Balen Shah Nepal Election: हिमालय की गोद में बसे देश नेपाल में इन दिनों फिजाएं बदली हुई हैं।
गलियों में अब पुराने नारों की जगह रैप गानों की धुन है और चर्चा है एक ऐसे शख्स की जिसने न केवल पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी, बल्कि युवाओं के मन में ‘बदलाव’ की उम्मीद जगा दी है।
हम बात कर रहे हैं 35 साल के बालेन शाह (बलेंद्र शाह) की, जो नेपाल के 2026 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े और चर्चित चेहरे बनकर उभरे हैं।

कौन हैं बालेन शाह? रैपर से ‘किंगमेकर’ तक का सफर
- 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में जन्मे बालेन शाह की पहचान बहुआयामी है।
- वे पेशे से एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता का असली जरिया बना रैप संगीत।
- बालेन ने अपने गानों (जैसे ‘बलिदान’) के जरिए समाज की कुरीतियों, भ्रष्टाचार और राजनीतिक सुस्ती पर कड़ा प्रहार किया।
यही वजह रही कि नेपाल की नई पीढ़ी यानी Gen-Z (जनरेशन जेड) ने उन्हें अपना हीरो मान लिया।

बालेन ने साल 2022 में पहली बार तब इतिहास रचा, जब उन्होंने किसी भी बड़ी पार्टी का सहारा लिए बिना, एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता।
उन्होंने सालों से जमे जमाए दिग्गजों को धूल चटा दी।
मेयर रहते हुए उन्होंने शहर की सफाई, बुनियादी ढांचे और अतिक्रमण हटाने जैसे साहसिक फैसले लिए, जिसने उन्हें ‘एक्शन मैन’ की छवि दी।

2026 का चुनाव: युवा बनाम अनुभव की जंग
जनवरी 2026 में बालेन शाह ने अचानक मेयर पद से इस्तीफा दे दिया।
यह फैसला चौंकाने वाला था, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी रणनीति थी।
उन्होंने सीधा मुकाबला करने का मन बनाया नेपाल के सबसे ताकतवर नेता और पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली से।

बालेन ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने का फैसला किया, जो ओली का गढ़ माना जाता है।
यह चुनाव केवल दो व्यक्तियों के बीच नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं के बीच है।
एक तरफ 73 वर्षीय केपी शर्मा ओली और उनके पुराने सियासी दांव-पेंच हैं, तो दूसरी तरफ 35 वर्षीय बालेन शाह हैं जो राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के चेहरे बनकर उभरे हैं।
रबी लामिछाने की अगुवाई वाली इस पार्टी ने दिसंबर 2025 में बालेन को अपना पीएम उम्मीदवार घोषित किया था।

Gen-Z का विद्रोह और शुरुआती रुझान
नेपाल के मौजूदा हालात को विशेषज्ञों ने ‘Gen-Z विद्रोह’ का नाम दिया है।
युवा मतदाता अब भ्रष्टाचार और पुरानी पार्टियों के सत्ता संघर्ष से ऊब चुके हैं।
6 मार्च 2026 के शुरुआती चुनावी रुझान बताते हैं कि बालेन शाह की पार्टी (RSP) कई प्रमुख सीटों पर नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल जैसी पारंपरिक पार्टियों को पीछे छोड़ रही है।

बालेन का एजेंडा साफ है:
- भ्रष्टाचार मुक्त शासन: सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाना।
- व्यावहारिक विकास: कागजों के बजाय जमीन पर काम करना।
- पीढ़ीगत बदलाव: युवाओं को सत्ता के केंद्र में लाना।

क्या बालेन शाह बनेंगे प्रधानमंत्री?
फिलहाल वोटों की गिनती जारी है। हालांकि बालेन शाह को शुरुआती बढ़त मिली है, लेकिन नेपाल की जटिल संसदीय व्यवस्था में प्रधानमंत्री बनना इतना आसान नहीं है।
अगर किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता, तो गठबंधन की राजनीति शुरू होगी।
सवाल यह है कि क्या पुरानी पार्टियां एक युवा रैपर को सत्ता सौंपने के लिए तैयार होंगी?

बालेन की लोकप्रियता का आलम यह है कि शहर से लेकर गांव तक लोग उन्हें ‘नेपाल का नया सूरज’ मान रहे हैं।
अगर शुरुआती रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो नेपाल के इतिहास में यह सबसे बड़ा लोकतांत्रिक उलटफेर होगा।
यह संकेत होगा कि अब हिमालयी देश की कमान बुजुर्गों के हाथों से निकलकर उस पीढ़ी के पास जा रही है जो भविष्य की बात करती है, अतीत की नहीं।


