New Labour Code Benefits: देश के श्रमिक वर्ग के लिए 21 नवंबर, 2025 एक ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हुआ है।
केंद्र सरकार ने 5 साल पहले संसद से पारित 4 नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।
यह कदम दशकों पुराने श्रम कानूनों को बदलते हुए एक आधुनिक और व्यापक ढांचा प्रदान करता है।
इन सुधारों का सबसे सकारात्मक प्रभाव देश की महिला और ट्रांसजेंडर श्रमशक्ति पर पड़ने वाला है, जिनके लिए रोजगार के नए द्वार खुल गए हैं।
श्रमेव जयते!
आज मेरे श्रमिक भाई-बहनों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। हमारी सरकार ने चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं। आजादी के बाद यह श्रमिकों के हित में किया गया सबसे बड़ा रिफॉर्म है। यह देश के कामगारों को बहुत सशक्त बनाने वाला है। इससे जहां नियमों का पालन करना बहुत आसान होगा, वहीं ‘ईज…
— Narendra Modi (@narendramodi) November 21, 2025
क्यों हैं ये नए श्रम कानून खास?
इन नए कोड्स को श्रम सुधारों की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
ये कुल 29 पुराने और अव्यवस्थित श्रम कानूनों की जगह लेकर एकीकृत और स्पष्ट नियम लाए हैं।
मुख्य रूप से ये चार कोड हैं: मजदूरी पर कोड (2019), औद्योगिक संबंध कोड (2020), सामाजिक सुरक्षा कोड (2020) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्तें कोड (2020)
इनका उद्देश्य न केवल श्रमिकों के हितों की बेहतर सुरक्षा करना है, बल्कि व्यवसायों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबारी सुगमता) को भी बढ़ाना है।
कांट्रेक्चुअल वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा होगी सुनिश्चित!
New Labour Codes to ensure Social Security for Contractual Workers.#श्रमेव_जयते#ShramevJayate pic.twitter.com/Ox9wGQj89J
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) November 21, 2025
महिलाओं और ट्रांसजेंडर श्रमिकों के लिए क्या बदलाव हुए हैं?
पुराने कानूनों में महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट (रात्रि पाली) में काम करने पर कई प्रतिबंध थे, जिससे उनकी नौकरी के अवसर सीमित हो जाते थे। नए कोड में इस परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया गया है।
1. नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति:
अब महिलाएं कारखानों, दुकानों, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग सहित सभी क्षेत्रों में शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं।
हालाँकि, इसके लिए नियोक्ता को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी:
- नियोक्ता को महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, आवाजाही और कार्यस्थल पर पर्याप्त प्रबंध सुनिश्चित करना होगा।
- सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा गार्डों की तैनाती अनिवार्य होगी।
- कर्मचारी को परिवहन की सुविधा उपलब्ध करानी होगी।
- कई मामलों में, महिला कर्मचारी को नाइट शिफ्ट के लिए अपने परिवार की लिखित और स्वैच्छिक सहमति देनी होगी।
2. ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए समान अधिकार:
नए कोड में पहली बार ट्रांसजेंडर श्रमिकों को विशेष रूप से ‘जेंडर-न्यूट्रल प्रोटेक्शन’ (लिंग-तटस्थ सुरक्षा) के दायरे में लाया गया है।
इसका मतलब है कि उन्हें कार्यस्थल पर महिलाओं के समान ही सभी सुरक्षा उपायों, अवसरों और सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
उनके साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव पर रोक लगाई गई है और शिकायत निवारण समितियों में उनके प्रतिनिधित्व का भी प्रावधान है।
3. ओवरटाइम पर डबल वेतन:
नए नियमों के तहत, यदि कोई कर्मचारी (चाहे वह पुरुष हो, महिला हो या ट्रांसजेंडर) निर्धारित समय से अधिक काम करता है, तो उसे उस ओवरटाइम के लिए अपने सामान्य वेतन का दोगुना भुगतान प्राप्त होगा।
यह प्रावधान आय बढ़ाने का एक बड़ा अवसर प्रदान करता है।
श्रम संहिताओं से कार्यक्षेत्र में बढ़ेगी महिलाओं की हिस्सेदारी।
Labour code unlocks the full strength of Nari Shakti.#श्रमेव_जयते#ShramevJayate pic.twitter.com/63d2lxYU7C
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) November 21, 2025
सभी श्रमिकों के लिए 8 प्रमुख लाभ
- एक साल बाद ही ग्रेच्युटी: यह सबसे बड़ा बदलाव है। अब ग्रेच्युटी पाने के लिए किसी एक संस्थान में लगातार पांच साल काम करना जरूरी नहीं रहा। सिर्फ एक साल की सेवा के बाद ही कर्मचारी ग्रेच्युटी के लाभ के योग्य हो जाएगा। यह विशेष रूप से फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है।
- सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: गिग (ऐप-आधारित काम) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे स्विगी, जोमैटो डिलीवरी पार्टनर) को पहली बार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। एग्रीगेटर कंपनियों को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1-2% सामाजिक सुरक्षा फंड में योगदान देना होगा। इससे लगभग 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लाभ मिलेगा।
- सभी के लिए न्यूनतम मजदूरी का अधिकार: नए कोड में यह सुनिश्चित किया गया है कि देश का कोई भी श्रमिक न्यूनतम मजदूरी से वंचित न रहे।
- नियुक्ति पत्र अनिवार्य: अब हर कंपनी को अपने हर कर्मचारी को एक लिखित नियुक्ति पत्र (अपॉइंटमेंट लेटर) देना अनिवार्य होगा, जिसमें काम की शर्तें और वेतन स्पष्ट रूप से उल्लेखित होंगे। इससे मनमानी पर अंकुश लगेगा।
- मुफ्त स्वास्थ्य जांच: 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए नियोक्ता द्वारा साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करना अनिवार्य किया गया है।
- वेतन भुगतान की तारीख तय: अब कंपनियों को हर महीने की 7 तारीख तक कर्मचारियों का वेतन देने का प्रावधान है, जिससे वेतन में देरी की समस्या कम होगी।
- कार्यस्थल सुरक्षा मजबूत: 500 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में एक सुरक्षा समिति का गठन करना अनिवार्य होगा। खतरनाक उद्योगों में सुरक्षा मानकों को और सख्त किया गया है।
- सिंगल रजिस्ट्रेशन सिस्टम: व्यवसायों के लिए अब एक ही रजिस्ट्रेशन, एक ही लाइसेंस और एक ही रिटर्न दाखिल करने की व्यवस्था लागू की गई है। इससे नियामकीय अनुपालन (Compliance) का बोझ काफी कम होगा।
Labour code provisions: pic.twitter.com/HgWulA0G6b
— Lord Maximus (@Perseve9ranceup) November 22, 2025
एक नए युग की शुरुआत
नए श्रम कोड भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।
ये न केवल श्रमिकों, विशेष रूप से महिलाओं और ट्रांसजेंडरों, को अधिकार संपन्न बनाते हैं, बल्कि एक पारदर्शी और सरल व्यवस्था के जरिए देश में निवेश के माहौल को भी बेहतर बनाने का काम करेंगे।
यह सुधार ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक सशक्त कदम है, जो एक मजबूत और सुरक्षित कार्यबल के निर्माण में मदद करेगा। #ShramevJayate


