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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगा विपक्ष! 50 सदस्यों का समर्थन जरूरी, जानें प्रक्रिया

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Lok Sabha Speaker Om Birla: संसद के बजट सत्र में चल रहे हंगामे के बीच खबर आई है कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का मन बना लिया है।

सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष इस बात से नाराज है कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है।

हंगामे की मुख्य वजह कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति न मिलना बताया जा रहा है।

विवाद की जड़: राहुल गांधी और बोलने की आजादी

विपक्षी सांसदों का आरोप है कि जब भी राहुल गांधी या अन्य विपक्षी नेता अहम मुद्दों (जैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौता या गलवान विवाद) पर बोलना चाहते हैं, तो उन्हें रोक दिया जाता है।

हाल ही में सदन की कार्यवाही के दौरान दिलचस्प नजारा देखने को मिला जब स्पीकर ने शशि थरूर को बोलने का मौका दिया, लेकिन पूरी कांग्रेस पार्टी इस जिद पर अड़ी रही कि पहले राहुल गांधी बोलेंगे।

इसी खींचतान की वजह से सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।

क्या है अविश्वास प्रस्ताव? (What is No-confidence motion)

नियमों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 14 से 20 दिन पहले नोटिस देना होता है।

विपक्ष ने इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी है ताकि बजट सत्र के अगले चरण में इसे पेश किया जा सके।

विपक्ष का कहना है कि उनके पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा है क्योंकि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया

  • प्रस्ताव पेश करने के लिए 50 लोकसभा सदस्यों का समर्थन जरूरी
  • 14 दिन पहले स्पीकर को लिखित नोटिस देना होता है
  • स्पीकर पर लगे आरोप स्पष्ट और ठोस होने चाहिए
  • प्रस्ताव स्वीकार होने पर सदन में चर्चा और वोटिंग होती है
  • प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते
  • पास होने के लिए लोकसभा में मौजूद सदस्यों का बहुमत चाहिए
  • प्रस्ताव पास हुआ तो लोकसभा अध्यक्ष को पद छोड़ना पड़ता है
  • अब तक 1954, 1966 और 1985 में प्रस्ताव लाया जा चुका है। तीनों बार खारिज 

मकर द्वार पर प्रदर्शन: ‘हमें सस्पेंड कर सकते हो, खामोश नहीं’

संसद के मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों का विरोध प्रदर्शन जारी है।

हाथों में तख्तियां लिए सांसदों ने नारा दिया कि सरकार उन्हें निलंबित तो कर सकती है, लेकिन उनकी आवाज को चुप नहीं करा सकती।

पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि क्या सरकार को महिला सांसदों से खतरा है?

उन्होंने स्पीकर के कुछ बयानों को अपमानजनक करार दिया।

सरकार का पलटवार: ‘राहुल गांधी की जिद ने संसद रोकी’

दूसरी तरफ, सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा:

“सरकार हर मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल हंगामा करना चाहता है। आज संसद केवल एक व्यक्ति की जिद की वजह से ठप पड़ी है।”

बीजेपी का कहना है कि विपक्ष राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भी बाधा डाल रहा है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ रही है।

विपक्ष जहां एकजुट होकर स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है, वहीं सत्ता पक्ष इसे लोकतंत्र के काम में रुकावट बता रहा है।

अखिलेश यादव जैसे नेताओं का कहना है कि बीजेपी बुनियादी सवालों से बचने के लिए बहस नहीं होने दे रही है।

अब सबकी नजरें बजट सत्र के अगले हिस्से पर हैं, जहां यह अविश्वास प्रस्ताव भारतीय राजनीति में एक नया ‘धमाका’ कर सकता है।

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