JPSC Scam Supreme Court PIL: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं (JPSC और JSSC) की पारदर्शिता को लेकर जारी आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र रूप लेता जा रहा है।
परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन का शनिवार को 15वां दिन दर्ज किया गया।
सरकार और आक्रोशित छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच शनिवार को करीब एक घंटे तक दूसरे दौर की उच्चस्तरीय वार्ता हुई, लेकिन बातचीत का यह दौर भी बेनतीजा ही समाप्त हो गया।


इससे पहले शुक्रवार देर रात भी राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों के नेताओं से मुलाकात की थी।
लगातार दो बैठकों के बावजूद दोनों पक्षों में किसी भी बिंदु पर कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया है।
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, दाखिल हुई PIL
झारखंड में छात्रों के आंदोलन का व्यापक असर अब पूरे देश में दिखाई देने लगा है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित धांधली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर यह विवाद अब देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के चौखट तक पहुंच चुका है।

एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने और पूरे मामले की न्यायिक या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की गुहार लगाई गई है।
सरकार ने जारी की ई-मेल आईडी और फीडबैक नंबर
गतिरोध को खत्म करने के प्रयास में राज्य सरकार ने आंदोलनरत युवाओं और आम जनता से सुझाव मांगने की पहल की है।
इसके लिए एक आधिकारिक ई-मेल आईडी (Jpsc.jssc.feedback@gmail.com) और फीडबैक नंबर जारी किया गया है।
राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मीडिया को बताया कि सरकार विभिन्न छात्र समूहों, विषय विशेषज्ञों और सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से लगातार मुलाकात करेगी।
उन्होंने दावा किया कि जनता और अभ्यर्थियों से मिलने वाले तमाम महत्वपूर्ण सुझावों का विस्तृत अध्ययन करने के बाद ही कोई अंतिम प्रशासनिक निर्णय लिया जाएगा।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान, 6 छात्र आमरण अनशन पर
सरकार के आश्वासनों से असंतुष्ट छात्रों का रुख अब और कड़ा हो गया है।
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने की मांग को लेकर 6 छात्र लगातार अनशन पर बैठे हुए हैं, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
छात्रों के प्रमुख संगठन ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच’ ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का ऐतिहासिक घेराव करने का औपचारिक ऐलान किया है।

शनिवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता भी विरोध दर्ज कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले थे, लेकिन पुलिस बल ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।
रांची पहुंचने की अपील, प्रशासन की नाकेबंदी की आशंका
आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे अब केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेंगे।
छात्रों की मांग है कि 09 अगस्त तक JPSC और JSSC से संबंधित उनकी सभी जायज मांगों पर सरकार आधिकारिक निर्णय ले।
यदि निर्धारित समय सीमा तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो 10 अगस्त को पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्यभर से हजारों छात्र रांची एकत्र होकर विधानसभा का घेराव करेंगे।

रिफॉर्म मंच की ओर से सोशल मीडिया पर एक विशेष अपील जारी की गई है, जिसमें अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से 8 और 9 अगस्त को ही रांची पहुंचने को कहा गया है।
छात्रों को आशंका है कि सरकार 10 तारीख को परिवहन रोक सकती है।
बताया जा रहा है कि हजारीबाग इलाके में प्रशासन ने आंदोलन में शामिल होने आ रही 10 से अधिक बसों को पहले ही रोक लिया है।

अधिकारियों और मंत्रियों के साथ हुई बैठकों का दौर
शुक्रवार को स्थिति का जायजा लेने एसडीएम खुद स्टेडियम पहुंचे थे और उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से बात की थी।
एसडीएम के निर्देश पर छात्रों ने एक 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया, जिसमें रवीन्द्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल थे।
सरकार की ओर से मंत्री चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडे सिंह और संजय यादव ने वार्ता में भाग लिया था।

हालांकि, वार्ता के बाद छात्र नेताओं ने साफ कर दिया कि आंदोलन तब तक वापस नहीं लिया जाएगा जब तक उनकी मांगें धरातल पर पूरी नहीं होतीं।
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