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टाटा ट्रस्ट्स के समर्थन में उतरे 6 पारसी संगठन: PM मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा– देशहित के लिए टाटा का पुराना मॉडल बचाना जरूरी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Tata Trusts PM Modi letter: टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करने और इसके मैनेजमेंट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब देश-विदेश के 6 बड़े पारसी संगठन खुलकर सामने आ गए हैं।

इन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर टाटा ट्रस्ट्स का समर्थन किया है।

इनकी मुख्य मांग है कि टाटा ग्रुप के सालों पुराने मालिकाना हक और कामकाज के तरीके में कोई बदलाव न किया जाए, ताकि इसकी परोपकार और समाज सेवा की परंपरा पर कोई आंच न आए।

पारसी संगठनों का साफ कहना है कि इस पूरे मामले को सिर्फ दो शेयरधारकों के बीच की आपसी लड़ाई या विवाद न समझा जाए।

इसका सीधा संबंध देश के सबसे बड़े और भरोसेमंद बिजनेस ग्रुप के भविष्य से है, जो सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।

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शेयर बाजार में लिस्टिंग से क्या होगा नुकसान?

पारसी संगठनों ने अपनी चिट्ठी में इस बात पर जोर दिया है कि टाटा संस को शेयर बाजार में लाना (IPO लाना) कोई आम प्रशासनिक फैसला नहीं है।

यदि कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट हो जाती है, तो उस पर हर तीन महीने में मुनाफा दिखाने, तिमाही नतीजे बेहतर करने और निवेशकों को खुश रखने का भारी दबाव बन जाएगा।

इस दबाव के चलते टाटा का वह सालों पुराना कारोबारी तरीका कमजोर पड़ सकता है, जिसके तहत कंपनी बिना किसी शॉर्ट-टर्म दबाव के बड़े, दूरदर्शी और सामाजिक हित से जुड़े प्रोजेक्ट्स में खुलकर निवेश करती है।

चैरिटेबल ट्रस्ट्स के पास है 66% हिस्सेदारी

आपको बता दें कि टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी ‘टाटा संस’ की करीब 66% हिस्सेदारी टाटा के चैरिटेबल ट्रस्ट्स के पास है।

इस अनूठे मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कंपनियों से होने वाली कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर देश की भलाई, अस्पतालों के निर्माण, शिक्षा और वैज्ञानिक रिसर्च में खर्च किया जाता है।

संगठनों का मानना है कि इसी मॉडल के कारण टाटा बिना व्यावसायिक दबाव के देशहित में लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा पाता है।

देश के विकास में टाटा का ऐतिहासिक योगदान

चिट्ठी में इस बात का भी विशेष जिक्र किया गया है कि टाटा ने केवल व्यवसाय और मुनाफा कमाने का काम नहीं किया, बल्कि देश को टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (TIFR) जैसे बेहतरीन रिसर्च सेंटर दिए हैं।

आज के समय में भी टाटा ग्रुप देश के भविष्य से जुड़े बड़े सेक्टरों—जैसे सेमीकंडक्टर निर्माण, रक्षा (डिफेंस), इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs) और ग्रीन एनर्जी में भारी निवेश कर रहा है।

संगठनों का कहना है कि सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को सच करने में टाटा के इस सेवा-भाव वाले मॉडल को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है।

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