Raghav Chadha Followers Drop: भारतीय राजनीति में कब क्या हो जाए, कहना मुश्किल है।
लेकिन हाल ही में आम आदमी पार्टी में जो हुआ, उसने न केवल दिल्ली की राजनीति को हिला दिया है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तूफान खड़ा कर दिया।
आम आदमी पार्टी (AAP) के ‘पोस्टर बॉय’ कहे जाने वाले राघव चड्ढा ने जैसे ही पाला बदला और बीजेपी का दामन थामा, उनके चाहने वालों ने अपना गुस्सा ‘अनफॉलो’ बटन दबाकर जाहिर करना शुरू कर दिया है।
Welcomed Raghav Chadha Ji, Sandeep Pathak Ji, and Ashok Mittal Ji to the BJP family at the Party HQ today.
Also, best wishes to Harbhajan Singh Ji, Swati Maliwal Ji, Vikram Sahney Ji, and Rajinder Gupta Ji to work under the dynamic leadership of PM Shri @narendramodi Ji towards… pic.twitter.com/fLhcnHnO0K
— Nitin Nabin (@NitinNabin) April 24, 2026
48 घंटे और 14 लाख फॉलोअर्स गायब!
मौजूदा दौर में सोशल मीडिया के आंकड़े किसी भी नेता की लोकप्रियता का पैमाना होते हैं।
राघव चड्ढा की गिनती उन युवा नेताओं में होती थी, जिनकी सोशल मीडिया पर जबरदस्त पकड़ थी।
लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी इंस्टाग्राम फॉलोइंग ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
23 अप्रैल तक राघव के इंस्टाग्राम पर 14.6 मिलियन (करीब 1.46 करोड़) फॉलोअर्स थे।

लेकिन जैसे ही 24 अप्रैल को उनके इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने की खबर पक्की हुई, यह संख्या तेजी से गिरने लगी।
महज दो दिनों के भीतर करीब 14 लाख लोगों ने उन्हें अनफॉलो कर दिया है।
फिलहाल उनकी फॉलोइंग गिरकर 13.3 मिलियन पर आ गई है और यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में फॉलोअर्स का कम होना किसी भी राजनेता के लिए बड़ा ‘डिजिटल झटका’ है।

क्यों नाराज हैं लोग?
राघव चड्ढा को सोशल मीडिया पर पसंद किए जाने की सबसे बड़ी वजह उनका ‘विपक्ष’ का चेहरा होना था।
वे राज्यसभा में आम आदमी की आवाज उठाते थे, महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार को घेरते थे।
उनके इसी अंदाज की वजह से युवाओं में उनका जबरदस्त क्रेज था।
लेकिन अचानक विचारधारा बदलकर उसी पार्टी में शामिल होना, जिसके खिलाफ वे कल तक आग उगलते थे, उनके फैंस को रास नहीं आया।
सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि “हमें आपकी राजनीति नहीं, आपकी ईमानदारी पसंद थी।”
इसी नाराजगी के कारण अब लोग न सिर्फ उन्हें अनफॉलो कर रहे हैं, बल्कि उन पर जमकर मीम्स भी बना रहे हैं और उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है।
पंजाब का गद्दार‼️ pic.twitter.com/ccr5gXfpow
— AAP (@AamAadmiParty) April 24, 2026
Yehi reason hai ki narrative control karna mushkil ho raha hai. pic.twitter.com/PYypRFTOrB� #BJPFearsAAP
— Akshit Chaudhary (@Akshit991) April 25, 2026

राज्यसभा का गणित और आप (AAP) में बड़ी टूट
यह मामला सिर्फ राघव चड्ढा तक सीमित नहीं है। आम आदमी पार्टी को राज्यसभा में एक साथ कई बड़े झटके लगे हैं।
राज्यसभा में पार्टी के कुल 10 सांसद थे (7 पंजाब से और 3 दिल्ली से)।
इनमें से 7 सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ने का फैसला किया। राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी बीजेपी की सदस्यता ले ली है।
अन्य इस्तीफा देने वाले सांसदों में विक्रम साहनी, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और हरभजन सिंह के नाम शामिल हैं।
स्वाति मालीवाल ने भी सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की पुष्टि कर दी है।
इस बगावत के बाद राज्यसभा में अब ‘आप’ के पास सिर्फ 3 सांसद ही बचे हैं।

इस्तीफे के पीछे की असली वजह
खबरों की मानें तो राघव चड्ढा पिछले काफी समय से अपनी पार्टी से नाराज चल रहे थे।
इसकी मुख्य वजह उन्हें राज्यसभा में ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटाया जाना बताया जा रहा है।
उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई थी।
पद जाने के बाद राघव ने एक वीडियो संदेश के जरिए अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी।
वे लंबे समय से पार्टी की बैठकों और कार्यक्रमों से भी नदारद थे।
चर्चा तो यह भी थी कि वे राज्यसभा में जनता के मुद्दे तो उठाते थे, लेकिन अपने स्थानीय कार्यकर्ताओं और पार्टी कैडर से उनका संपर्क कट गया था।

केजरीवाल के लिए ‘डबल टेंशन’
राघव चड्ढा का बीजेपी में जाना अरविंद केजरीवाल के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है।
राघव अकेले नहीं गए हैं, वे अपने साथ 6 अन्य सांसदों का समर्थन भी लेकर गए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अब राघव का अगला टारगेट दिल्ली के 22 विधायक और पंजाब के ‘आप’ नेता हो सकते हैं।

केजरीवाल के सामने अब दो बड़ी चुनौतियां हैं:
- खाली सीटों को भरना: राज्यसभा की खाली हुई 7 सीटों पर फिर से मजबूत चेहरे लाना।
- विधायकों को एकजुट रखना: दिल्ली और पंजाब में अपने विधायकों को टूटने से बचाना।
राघव चड्ढा ने भले ही सत्ता के करीब जाने के लिए बीजेपी का रास्ता चुना हो, लेकिन सोशल मीडिया के आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि जनता को ‘दलबदल’ की राजनीति पसंद नहीं आ रही है।
अब देखना यह होगा कि क्या राघव बीजेपी में रहकर अपनी पुरानी लोकप्रियता वापस पा सकेंगे या फिर यह ‘डिजिटल गिरावट’ उनके राजनीतिक भविष्य के लिए कोई नया खतरा है।
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