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MP समेत देशभर में 20 मई को नहीं खुलेंगी दवा की दुकानें, घर में आज ही स्टॉक कर लें जरूरी दवाइयां

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Medical store strike 20 May: अगर आपके घर में कोई बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।

मध्य प्रदेश सहित देश भर में कल यानी 20 मई को मेडिकल स्टोर बंद रहने वाले हैं।

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर बुलाई गई इस एक दिवसीय हड़ताल के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में दवाओं की किल्लत हो सकती है।

अकेले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 3 हजार से ज्यादा और दिल्ली में करीब 15 हजार दुकानें बंद रहेंगी।

संगठन का दावा है कि इस हड़ताल में देश भर के लगभग 7 से 8 लाख केमिस्ट, फार्मासिस्ट और दवा वितरक शामिल हो रहे हैं।

हालांकि, मरीजों की सहूलियत को देखते हुए अस्पतालों के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर्स को इस बंद से मुक्त रखा गया है।

क्यों हो रहा है इतना बड़ा विरोध? (हड़ताल की वजह)

दवा व्यापारियों के इस गुस्से के पीछे सबसे बड़ी वजह है—ई-फार्मेसी (ऑनलाइन दवा बिक्री) और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दिया जा रहा भारी डिस्काउंट (Predatory Pricing)।

स्थानीय दवा दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियां और बड़े कॉरपोरेट घराने बाजार पर कब्जा करने के लिए दवाओं को उनकी लागत (खरीद मूल्य) से भी कम कीमत पर बेच रहे हैं।

इसे तकनीकी भाषा में ‘प्रिडेटरी प्राइसिंग’ कहते हैं। केमिस्ट एसोसिएशन का आरोप है कि अगर यह सिलसिला यूं ही चलता रहा, तो गली-मोहल्लों के छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल स्टोर पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।

जब ये छोटे दुकानदार बाजार से बाहर हो जाएंगे, तो भविष्य में इन बड़ी कंपनियों की तानाशाही चलेगी, जिसका नुकसान सीधे आम जनता को उठाना पड़ेगा।

मरीजों की सेहत से खिलवाड़ का आरोप

केमिस्ट एसोसिएशन केवल अपने व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठा रहा है।

भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ और अन्य पदाधिकारियों का कहना है कि घर-घर पहुंच रही ऑनलाइन दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी करने के लिए सरकार के पास कोई पुख्ता सिस्टम नहीं है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी ठोस जांच के दवाइयां धड़ल्ले से बेची जा रही हैं।

इसके कारण कई गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं:

फर्जी प्रिस्क्रिप्शन (पर्चे): इंटरनेट ऐप्स पर एक ही पर्चे का बार-बार इस्तेमाल करके या फर्जी पर्चा बनाकर प्रतिबंधित दवाएं और एंटीबायोटिक्स आसानी से मंगवाई जा रही हैं।

नकली और एक्सपायरी दवाएं: ऑनलाइन डिलीवरी की आड़ में नकली और एक्सपायर्ड दवाएं मरीजों तक पहुंचने की संभावना बढ़ गई है, जिससे किसी की जान भी जा सकती है।

दवा कोई आम सामान नहीं है: एसोसिएशन का साफ कहना है कि दवा कोई कपड़े या राशन का सामान नहीं है जिसे बिना डॉक्टरी सलाह और बिना कड़े नियमों के बेचा जाए। यह सीधे इंसानी जिंदगी से जुड़ा मामला है।

सरकार के इन दो नोटिफिकेशन पर है असली विवाद

दवा व्यापारियों की नाराजगी केंद्र सरकार के दो पुराने नोटिफिकेशन (नियमों के ड्राफ्ट) को लेकर है, जिन्हें वे तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

1. जीएसआर 817 (ई) – (GSR 817 E):

यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन सरकार अगस्त 2018 में लेकर आई थी। इसका मकसद ई-फार्मेसी को कानूनी मान्यता देना और नियम तय करना था।

लेकिन विवाद के कारण यह ड्राफ्ट आज तक न तो पूरी तरह लागू हो पाया और न ही सरकार ने इसे वापस लिया।

केमिस्टों का कहना है कि इसी कानूनी धुंधलेपन (ग्रे एरिया) का फायदा उठाकर ऑनलाइन कंपनियां बिना किसी कड़े नियम-कायदे के काम कर रही हैं।

2. जीएसआर 220 (ई) – (GSR 220 E):

यह नियम कोविड-19 महामारी के दौरान लाया गया था ताकि लॉकडाउन में लोगों के घरों तक दवाइयां पहुंचाई जा सकें।

व्यापारियों का कहना है कि कोरोना काल में यह अस्थायी व्यवस्था ठीक थी, लेकिन अब कंपनियां इसी नियम की आड़ में अपना ऑनलाइन धंधा चमका रही हैं।

इसे अब तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

“हम डिजिटल इंडिया के खिलाफ नहीं, सुरक्षा चाहते हैं”

AIOCD के महासचिव राजीव सिंघल ने स्पष्ट किया है कि दवा व्यापारी देश में हो रहे डिजिटलाइजेशन या तकनीक के खिलाफ नहीं हैं।

वे चाहते हैं कि सरकार एक पारदर्शी और सुरक्षित सिस्टम बनाए।

एसोसिएशन का सुझाव:

सरकार डॉक्टरों, केमिस्टों और मरीजों के लिए एक सुरक्षित सरकारी पोर्टल तैयार करे (किसी प्राइवेट कंपनी का नहीं)।

इस पोर्टल के जरिए मरीज के मोबाइल पर एक खास क्यूआर (QR) कोड भेजा जाए, जो दवा की दुकान पर एक बार स्कैन होने के बाद दोबारा इस्तेमाल न हो सके।

इससे दवाओं और पर्चों की डुप्लीकेसी रुकेगी और नशीली या प्रतिबंधित दवाओं का गलत इस्तेमाल बंद होगा।

बंद के दौरान कहाँ मिलेंगी दवाइयां?

भले ही केमिस्ट एसोसिएशन ने 20 मई को पूर्ण बंद का आह्वान किया है, लेकिन आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए कुछ जगहों पर दवाएं उपलब्ध रहेंगी:

अस्पतालों के मेडिकल स्टोर: सभी निजी और सरकारी अस्पतालों के अंदर चलने वाले मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे।

सरकारी केंद्र: प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र और अमृत (AMRIT) फार्मेसी स्टोर्स पर दवाइयां मिलती रहेंगी।

आपातकालीन काउंटर: कुछ जिलों में एसोसिएशन ने आपात स्थिति के लिए चुनिंदा दुकानों को खुला रखने का फैसला किया है।

अपील: दवा व्यापारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी असुविधा से बचने के लिए अपनी रोजमर्रा की जरूरी और लाइफ-सेविंग दवाएं (जैसे बीपी, शुगर, दिल की दवाएं) 20 मई से पहले ही खरीदकर रख लें।

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