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“जब चीन सामने खड़ा था, तब कहां गई थी 56 इंच की छाती?”, संसद के बाहर बोले राहुल गांधी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rahul Gandhi Parliament: संसद में इन दिनों बजट पर चर्चा चल रही है, लेकिन असली घमासान ‘नेशनल सिक्योरिटी’ यानी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर छिड़ा हुआ है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि जब वह चीन और सीमा विवाद जैसे गंभीर विषयों पर अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें चुप करा दिया जाता है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की जड़ पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक किताब है।

राहुल गांधी का दावा है कि इस किताब में जनरल नरवणे ने डोकलाम और लद्दाख गतिरोध के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भूमिका पर कुछ ऐसी बातें लिखी हैं, जो सरकार की “असली सच्चाई” सामने ला सकती हैं।

राहुल के मुताबिक, सरकार इस किताब के प्रकाशन को रोक रही है क्योंकि इसमें सेना को राजनीतिक नेतृत्व द्वारा “निराश” किए जाने का जिक्र है।

राहुल गांधी के तीखे सवाल

संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मुझे सदन में सिर्फ 2-3 लाइनें बोलनी थीं। यह कोई मेरा निजी विचार नहीं है, बल्कि देश के पूर्व सेना प्रमुख के शब्द हैं। सवाल यह है कि आखिर सरकार एक फौजी की लिखी बातों से इतनी डरी हुई क्यों है?”

उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा कि जब चीन भारतीय सीमाओं पर चुनौती दे रहा था, तब प्रधानमंत्री का ’56 इंच का सीना’ कहां था?

सदन की कार्यवाही पर असर

राहुल गांधी के इन बयानों और कांग्रेस के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

पहले दोपहर 3 बजे तक, फिर 4 बजे तक और अंत में सदन को अगले दिन यानी मंगलवार दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

कांग्रेस का साफ कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सच्चाई को देश के सामने आना चाहिए और इस पर खुली बहस होनी चाहिए।

राहुल गांधी का यह रुख साफ करता है कि आने वाले दिनों में चीन और सेना के मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।

उनका कहना है कि अगर यह किताब बाजार में आ गई, तो लोगों को पता चल जाएगा कि संकट के समय देश के राजनीतिक नेतृत्व ने कैसे फैसले लिए थे।

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