा गया है ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यह संदेश देता है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में जो कुछ भी पढ़ाया जा रहा है, उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
विशेषकर जब बात संवैधानिक संस्थाओं की हो, तो तथ्यों और मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है।
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