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सोनम वांगचुक अनशन तोड़ने को तैयार, रखी शर्त: केंद्रीय मंत्रियों को चिट्ठी में लिखा- ‘बच्चों पर न हो कोई एक्शन’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Sonam Wangchuk hunger strike: देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों और प्रदर्शनकारियों का आंदोलन अब नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है।

एक तरफ जहां गिरते स्वास्थ्य के कारण गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ने के संकेत दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के 33वें दिन भी माहौल गरमाया हुआ है।

छात्रों पर हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए पूरे मामले के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

वांगचुक की मंत्रियों को चिट्ठी: ‘बच्चों पर न हो कोई कार्रवाई’

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बुधवार को सोनम वांगचुक ने अस्पताल के बिस्तर से ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा।

अपने पत्र में वांगचुक ने कहा कि अगर केंद्र सरकार प्रदर्शनकारी बच्चों और छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित या ठोस भरोसा देती है, तो वे अपना अनशन समाप्त करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि देश के भविष्य यानी युवाओं और छात्रों का हित उनके लिए सबसे ऊपर है, और उन पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए।

हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार: CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश

जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग और बर्बरता के मामले की गूंज अब दिल्ली हाईकोर्ट में सुनाई दे रही है।

कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को कड़ा निर्देश दिया कि घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को तुरंत प्रभाव से सुरक्षित रखा जाए।

सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में याचिकाकर्ताओं के वकीलों और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. राजू के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

वकीलों का आरोप था कि पुलिसकर्मियों ने बिना किसी नेम बैज के प्रदर्शनकारियों पर हमला किया, महिलाओं के साथ अभद्रता की गई और कील लगे डंडों का इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस बर्बरता के 110 से अधिक वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।

जब ASG ने यह तर्क दिया कि भीड़ बेकाबू हो गई थी और यह याचिकाएं केवल पब्लिसिटी पाने के लिए दायर की गई हैं, तो चीफ जस्टिस ने पुलिस की इस दलील को खारिज करते हुए तीखा सवाल पूछा— “आप बिना किसी ठोस आधार के यह कैसे कह सकते हैं कि यह याचिका केवल पब्लिसिटी पाने के लिए दायर की गई है?”

CJP ने ठुकराया न्योता: ‘हम किसी के दफ्तर नहीं जाएंगे’

इधर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन 33वें दिन भी जारी रहा।

सुबह से ही हजारों की संख्या में छात्र और समर्थक जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं।

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने खुलासा किया कि दिल्ली पुलिस के माध्यम से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें बातचीत के लिए अपने आवास पर आमंत्रित किया था।

हालांकि, CJP ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। सौरव दास का कहना है कि वे किसी मंत्री के घर या दफ्तर में जाकर बंद कमरों में बातचीत नहीं करेंगे।

यदि सरकार आंदोलनकारियों से बात करने के प्रति गंभीर है, तो उसे जंतर-मंतर आना होगा या फिर इसके आसपास किसी निष्पक्ष (तटस्थ) स्थान पर बैठक आयोजित करनी होगी।

पार्टी का स्पष्ट मानना है कि महज औपचारिकता पूरी करने के लिए वार्ता में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है।

सर्वधर्म समभाव का मंच

दूसरी ओर, जंतर-मंतर का नजारा बेहद भावुक और संदेश देने वाला है।

प्रदर्शन स्थल पर बने मंच पर सोनम वांगचुक की तस्वीर के साथ भारत का संविधान, महात्मा गांधी का चरखा, पवित्र रामायण, बाइबिल और भगवान बुद्ध की प्रतिमा रखी गई है।

आंदोलनकारी रात-दिन वहीं डटे हुए हैं और देश भर से आम जनता उनके खाने-पीने की सामग्री भेजकर अपना समर्थन जता रही है।

CJP नेता अभिजीत दीपके ने भी वांगचुक के स्वास्थ्य को देखते हुए उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है।

ABVP की मांग: परीक्षा सुधारों के लिए बने उच्च-स्तरीय समिति

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

ABVP ने जंतर-मंतर पर हुई हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित लोगों ने छात्रों के जायज आंदोलन को भटकाने की कोशिश की है।

ABVP ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए तत्काल प्रभाव से एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।

यह समिति एक निश्चित समय सीमा के भीतर संस्थागत सुधारों की सिफारिश करे, ताकि भविष्य में लाखों युवाओं का भरोसा देश की परीक्षा प्रणाली पर पूरी तरह कायम रह सके।

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