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नेपाल की बाढ़ से बिहार में हाहाकार: गंडक बैराज के 36 गेट खुले, 8 जिलों में रेड अलर्ट

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bihar Floods After Nepal : नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ के बाद बिहार के सीमावर्ती इलाकों में गंभीर संकट पैदा हो गया है।

नेपाल से आ रहे भारी पानी के दबाव को देखते हुए बगहा स्थित गंडक (वाल्मीकिनगर) बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं।

गुरुवार सुबह से बैराज से 4 बार में लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है।

दोपहर तक बैराज से पानी की निकासी का आंकड़ा 1 लाख 6 हजार क्यूसेक के पार पहुंच गया, जिसका सीधा मतलब है कि बैराज से हर सेकेंड करीब 79.3 लाख लीटर पानी नदी में बहाया जा रहा है।

नेपाल में हुई भीषण तबाही का मंज़र गंडक बैराज पर साफ देखा जा सकता है।

नदी के तेज़ बहाव के साथ नेपाल से बहकर आए मलबे, घरेलू सामान, फ्रिज और मृत मवेशी लगातार बिहार की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं।

केंद्रीय जल आयोग ने चेतावनी जारी की है कि गंडक नदी में 3 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं और तटीय इलाकों में फ्लैश फ्लड (अचानक आने वाली बाढ़) का खतरा बना हुआ है।

8 जिलों में हाई अलर्ट, खतरे में लाखों जिंदगियां

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने उत्तर और मध्य बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

जिन जिलों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की हिदायत दी गई है, वे हैं:

  1.  * पश्चिमी चंपारण
  2.  * पूर्वी चंपारण
  3.  * गोपालगंज
  4.  * सारण
  5.  * मुजफ्फरपुर
  6.  * वैशाली
  7.  * सीतामढ़ी
  8.  * शिवहर

प्रशासन ने गंडक और गंगा नदी के किनारे बसे निचले इलाकों के गांवों को तुरंत खाली कराने का काम शुरू कर दिया है।

लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों और राहत शिविरों में भेजा जा रहा है।

क्यूसेक का गणित और नदी का गणित

आमतौर पर बाढ़ की खबरों में ‘क्यूसेक’ शब्द का इस्तेमाल होता है।

सरल शब्दों में कहें तो क्यूसेक पानी की कुल मात्रा नहीं, बल्कि उसके बहने की रफ्तार (Flow Rate) मापने की इकाई है।

1 क्यूसेक का अर्थ है एक सेकेंड में 1 क्यूबिक फीट (घन फुट) पानी का बहना। 1 घन फुट में लगभग 28.32 लीटर पानी होता है।

इस हिसाब से जब बैराज से 1 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जाता है, तो प्रति सेकेंड लाखों लीटर पानी निचले इलाकों की तरफ बढ़ता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की जिस नदी से पानी का सैलाब आ रहा है, उसकी चौड़ाई महज 22 मीटर के आसपास है, जबकि बिहार की गंडक नदी की चौड़ाई लगभग 200 मीटर है।

चौड़ाई ज्यादा होने के कारण पानी का फैलाव और दबाव थोड़ा बंट जाता है। इसके अलावा वाल्मीकिनगर गंडक बैराज की क्षमता करीब 8.5 लाख क्यूसेक पानी का दबाव झेलने की है।

फिलहाल 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी आने का अनुमान है, इसलिए बैराज के ढांचे को कोई खतरा नहीं है। असली चिंता नदी के प्रचंड बहाव और जलस्तर के अचानक बढ़ने को लेकर है।

जमीनी हालात: कहां कितना नुकसान?

* खगड़िया में 50 हजार से ज्यादा घर जलमग्न:

खगड़िया जिले की स्थिति सबसे चिंताजनक बनी हुई है। यहां गंगा और बूढ़ी गंडक नदियां खतरे के निशान से करीब 80 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। कोसी और बागमती नदियां भी उफान पर हैं।

जिले की 20 पंचायतों में 50 हजार से अधिक घर पानी में डूब चुके हैं। गोगरी, परबत्ता और खगड़िया सदर प्रखंड सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

स्थानीय प्रशासन ने इन इलाकों के अंचलाधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और नावों के जरिए लोगों को निकाला जा रहा है।

* वैशाली में 400 घर डूबे:

वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड के चकसिंगार, जुरावनपुर, फतेहपुर और शिवनगर समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है।

लगभग 400 घर पूरी तरह से पानी से घिर चुके हैं और लोग छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं।

* मुंगेर में सड़कें बनीं ठिकाना:

मुंगेर में गंगा नदी चेतावनी बिंदु (38.83 मीटर) से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।

निचले इलाकों के 100 से अधिक घरों में पानी भर जाने के कारण पीड़ित लोग सड़कों पर तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं।

CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वे, बोले- ‘खतरा अभी टला नहीं’

बाढ़ के खतरे को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया।

उन्होंने बगहा, वाल्मीकिनगर, बेतिया और मोतिहारी के सीमावर्ती क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद गंडक बैराज का दौरा किया।

मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और जल संसाधन विभाग की टीम से आगे की तैयारियों और सुरक्षा उपायों की समीक्षा की।

मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “नेपाल के सैलाब को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। स्थिति को धीरे-धीरे नियंत्रित किया जा रहा है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। हमारी पहली प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें हर संभव सहायता पहुंचाना है।”

प्रशासनिक तैयारियां और नेपाल बॉर्डर पर पाबंदी

बाढ़ की भयावहता को देखते हुए बिहार सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है:

* सुरक्षा और राहत कार्य: प्रभावित इलाकों में NDRF और SDRF की कई टीमों को तैनात किया गया है।

विस्थापित लोगों के लिए जगह-जगह कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) शुरू किए गए हैं, जहां मुफ्त भोजन की व्यवस्था की जा रही है।

* नहरें कराई गईं खाली: गंडक बैराज में नेपाल से आने वाले पानी को जगह देने के लिए उससे जुड़ी सभी सहायक नहरों के पानी को खाली करा लिया गया है।

* नेपाल सीमा पर आवाजाही बंद: सुरक्षा के लिहाज से बगहा में नेपाल बॉर्डर पर आम आवाजाही रोक दी गई है।

सिर्फ नेपाल में फंसे भारतीयों को वापस आने और भारत में फंसे नेपाली नागरिकों को वापस जाने की अनुमति दी जा रही है।

नदी के तेज़ बहाव को देखते हुए प्रशासन ने आम लोगों से गंडक और गंगा नदी के पास न जाने और नाव संचालन से बचने की सख्त अपील की है।

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