PM Modi Red Fort Speech: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार देश को संबोधित किया।
अपने लगभग 85 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, तकनीकी प्रगति और सामाजिक सुधारों पर खुलकर बात की।
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का सबसे प्रमुख और चर्चित हिस्सा देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा रहा।
उन्होंने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि भारत ने बंदूक उठाने वाले हथियारबंद नक्सलवाद को तो लगभग खत्म कर दिया है, लेकिन अब देश के सामने ‘दिमागी नक्सलियों’ की एक नई और खतरनाक चुनौती खड़ी हो गई है।

क्या हैं ‘दिमागी नक्सल’? पीएम मोदी की चेतावनी
पीएम मोदी ने हथियारबंद उग्रवादियों और वैचारिक रूप से समाज को भटकाने वाले लोगों के बीच का अंतर साफ किया।
उन्होंने कहा कि दशकों तक देश के कई हिस्से हिंसा की चपेट में रहे, लेकिन सरकार के सख्त कदमों से अब बंदूकों का खौफ खत्म हो चुका है।
“हमने देश को हथियारबंद नक्सलवाद से मुक्त कराने में सफलता हासिल की है। जिन इलाकों में कभी गोलियों की गूंज होती थी, वहां आज विकास का तिरंगा लहरा रहा है। लेकिन, नक्सली सोच वाले ‘दिमागी नक्सल’ आज भी हमारे समाज के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं। ये लोग मौकों की तलाश में रहते हैं ताकि हिंसा और भ्रम फैलाकर युवाओं को गलत रास्ते पर ले जाया जा सके।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ऐसे तत्वों की पहचान करना और उन्हें समाज से अलग-थलग करना बेहद ज़रूरी है।
3,500 से अधिक जवानों की शहादत को नमन
प्रधानमंत्री ने नक्सली हिंसा के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले देश के सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि नागरिकों की रक्षा करते हुए 3,500 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं।
कई बार सीमाओं पर होने वाले युद्धों की तुलना में आंतरिक सुरक्षा में हमारे ज़्यादा पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं।
उन्होंने कहा कि 2014 में सरकार में आने के बाद से ही नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने का संकल्प लिया गया था, जो आज पूरा होता दिख रहा है।

महिला आरक्षण पर राजनीति न करने की अपील
देश की आधी आबादी के अधिकारों और उनकी भागीदारी पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से एक विशेष अपील की।
उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के कानून पर अब किसी भी दल को राजनीति नहीं करनी चाहिए।
* महिलाओं की नीतिगत भागीदारी: समय की मांग है कि देश के नीति निर्माण में माताओं और बहनों का योगदान बढ़े।
* सभी दलों से आग्रह: पीएम ने कहा, “मैं सभी राजनीतिक दलों से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूँ कि आइए, मिलकर इसे लागू करें। इसका श्रेय आप लीजिए, लेकिन हमारी माताओं-बहनों को उनका हक ज़रूर दीजिए।”

2047 का लक्ष्य और ‘शक्ति की सप्तधारा’
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब भारत छोटे सपनों के भरोसे नहीं चल सकता।
देश का लक्ष्य साल 2047 तक भारत को पूरी तरह से विकसित राष्ट्र बनाना है।
इसके लिए उन्होंने देश के विकास के 7 प्रमुख स्तंभों (शक्ति की सप्तधारा) का खाका पेश किया:
1. मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल मार्केट (उत्पादन)
भारत को दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना होगा। लुधियाना (पंजाब) से लेकर तिरुपुर (तमिलनाडु) तक हमारे टेक्सटाइल सेक्टर और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाना होगा।
2. किसान और फूड प्रोसेसिंग
भारतीय खान-पान, मसालों, फलों और सब्जियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड बनाना होगा ताकि देश के किसानों को उनकी उपज का सही और बड़ा मोल मिल सके।
3. टेक्नोलॉजी, AI और इनोवेशन
आज की दुनिया डेटा सेंटर, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग की है।
* 1 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग: आगामी एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI और आधुनिक तकनीक की मुफ्त ट्रेनिंग दी जाएगी।
* फ्री ऑनलाइन कोचिंग: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था शुरू की जाएगी।
4. गति शक्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर
देश में सीमलेस कनेक्टिविटी के लिए मेट्रो नेटवर्क, अत्याधुनिक पोर्ट्स (पोर्ट-लेड डेवलपमेंट) और हाईवे का तेज़ी से विस्तार किया जाएगा।
5. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
रक्षा उत्पादन में भारत की आत्मनिर्भरता को दुनिया ने स्वीकार किया है। अब साइबर सुरक्षा भी हर घर के लिए एक बड़ी चुनौती बन रही है, जिसमें भारत की युवा शक्ति को आगे आना होगा।
6. ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी
पर्यावरण और समुद्री संसाधनों के संतुलन के साथ विकास करना। ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर एनर्जी, कोस्टल टूरिज्म और फिशरीज के क्षेत्र में भारत दुनिया को नया रास्ता दिखा रहा है।
7. भारत की सॉफ्ट पावर
योग, आयुर्वेद, हस्तशिल्प, भारतीय संस्कृति, सिनेमा, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट के जरिए भारत दुनिया में अपनी सांस्कृतिक छाप छोड़ रहा है।

2014 से 2026: विकास के आंकड़ों का रिपोर्ट कार्ड
पीएम मोदी ने पिछले 12 सालों में देश में आए बदलावों और बुनियादी ढांचे में हुई प्रगति के आंकड़े देश के सामने रखे:
क्षेत्र/सुविधा | 2014 से पहले की स्थिति | वर्तमान स्थिति (2026)
- सोलर एनर्जी क्षमता: 2 गीगावॉट | 160 गीगावॉट
- पाइप गैस (शहर): 70 शहर | 700 शहर (1.75 करोड़ घर)
- डिफेंस प्रोडक्शन: आधार स्तर | 4 गुना वृद्धि
- खादी व ग्रामोद्योग: सीमित दायरा | 5 गुना वृद्धि
- मोबाइल उत्पादन: शुरुआती स्तर | 33 गुना वृद्धि
- डिजिटल ट्रांजेक्शन: नगण्य | 100 गुना वृद्धि

पीएम सूर्यघर योजना से बिजली बिल ‘ज़ीरो’
प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत अब तक 50 लाख से अधिक घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं।
इससे न केवल हजारों परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है, बल्कि लोग अतिरिक्त बिजली सरकार को बेचकर कमाई भी कर रहे हैं।

वैश्विक कंपनियों और बैंकों में भारत का दबदबा
पीएम मोदी ने भारत के कॉर्पोरेट और बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़े लक्ष्य तय किए:
* फॉर्च्यून 500 में भारतीय कंपनियां: आने वाले समय में दुनिया की टॉप 500 कंपनियों में कम से कम 50 भारतीय कंपनियां शामिल होनी चाहिए।
* दुनिया के टॉप 5 बैंक: दुनिया के 5 सबसे बड़े बैंकों में कम से कम एक बैंक भारत का होना चाहिए।
* ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म्स: भारत की अकाउंटिंग और कंसल्टिंग फर्म्स को वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करना होगा।

एसी कमरों में बैठकर ग्लोबलाइजेशन पर ज्ञान देने वालों पर तंज
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान उन आलोचकों पर भी निशाना साधा जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान पर सवाल उठाते थे।
उन्होंने कहा, “जब हमने आत्मनिर्भरता का संकल्प लिया था, तब कुछ लोग एयर कंडीशन (AC) कमरों में बैठकर हमें ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) का पाठ पढ़ाते थे। आज वही दुनिया देख रही है कि संकट के समय हर देश अपने हितों को साध रहा है। अगर हमने समय पर आत्मनिर्भरता का रास्ता न चुना होता, तो आज हम वैश्विक चुनौतियों का सामना नहीं कर पाते।”

छात्रा की गिरी टोपी, पीएम ने पहनाई
संबोधन समाप्त होने के बाद जब प्रधानमंत्री मोदी लाल किले के प्रांगण में बच्चों से मिलने पहुंचे, तो एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला।
एक स्कूली छात्रा जब पीएम मोदी के पैर छूने के लिए नीचे झुकी, तो उसके सिर से उसकी टोपी ज़मीन पर गिर गई।
प्रधानमंत्री ने तुरंत झुककर ज़मीन से टोपी उठाई और बड़े प्यार से बच्ची के सिर पर दोबारा पहना दी। इस छोटे से वाकये ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन केवल उपलब्धियों का ब्योरा नहीं था, बल्कि यह 2047 के ‘विकसित भारत’ का एक ठोस संकल्प पत्र भी था।
हथियारबंद नक्सलवाद के अंत का ऐलान करने के साथ-साथ उन्होंने देशवासियों को आंतरिक वैचारिक चुनौतियों से सतर्क रहने का संदेश दिया और देश की युवा शक्ति, महिलाओं और किसानों के भरोसे भारत को विश्व गुरु बनाने का आह्वान किया।
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