Lok Sabha Speaker Om Birla: संसद के बजट सत्र में चल रहे हंगामे के बीच खबर आई है कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का मन बना लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष इस बात से नाराज है कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है।
हंगामे की मुख्य वजह कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति न मिलना बताया जा रहा है।
Opposition to move no-confidence motion against Lok Sabha Speaker Om Birla: Sources pic.twitter.com/e8PsUKw2Wp
— ANI (@ANI) February 9, 2026
विवाद की जड़: राहुल गांधी और बोलने की आजादी
विपक्षी सांसदों का आरोप है कि जब भी राहुल गांधी या अन्य विपक्षी नेता अहम मुद्दों (जैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौता या गलवान विवाद) पर बोलना चाहते हैं, तो उन्हें रोक दिया जाता है।
हाल ही में सदन की कार्यवाही के दौरान दिलचस्प नजारा देखने को मिला जब स्पीकर ने शशि थरूर को बोलने का मौका दिया, लेकिन पूरी कांग्रेस पार्टी इस जिद पर अड़ी रही कि पहले राहुल गांधी बोलेंगे।
इसी खींचतान की वजह से सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष लोकसभा स्पीकर के खिलाफ No confidence motion लाने की तैयारी कर रहा है। लोकसभा की कार्यवाही स्थगित हुई तो सबको लगा कि राहुल गांधी इस पर कुछ बोलेंगे, लेकिन… pic.twitter.com/1TAMzzNTXY
— Poonam Pandey (@pandeypoonam20) February 9, 2026
क्या है अविश्वास प्रस्ताव? (What is No-confidence motion)
नियमों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 14 से 20 दिन पहले नोटिस देना होता है।
विपक्ष ने इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी है ताकि बजट सत्र के अगले चरण में इसे पेश किया जा सके।
विपक्ष का कहना है कि उनके पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा है क्योंकि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।
The opposition were planning to for No confidence Motion against speaker.
Opposition MPs accuse the Speaker of repeatedly blocking Rahul Gandhi from speaking on key issues during the Budget session, especially when he tried to quote relevant material on national security,… pic.twitter.com/cdFoPYU0ac
— Who_Care (@yadav_sunny84) February 9, 2026
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया
- प्रस्ताव पेश करने के लिए 50 लोकसभा सदस्यों का समर्थन जरूरी
- 14 दिन पहले स्पीकर को लिखित नोटिस देना होता है
- स्पीकर पर लगे आरोप स्पष्ट और ठोस होने चाहिए
- प्रस्ताव स्वीकार होने पर सदन में चर्चा और वोटिंग होती है
- प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते
- पास होने के लिए लोकसभा में मौजूद सदस्यों का बहुमत चाहिए
- प्रस्ताव पास हुआ तो लोकसभा अध्यक्ष को पद छोड़ना पड़ता है
- अब तक 1954, 1966 और 1985 में प्रस्ताव लाया जा चुका है। तीनों बार खारिज
VIDEO | As the Opposition will move a no-confidence motion against Lok Sabha Speaker Om Birla, Congress Rajya Sabha MP Vivek Tankha says, “The Opposition does this when they are disheartened and lose hope. Ultimately, Parliament is the biggest panchayat. The Speaker’s post is… pic.twitter.com/s8r55M7cVq
— Press Trust of India (@PTI_News) February 9, 2026
मकर द्वार पर प्रदर्शन: ‘हमें सस्पेंड कर सकते हो, खामोश नहीं’
संसद के मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों का विरोध प्रदर्शन जारी है।
हाथों में तख्तियां लिए सांसदों ने नारा दिया कि सरकार उन्हें निलंबित तो कर सकती है, लेकिन उनकी आवाज को चुप नहीं करा सकती।
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि क्या सरकार को महिला सांसदों से खतरा है?
उन्होंने स्पीकर के कुछ बयानों को अपमानजनक करार दिया।
Opposition to move no-confidence motion against Lok Sabha Speaker Om Birla: Sources
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— Prameya English (@PrameyaEnglish) February 9, 2026
सरकार का पलटवार: ‘राहुल गांधी की जिद ने संसद रोकी’
दूसरी तरफ, सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा:
“सरकार हर मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल हंगामा करना चाहता है। आज संसद केवल एक व्यक्ति की जिद की वजह से ठप पड़ी है।”
बीजेपी का कहना है कि विपक्ष राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भी बाधा डाल रहा है।
#WATCH | Delhi: Congress MP Shashi Tharoor says, “I came to speak on the Budget, but it looks like the government and the Lok Sabha Speaker are not interested in running the House. I will come again at 2 PM and try to speak in the House. The Finance Minister was not even sitting… pic.twitter.com/ZjW7x5Ddro
— ANI (@ANI) February 9, 2026
आगे क्या होगा?
फिलहाल सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ रही है।
विपक्ष जहां एकजुट होकर स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है, वहीं सत्ता पक्ष इसे लोकतंत्र के काम में रुकावट बता रहा है।
अखिलेश यादव जैसे नेताओं का कहना है कि बीजेपी बुनियादी सवालों से बचने के लिए बहस नहीं होने दे रही है।
अब सबकी नजरें बजट सत्र के अगले हिस्से पर हैं, जहां यह अविश्वास प्रस्ताव भारतीय राजनीति में एक नया ‘धमाका’ कर सकता है।


