Sadhvi Harshanand Makeup controversy: मॉडलिंग की दुनिया छोड़कर अध्यात्म का रास्ता चुनने वाली हर्षा रिछारिया, जिन्हें अब साध्वी हर्षानंद गिरि के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर चर्चा में हैं।
हाल ही में कुछ संतों और आलोचकों ने उन पर साध्वी बनने के बावजूद मेकअप करने, बाल रंगने, लिपस्टिक लगाकर व्यासपीठ से प्रवचन देने और संन्यास के बाद भी अपने माता-पिता के घर रहने जैसे कई आरोप लगाए थे।
इन आरोपों पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन पहुँचीं साध्वी हर्षानंद ने बहुत ही बेबाकी से अपनी बात रखी।

संतों को कटघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों को उनके सुंदर दिखने से आपत्ति है, वे खुद पर्दे के पीछे क्या करते हैं, यह सब जानते हैं।
साध्वी ने कहा, “मैंने कई ऐसे संतों को देखा है जो खुद पार्लर की सुविधाओं को आश्रम में बुलवाते हैं और मैनिक्योर-पेडिक्योर कराते हैं। मैं यह सब नहीं कराती, लेकिन मेरा मानना है कि जब हम लक्ष्मी जी, श्री कृष्ण और भगवान नारायण की पूजा करते हैं जो खुद इतने दिव्य और सुंदर रूप में रहते हैं, तो उनकी भक्ति करने वाला सुंदर दिखने का अधिकार क्यों नहीं रखता?”

“100% सुरक्षा की गारंटी दें संत, मैं आज ही आश्रम में रहने को तैयार हूँ”
अपने माता-पिता के घर रहने पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए साध्वी हर्षानंद ने आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा का गंभीर मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि जो संत उन पर उंगली उठा रहे हैं, उनके पास तो अपने बड़े-बड़े आश्रम हैं और वे वहाँ आराम से रह सकते हैं। लेकिन आज के दौर में सुरक्षा एक बड़ा सवाल है।
साध्वी ने सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा:
“आज की तारीख में ऐसा कौन सा संत है जो पूरी तरह से पवित्र हो? मुझे कोई एक ऐसा संत बता दीजिए जो मुझे 100% सुरक्षा की गारंटी दे सके। वे यह ज़िम्मेदारी लें कि मुझे बेटी मानकर रखेंगे और जीवन भर मुझे कोई नुकसान नहीं होगा। अगर कोई संत ऐसी गारंटी देता है, तो मैं तुरंत अपना ठिकाना उनके आश्रम में बना लूँगी।”

उन्होंने साफ किया कि जब तक उनके पास खुद का कोई सुरक्षित स्थान या आश्रम नहीं होता, तब तक उनके पास दो ही रास्ते हैं—या तो वे अपने गुरुजी के आश्रम में रहें या अपने माता-पिता के घर।
साध्वी के मुताबिक, माता-पिता का घर उनके लिए सबसे सुरक्षित जगह है और इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
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उज्जैन में ली थी दीक्षा, फिर भी रास्ते में बिछाए गए रोड़े
गौरतलब है कि साध्वी हर्षानंद गिरि ने इसी साल 18 अप्रैल को उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंद जी से संन्यास की दीक्षा ली थी।
दीक्षा प्रक्रिया के दौरान उन्होंने अपना पिंड दान भी किया था और पूरी तरह से संन्यासी जीवन अपनाया था।
इसके बाद से वे अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रमों में व्यासपीठ पर बैठकर कथा और प्रवचन दे रही हैं।
हालांकि, संन्यास के बाद से ही उनका सफर आसान नहीं रहा।

साध्वी का आरोप है कि कुछ लोग उनकी बढ़ती लोकप्रियता से असहज हैं।
कुछ वक्त पहले ही में उज्जैन के लक्ष्मीपुरा क्षेत्र में आयोजित सात दिवसीय देवी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान उन्हें रोकने की कोशिश की गई।
“श्रद्धालुओं की भीड़ देखकर घटाया गया समय, लेकिन मुझे कोई रोक नहीं सकता”
साध्वी हर्षानंद ने देवी प्रवचन कार्यक्रम के समापन पर मंच से रोष व्यक्त करते हुए कहा कि कथा के शुरुआती तीन दिन तो सब ठीक रहा, लेकिन जैसे-जैसे पंडाल में श्रद्धालुओं और खासकर महिलाओं की संख्या बढ़ने लगी, कुछ स्थानीय संतों को यह रास नहीं आया।
चौथे दिन से उनके प्रवचन का समय कम करने के दबाव बनाए जाने लगे।

उन्होंने कहा, “मुझे रोकने के लिए काफी प्रयास किए गए, लेकिन जिस पर माँ भगवती की कृपा होती है, उसे कोई शक्ति रोक नहीं सकती। किसी भी नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति में इतना सामर्थ्य नहीं है कि वह धर्म के काम में बाधा डाल सके।”
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