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LPG के झंझट से मिलेगी आजादी: ओडिशा के वैज्ञानिकों ने बनाया जादुई सोलर चूल्हा, रात में भी बनेगा खाना!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Solar Induction Cooking: आज के समय में जब रसोई गैस (LPG) की कीमतें बजट बिगाड़ रही हैं, तब ओडिशा से एक ऐसी तकनीक सामने आई है जो आम आदमी और व्यापारियों, दोनों की जेब का बोझ हल्का कर सकती है।

ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च (OUTR) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा आधुनिक सोलर कुकिंग सिस्टम विकसित किया है, जो न केवल दिन में सूरज की रोशनी से चलता है, बल्कि रात में भी खाना पकाने की सुविधा देता है।

किसने और कैसे किया यह कमाल?

इस शानदार प्रोजेक्ट का नेतृत्व वैज्ञानिक सुधांशु शेखर साहू ने किया है।

उनके साथ इस मिशन में डॉ. मनोज नायक (NIT नई दिल्ली) और ढेंकानाल के एक हुनरमंद इलेक्ट्रिशियन संतोष स्वांई शामिल रहे।

टीम ने पुरानी तकनीक की कमियों को दूर करते हुए इसे पूरी तरह से डायरेक्ट करंट (DC) आधारित बनाया है।

पहले के कॉइल हीटिंग सिस्टम बहुत अधिक बिजली खाते थे, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे नया रूप देकर इंडक्शन कुकिंग के साथ जोड़ दिया है।

सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इस तकनीक को 2021 में पेटेंट के लिए भेजा गया था और 2024 में इसे आधिकारिक मंजूरी भी मिल गई है।

सिस्टम कैसे काम करता है? (दिन और रात की सुविधा)

अक्सर सोलर चूल्हों के साथ समस्या यह होती थी कि वे केवल धूप रहने तक ही काम करते थे। लेकिन इस नए सिस्टम ने इस बाधा को तोड़ दिया है:

  1. दिन के समय: सोलर पैनल सूरज की ऊर्जा को सीधे डीसी (DC) पावर में बदलते हैं, जिससे इंडक्शन चूल्हा सीधे चलता है।

  2. रात के समय: दिन के दौरान जो ऊर्जा स्टोर (बैटरी में) की जाती है, उसे इन्वर्टर के जरिए एसी (AC) में बदलकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका मतलब है कि डिनर बनाने के लिए आपको धूप का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

कैफे में हुआ सफल ट्रायल: बिरयानी और पुलाव तैयार

इस तकनीक का केवल लैब में परीक्षण नहीं हुआ है, बल्कि इसे जमीन पर भी उतारा गया है।

भुवनेश्वर के ‘गोल्डन ब्रू कैफे’ में इसका पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चल रहा है।

कैफे में बिरयानी और पुलाव जैसे भारी व्यंजन इस सोलर सिस्टम से बनाए जा रहे हैं।

कैफे मालिकों का कहना है कि इसमें समय भी कम लगता है और खाना बनाने की लागत लगभग जीरो हो गई है।

आम तौर पर 2 किलोवाट का पैनल काफी होता है, लेकिन व्यावसायिक उपयोग को देखते हुए यहाँ 3 किलोवाट का सिस्टम लगाया गया है।

एक बार का निवेश, उम्र भर की राहत

इस सिस्टम की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें सिर्फ एक बार पैसा लगाना पड़ता है।

सोलर पैनल और सेटअप की लागत कुछ समय में गैस सिलेंडर के पैसे  बचाकर वसूल हो जाती है।

वैज्ञानिक अब इस कोशिश में जुटे हैं कि इस सिस्टम की निर्माण लागत को और कम किया जाए ताकि यह हर गांव और शहर के मध्यमवर्गीय परिवार तक पहुँच सके।

भविष्य की राह

फिलहाल इस सिस्टम का प्रदर्शन OUTR के इनक्यूबेशन सेंटर में किया जा रहा है।

यह तकनीक न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करेगी, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगी।

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