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अब EMI रुकने पर फौरन लॉक नहीं होगा आपका स्मार्टफोन और लैपटॉप, RBI ने तय किए नए और कड़े नियम

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

RBI EMI Loan Recovery Rules: अगर आपने भी आसान किस्तों (EMI) पर कोई नया स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट खरीदा है, तो आपके लिए एक बेहद राहत भरी खबर है।

कई बार ऐसा होता है कि सैलरी देर से आने या किसी अन्य आर्थिक मजबूरी के कारण लोग समय पर अपनी किस्त नहीं भर पाते हैं।

ऐसी स्थिति में लोन देने वाली बैंक या फाइनेंस कंपनियां बिना किसी पूर्व सूचना के तुरंत रिमोट तकनीक का इस्तेमाल करके ग्राहक का फोन या लैपटॉप लॉक कर देती थीं।

इससे लोगों को काफी मानसिक और व्यावहारिक परेशानी का सामना करना पड़ता था।

RBI लाया नया नियम, ग्राहकों को मिलेगी बड़ी राहत

अब ग्राहकों की इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है।

आरबीआई ने साफ कर दिया है कि लोन वसूलना बैंकों का हक जरूर है, लेकिन इसके नाम पर ग्राहकों पर अनुचित दबाव बनाना और मनमाने तरीके से तकनीक का गलत इस्तेमाल करना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

केंद्रीय बैंक ने इसके लिए पूरी गाइडलाइन जारी कर दी है, जिसे 1 जनवरी 2027 से देशभर में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।

क्या है आरबीआई का नया नियम?

अब तक कंपनियां EMI बाउंस होते ही अगले दिन या कुछ ही दिनों के भीतर डिवाइस को पूरी तरह से ठप कर देती थीं।

लेकिन नए नियमों के तहत अब इस प्रक्रिया को दो चरणों (Phase-wise) में बांटा गया है:

* 30 दिनों की देरी पर आंशिक प्रतिबंध (Partial Ban): यदि आपकी किस्त रुक जाती है और लोन अकाउंट 30 दिनों तक ओवरड्यू (Overdue) रहता है, तो बैंक आपके डिवाइस पर सिर्फ आंशिक पाबंदी ही लगा सकते हैं। इस दौरान फोन को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता।

* 60 दिनों के बाद ही होगा फुल लॉक: अगर लोन का भुगतान 60 दिनों तक नहीं किया जाता है, तभी फाइनेंस कंपनी को डिवाइस को पूरी तरह से रिमोट लॉक करने का अधिकार मिलेगा।

इससे पहले पूरा डिवाइस बंद करना पूरी तरह से गैर-कानूनी माना जाएगा।

फोन लॉक होने के बावजूद चालू रहेंगी ये बेहद जरूरी सेवाएं

आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह बैंक ट्रांसफर, पढ़ाई, काम और आपातकालीन स्थिति में संपर्क का सबसे बड़ा जरिया है।

आरबीआई ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि किस्त में देरी होने की वजह से कोई ग्राहक समाज या अपनों से पूरी तरह कट न जाए।

नए नियमों के अनुसार, यदि 60 दिन बाद आपका फोन पूरी तरह लॉक भी कर दिया जाता है, तब भी उसमें निम्नलिखित बुनियादी सुविधाएं चालू रहेंगी:

* इनकमिंग कॉल्स: आपके नंबर पर आने वाले सभी कॉल्स आते रहेंगे।

 * जरूरी SMS: मैसेज प्राप्त करने की सुविधा बनी रहेगी।

 * SOS एवं इमरजेंसी कॉल्स: आपातकालीन नंबरों पर कॉल करने की सुविधा कभी बंद नहीं की जाएगी।

 * रोजगार से जुड़ी जरूरी ऐप्स: अगर कोई व्यक्ति अपने फोन या लैपटॉप से अपनी आजीविका चला रहा है या नौकरी से जुड़ा काम कर रहा है, तो उस फीचर को बंद करने की इजाजत कंपनियों को नहीं होगी।

अनलॉक करने में देरी हुई तो फाइनेंस कंपनी भरेगी जुर्माना

आरबीआई ने सिर्फ ग्राहकों पर ही बंदिशें नहीं लगाई हैं, बल्कि लेंडर्स (ऋणदाताओं) की जवाबदेही भी तय कर दी है।

अक्सर देखा जाता था कि ग्राहक द्वारा बकाया किस्त और पेनाल्टी का पूरा भुगतान करने के बाद भी कंपनियां कई-कई दिनों तक फोन को अनलॉक नहीं करती थीं।

अब नए नियम के तहत, जैसे ही ग्राहक अपने पूरे बकाया का भुगतान कर देगा, बैंक या फाइनेंस कंपनी को तुरंत डिवाइस से रिमोट बैन हटाना होगा।

यदि भुगतान मिलने के बाद भी कंपनी फोन को अनलॉक करने में देरी करती है, तो उसे ग्राहक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा (Compensation) देना होगा।

यह नियम कंपनियों को अपनी सर्विस तेज और पारदर्शी रखने पर मजबूर करेगा।

आपकी प्राइवेसी (निजता) का रखा जाएगा पूरा ध्यान

पहले कई मामलों में ऐसी शिकायतें आई थीं कि लोन रिकवरी ऐप्स और डिवाइस लॉकिंग सॉफ्टवेयर के जरिए फाइनेंस कंपनियां ग्राहकों के पर्सनल डेटा में सेंध लगाती थीं।

आरबीआई ने नई गाइडलाइन में ग्राहकों के निजता के अधिकार को पूरी तरह सुरक्षित किया है।

जब भी कोई कंपनी डिवाइस को लॉक करेगी, तो उसे ग्राहक के निजी डेटा तक पहुँच बनाने की सख्त मनाही होगी।

लेंडर्स ग्राहक की कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो, वीडियो, पर्सनल मैसेज, कॉल हिस्ट्री या लोकेशन जैसी निजी जानकारियों को न तो देख सकेंगे और न ही ट्रैक कर सकेंगे।

लॉकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ लोन रिकवरी की सीमा तक ही सीमित रहेगा।

किन डिवाइसेज पर लागू होगा यह नियम?

आरबीआई ने इस बात पर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है कि यह नियम किस तरह के लोन पर लागू होगा:

* यह नियम सिर्फ डिवाइस फाइनेंसिंग स्कीम्स (Device Financing Schemes) के तहत खरीदे गए स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप पर ही लागू होगा—जहाँ खरीदारी के वक्त ही डिवाइस को गिरवी या सिक्योरिटी के रूप में दर्ज किया जाता है।

* यदि आपने कोई पर्सनल लोन (Personal Loan) या सामान्य लोन लिया है और उस पैसे से दुकान से जाकर कोई फोन या लैपटॉप खरीदा है, तो बैंक या फाइनेंस कंपनी उस डिवाइस को रिमोट लॉक नहीं कर सकती।

पारदर्शिता पर जोर: लोन लेते वक्त ही देनी होगी पूरी जानकारी

अक्सर ग्राहकों को पता ही नहीं होता था कि किस्त न देने पर उनका फोन लॉक भी किया जा सकता है।

अब आरबीआई ने लेंडर्स के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि लोन मंजूर करते समय ही वे ग्राहक को लिखित और स्पष्ट भाषा में बताएं कि डिफॉल्ट होने की स्थिति में उनके डिवाइस पर क्या कार्रवाई की जा सकती है।

इसके अलावा, डिवाइस को बैन या लॉक करने से ठीक पहले ग्राहक को अलग से चेतावनी (Notice) भी भेजनी होगी।

कुलमिलाकर, आरबीआई का यह नया ढांचा लोन देने वाली संस्थाओं के अधिकारों और आम ग्राहकों के हितों के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाता है।

एक तरफ जहाँ फाइनेंस कंपनियों को अपनी बकाया राशि वसूलने का स्पष्ट रास्ता मिलता है, वहीं दूसरी तरफ ग्राहकों को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक होने वाली असुविधा और मनमानी से सुरक्षा मिलती है।

1 जनवरी 2027 से लागू होने वाला यह नियम भारत के डिजिटल लेंडिंग बाजार को अधिक जिम्मेदार, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएगा।

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