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जेब खाली, बजट फेल! एक हफ्ते में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें अपने शहर के नए रेट्स

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Petrol Diesel Price Hike: आज की सुबह आम आदमी के लिए एक और तगड़ा झटका लेकर आई है।

देश की सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर ईंधन की कीमतों में इजाफा कर दिया है।

आज यानी मंगलवार सुबह से पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू हो गई है।

चौंकाने वाली बात यह है कि यह झटका इतनी जल्दी लगा है कि लोग पिछले झटके से उबर भी नहीं पाए थे।

अभी पिछले शुक्रवार (15 मई) को ही तेल कंपनियों ने करीब 3 रुपए प्रति लीटर की एक बहुत बड़ी बढ़ोतरी की थी।

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि महज एक हफ्ते के भीतर ही आम जनता को दो बड़े झटके लग चुके हैं।

सात दिनों के अंदर कुल मिलाकर तेल की कीमतों में लगभग 4 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसे ही कहते हैं- ‘एक तो करेला, ऊपर से नीम चढ़ा’।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम? 

आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अचानक ऐसा क्या हो गया कि तेल के दाम आसमान छूने लगे?

बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे घरेलू वजहें नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं।

इस समय दुनिया में राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) चरम पर है।

खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने आग में घी का काम किया है।

दुनिया का एक बड़ा तेल आपूर्ति मार्ग, जिसे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) कहा जाता है, वहां से होने वाली तेल की सप्लाई रुकने या बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है।

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जब भी दुनिया में ऐसा कोई संकट आता है, कच्चे तेल (Crude Oil) की कमी होने का डर सताने लगता है।

इसी डर की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल बाहर से खरीदता है।

भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां इस महंगे कच्चे तेल को खरीद तो रही थीं, लेकिन घाटे के डर से घरेलू बाजार में उसे पुराने दामों पर नहीं बेच पा रही थीं।

कंपनियों को हर दिन करोड़ों का नुकसान हो रहा था।

हालांकि, पिछले शुक्रवार को जो 3 रुपए की बढ़ोतरी हुई थी, उससे कंपनियों का घाटा करीब 25% कम जरूर हुआ था, लेकिन लागत और बिक्री की कीमत के बीच का अंतर (Under-Recovery) फिर भी बहुत ज्यादा था।

इसी अंतर को पाटने के लिए आज दोबारा कीमतें बढ़ानी पड़ीं।

चारों महानगरों का हाल: कहां कितना महंगा हुआ तेल?

इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के चार बड़े महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुछ इस प्रकार हैं:

दिल्ली: देश की राजधानी में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर 98.64 रुपए प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे बढ़कर 91.58 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है।

मुंबई: मायानगरी में हमेशा की तरह तेल की कीमतें सबसे ऊंचे स्तरों में से एक हैं। यहाँ पेट्रोल 91 पैसे बढ़कर 107.59 रुपए और डीजल 94 पैसे की बढ़ोतरी के साथ 94.08 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है।

कोलकाता: इस बार सबसे तगड़ी मार कोलकाता पर पड़ी है। यहाँ पेट्रोल में 96 पैसे का उछाल आया है, जिससे यह 109.70 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं डीजल 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपए प्रति लीटर हो गया है।

चेन्नई: यहाँ पेट्रोल 82 पैसे महंगा होकर 104.49 रुपए और डीजल 86 पैसे की बढ़त के साथ 96.11 रुपए प्रति लीटर पर आ गया है।

पिक्चर अभी बाकी है: आगे और बढ़ सकते हैं दाम

अगर आपको लग रहा है कि यह आखिरी बढ़ोतरी थी, तो थोड़ा संभल जाइए।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान का यह तनाव जल्दी शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

तेल कंपनियां एक साथ बोझ डालने के बजाय किश्तों में (धीरे-धीरे) दाम बढ़ा सकती हैं ताकि बाजार पर एकदम से झटका न लगे।

आपकी रसोई और जेब पर इसका क्या असर होगा?

पेट्रोल-डीजल का महंगा होना सिर्फ गाड़ी चलाने वालों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आपकी थाली पर पड़ता है।

हफ्तेभर में जो 4 रुपए की संचयी बढ़ोतरी (Cumulative Hike) हुई है, उसका सबसे पहला और बड़ा असर माल ढुलाई यानी लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर दिखेगा।

देश में ज्यादातर भारी गाड़ियां और ट्रक डीजल से चलते हैं। जब डीजल महंगा होता है, तो ट्रकों का किराया (Freight Charges) अपने आप बढ़ जाता है।

जब किराया बढ़ेगा, तो खेतों से मंडियों तक और मंडियों से आपके घर के पास की दुकान तक आने वाली सब्जियां, फल, दूध, राशन और रोजमर्रा के सामान की ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाएगी।

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इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले कुछ ही हफ्तों में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) में बड़ा उछाल आ सकता है।

आम आदमी के लिए यह दोहरा संकट है- एक तरफ दफ्तर जाने के लिए गाड़ी का खर्च बढ़ गया, तो दूसरी तरफ घर की रसोई का बजट भी पूरी तरह बिगड़ने वाला है।

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