Homeन्यूजPM मोदी बोले- हमारी प्राथमिकता अपनों की सुरक्षा, नागरिकों और पावर प्लांट...

PM मोदी बोले- हमारी प्राथमिकता अपनों की सुरक्षा, नागरिकों और पावर प्लांट पर हमला बर्दाश्त नहीं

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

PM Modi on Middle East Crisis: दुनिया की नजरें इस वक्त पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) पर टिकी हैं, जहां युद्ध अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा के बजट सत्र के दौरान देश को संबोधित किया।

पीएम मोदी का यह बयान न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा और देश की अर्थव्यवस्था की स्थिरता से भी जुड़ा है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है।

पिछले तीन हफ्तों से जारी इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर गहरा असर डाला है।

भारत के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यहीं से आता है।

ऊर्जा सुरक्षा: 27 से बढ़कर 41 हुए सप्लायर देश

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

प्रधानमंत्री ने एक रणनीतिक बदलाव का खुलासा करते हुए बताया कि भारत ने अब अपने तेल और गैस के स्रोतों का दायरा बढ़ा दिया है।

पहले भारत अपनी जरूरतों के लिए 27 देशों पर निर्भर था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 41 देश हो गई है।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि अगर पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई रुकती है, तो देश में पेट्रोल, डीजल या गैस की किल्लत न हो।

पीएम ने साफ कहा कि “होर्मुज जलडमरूमध्य” (Strait of Hormuz), जो तेल व्यापार का एक मुख्य समुद्री रास्ता है, वहां जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है।

लेकिन सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत में एलपीजी और अन्य ईंधनों की सप्लाई सुचारू रहे।

नागरिकों की सुरक्षा: “हर भारतीय की जान कीमती”

पीएम मोदी ने सदन को बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना रही है।

उन्होंने जानकारी दी कि अब तक 3,75,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट चुके हैं।

इसमें अकेले ईरान से लौटे 1,000 लोग शामिल हैं, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र हैं।

पीएम ने बताया कि उन्होंने खुद खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की है और सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है।

इसके अलावा, छात्रों के भविष्य को देखते हुए सीबीएसई (CBSE) ने खाड़ी देशों में होने वाली 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं फिलहाल स्थगित कर दी हैं, ताकि तनाव के बीच छात्रों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री व्यापार पर कड़ा रुख

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में दो टूक कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर हमले और होर्मुज के रास्ते को रोकना भारत को स्वीकार्य नहीं है।

भारत का 60% एलपीजी आयात इसी रास्ते से होता है।

ऐसे में समुद्री रास्तों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अनिवार्य है।

पीएम ने जोर देकर कहा कि नागरिकों और बिजली संयंत्रों (Power Plants) को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में मंजूर नहीं किया जा सकता।

देश के भीतर की तैयारी: राशन, कोयला और बिजली

युद्ध के वैश्विक दुष्प्रभावों को देखते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारत हर स्थिति के लिए तैयार है:

  • अन्न भंडार: पीएम ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त अनाज का स्टॉक है। वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने के बावजूद किसानों को सस्ते दामों पर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है।
  • कोयला और बिजली: गर्मी का मौसम शुरू होने वाला है और बिजली की मांग बढ़ेगी। पीएम ने बताया कि पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त भंडार है और सप्लाई सिस्टम की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
  • तेल रिजर्व: भारत 65 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के सुरक्षित भंडारण (Strategic Reserves) पर तेजी से काम कर रहा है।

बातचीत ही एकमात्र रास्ता

कूटनीति पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत की भूमिका हमेशा से स्पष्ट रही है।

उन्होंने सभी पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है और शांतिपूर्ण समाधान के लिए सभी को प्रोत्साहित कर रहा है।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन देश को यह भरोसा दिलाने के लिए था कि सरकार अंतरराष्ट्रीय संकट के समय पूरी तरह मुस्तैद है।

चाहे वह एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा हो, या फिर देश की अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़’ यानी ऊर्जा क्षेत्र को बचाए रखना, भारत सरकार एक ठोस रणनीति के तहत काम कर रही है।

#PMModi #MiddleEastCrisis #IndiaEnergySecurity #OperationGharWapsi #WestAsiaConflict #GlobalEconomy #IndianDiplomacy #OilSupply

- Advertisement -spot_img