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असम में एयरपोर्ट पर नहीं, सड़क पर लैंड हुआ PM का एयरक्राफ्ट; चीन-बांग्लादेश के लिए खतरे की घंटी!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

PM Modi Assam Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम में ऐसी ‘धमाकेदार एंट्री’ की, जिसने न केवल देशवासियों का ध्यान खींचा बल्कि पड़ोसी मुल्कों को भी भारत की सैन्य ताकत का अहसास करा दिया।

चुनावी सरगर्मी और पड़ोसी देशों के बदलते राजनीतिक हालात के बीच पीएम मोदी का यह दौरा रणनीतिक और विकास, दोनों ही नजरिए से ऐतिहासिक रहा।

हाईवे बना रनवे: जब आसमान से उतरे मोदी

आमतौर पर प्रधानमंत्री का विमान एयरपोर्ट के रनवे पर उतरता है, लेकिन इस बार नजारा अलग था।

डिब्रूगढ़ के पास मोरन बाईपास (NH-127) पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर जब पीएम मोदी का C-130 विमान उतरा, तो यह पूर्वोत्तर के लिए एक नया इतिहास था।

यह एयरस्ट्रिप चीन बॉर्डर से महज 300 किलोमीटर दूर है।

लैंडिंग के बाद आसमान में भारत की वायुसेना का जलवा दिखा।

राफेल, सुखोई-30 और स्वदेशी तेजस समेत 16 लड़ाकू विमानों ने करीब 30 मिनट तक एरियल शो किया।

इन विमानों ने हाईवे पर ही लैंडिंग और टेक-ऑफ का डेमो दिया, जो यह बताता है कि युद्ध जैसी स्थिति में भारत की सड़कें भी फाइटर जेट्स के लिए रनवे का काम कर सकती हैं।

चीन और बांग्लादेश को कड़ा संदेश

यह दौरा सिर्फ उद्घाटन तक सीमित नहीं था।

जानकारों का मानना है कि जिस तरह से चीन सीमा के करीब सैन्य ताकत का प्रदर्शन हुआ, वह उन ताकतों को सीधा जवाब है जो पूर्वोत्तर की स्थिरता को चुनौती देने की कोशिश करते हैं।

साथ ही, बांग्लादेश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण भारत की सुरक्षा चाक-चौबंद करता है।

कनेक्टिविटी का नया अध्याय: कुमार भास्कर वर्मा सेतु

पीएम मोदी ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन किया।

3,030 करोड़ की लागत से बना यह 6-लेन पुल पूर्वोत्तर का पहला ‘एक्स्ट्राडोज्ड’ पुल है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच का सफर, जो पहले घंटों में तय होता था, अब सिर्फ 7 मिनट में पूरा हो जाएगा।

इस पुल में भूकंपरोधी तकनीक और ‘रियल-टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम’ का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे बेहद सुरक्षित बनाता है।

डिजिटल और शैक्षिक क्रांति

विकास की कड़ी में पीएम ने कामरूप के अमिंगांव में नेशनल डेटा सेंटर का भी उद्घाटन करेंगे।

यह सेंटर सरकारी विभागों के डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखेगा और डिजास्टर रिकवरी का काम करेगा।

इससे पूर्वोत्तर के राज्यों में सरकारी सेवाएं तेजी से और ऑनलाइन मिल सकेंगी।

इसके अलावा, IIM गुवाहाटी के नए परिसर का उद्घाटन शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं के लिए बड़े अवसर लेकर आएगा।

सियासी मायने और भविष्य का रोडमैप

असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

पिछले तीन महीनों में पीएम मोदी का यह तीसरा दौरा है।

राज्य में 2016 से एनडीए (NDA) की सरकार है, और इस बार पीएम ने ₹5,450 करोड़ के प्रोजेक्ट्स की सौगात देकर अपनी स्थिति और मजबूत की है।

इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) क्या है?

मोरन हाईवे का 4.4 किलोमीटर लंबा हिस्सा अब दोहरा काम करेगा।

आम दिनों में यहां गाड़ियाँ चलेंगी, लेकिन युद्ध या आपदा के समय यहां 40 टन के फाइटर और 74 टन के भारी मालवाहक विमान उतर सकेंगे।

यह ‘डुअल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर’ का बेहतरीन उदाहरण है।

प्रधानमंत्री का यह दौरा साफ करता है कि सरकार अब पूर्वोत्तर को सिर्फ भारत का कोना नहीं, बल्कि विकास और सुरक्षा का मुख्य केंद्र मानती है।

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