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पनामा पेपर्स विवाद: राहुल गांधी ने जताया खेद, कार्तिकेय चौहान बोले- ‘अब कोई आपत्ति नहीं, केस खत्म करें’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rahul Gandhi-Kartikey Chauhan: राहुल गांधी और कार्तिकेय सिंह चौहान के बीच चल रहा 2018 का मानहानि केस अब खत्म होने की कगार पर है।

राहुल गांधी की ‘कन्फ्यूजन’ वाली दलील और खेद जताने के बाद कार्तिकेय ने याचिका निरस्त करने की सहमति दे दी है।

यह पूरा मामला साल 2018 का है, जब मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव का माहौल गरमाया हुआ था।

झाबुआ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष और वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बड़ा आरोप लगाया था।

Rahul Gandhi Supreme Court
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उन्होंने पनामा पेपर्स लीक मामले का जिक्र करते हुए कहा था कि इसमें मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम शामिल है।

राहुल गांधी ने जनसभा में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का उदाहरण देते हुए कहा था कि पनामा पेपर्स में नाम आने की वजह से नवाज शरीफ को जेल जाना पड़ा, लेकिन मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के बेटे पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस बयान के बाद राज्य की सियासत में भूचाल आ गया था।

कार्तिकेय सिंह चौहान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया और राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया।

कोर्ट की चौखट और समन का सिलसिला

अपने मान-सम्मान को ठेस पहुंचने की बात कहते हुए कार्तिकेय सिंह चौहान ने 30 अक्टूबर 2018 को भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का एक परिवाद (शिकायत) दर्ज कराया।

कार्तिकेय के वकील संकल्प कोचर ने कोर्ट में दलील दी कि राहुल गांधी के झूठे आरोपों से उनके मुवक्किल की सामाजिक प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है।

लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद, फरवरी 2025 में भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी को पहला समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया।

Rahul Gandhi Supreme Court
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इसके बाद भी जब राहुल गांधी कोर्ट में पेश नहीं हुए, तो अदालत की तरफ से लगातार समन जारी किए गए।

निचली अदालत की इस कार्यवाही और व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

‘कन्फ्यूजन’ की दलील और राहुल गांधी का खेद

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ के सामने इस मामले की सुनवाई हुई।

राहुल गांधी की ओर से कोर्ट में एक लिखित आवेदन और हलफनामा पेश किया गया, जिसने इस पूरे केस का रुख ही बदल दिया।

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राहुल गांधी ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उनका इरादा कार्तिकेय सिंह चौहान या शिवराज सिंह चौहान की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं था।

राहुल गांधी ने अदालत को बताया कि चुनावी रैली के दौरान भाषण देते समय उनसे ‘गलती’ और ‘कन्फ्यूजन’ (भ्रम) हो गया था।

दरअसल, वे छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का नाम लेना चाहते थे, लेकिन जुबान फिसलने के कारण उनके मुंह से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम निकल गया।

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राहुल गांधी ने कोर्ट को यह भी याद दिलाया कि इस गलती का अहसास होने पर उन्होंने बयान के ठीक अगले दिन ही सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने अपनी इस भूल को स्वीकार कर लिया था।

अब उन्होंने इस पर लिखित रूप से खेद भी व्यक्त किया है।

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कार्तिकेय बोले- ‘शिकायत वापस, केस बंद किया जाए’

राहुल गांधी के इस लिखित हलफनामे और खेद जताने के बाद हाईकोर्ट ने कार्तिकेय सिंह चौहान को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया।

25 जून 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कार्तिकेय सिंह चौहान के वकील संकल्प कोचर ने कोर्ट को बताया कि चूंकि राहुल गांधी ने अपनी गलती मान ली है और लिखित में यह स्वीकार किया है कि यह बयान भूलवश दिया गया था, इसलिए अब उनके मुवक्किल को इस मामले में कोई आपत्ति नहीं है।

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कार्तिकेय के वकील ने अदालत से अपील की कि राहुल गांधी की याचिका को स्वीकार करते हुए और इस मानहानि की पूरी कार्यवाही को समाप्त करते हुए मामले का निपटारा कर दिया जाए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और आपसी सहमति को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का अंतिम आदेश आज या आने वाले सोमवार तक आ सकता है, जिससे करीब 8 साल पुराने इस राजनीतिक और कानूनी विवाद पर हमेशा के लिए विराम लग जाएगा।

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