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सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: ‘नाबालिग छात्रों को तुरंत छोड़ें, ज्यादती करने वाले पुलिसकर्मियों पर हो कड़ी कार्रवाई’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Supreme Court on student protest: देश में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार प्रमुख अंतरिम आदेश जारी किए:

* नाबालिगों की रिहाई: 18 साल से कम उम्र के ऐसे सभी छात्र, जिनका पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

 * निष्पक्ष जांच: पुलिस द्वारा किए गए अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी ताकि जवाबदेही तय की जा सके।

 * डिजिटल सबूतों की सुरक्षा: प्रदर्शन से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

 * राहत और नोटिस: दिल्ली समेत 8 राज्यों (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, उत्तर प्रदेश, असम और पश्चिम बंगाल) को नोटिस जारी किया गया है।

इसके साथ ही, जिन प्रदर्शनकारियों का पहले कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है, उनके खिलाफ फिलहाल कोई सख्त कदम न उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

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पुलिस प्रोटोकॉल की समीक्षा और नई गाइडलाइन्स की जरूरत

कोर्ट ने माना कि पहली नज़र में पुलिस की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग के मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

अदालत ने कहा कि वर्ष 2018 में पुलिस कार्रवाई को लेकर जो दिशा-निर्देश तय किए गए थे, आज के दौर में उनकी प्रभावशीलता की समीक्षा होनी चाहिए।

कोर्ट के अनुसार, नियमों को अपडेट करने का समय आ गया है ताकि प्रदर्शन के दौरान पुलिस के तय मानक सही तरीके से लागू हो सकें।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि प्रदर्शन में 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

उन्होंने कहा कि छात्रों को प्रदर्शन का हक है, लेकिन कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई जरूरी है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र जांच से छात्रों और पुलिस—दोनों पक्षों की बात सामने आ सकेगी।

कोर्ट में उठाए गए गंभीर आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में कहा कि उनका मकसद पूरी पुलिस फोर्स पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि सिर्फ उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना है जिन्होंने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।

अदालत को यह भी बताया गया कि प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए ‘फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर’ का इस्तेमाल किया गया और इसे ‘आधार डेटा’ से जोड़ा गया।

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वक्ताओं ने इस तरह की प्रोफाइलिंग का विरोध किया। इसके अलावा, याचिकाओं में यह आरोप भी लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर रबर बुलेट, पेलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र और एक पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए।

CJP का दावा: FIR वापस होंगी, रात में जारी हुआ वीडियो

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों—सौरव दास और रत्ना—ने देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर दावा किया कि सरकार के प्रतिनिधियों (दिल्ली पुलिस के अधिकारियों) से उनकी वार्ता हुई है।

CJP का कहना है कि सरकार ने आश्वासन दिया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस ली जाएंगी और किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इससे पहले, CJP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चेतावनी दी थी कि यदि लिखित समझौते के तहत दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।

बिहार सरकार का बड़ा कदम और लीगल सेल की घोषणा

बिहार सरकार ने विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर, शिकायतों और कारण बताओ नोटिस को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।

हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की बात भी कही गई है।

दूसरी ओर, CJP ने कानूनी सहायता के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं:

* पीड़ित प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए जनता से सहयोग राशि जुटाने हेतु एक वेबसाइट शुरू की गई है।

 * देश भर में ‘लीगल एड सेल’ का गठन किया गया है, जिसके लिए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने ₹1 करोड़ की कानूनी सहायता देने की घोषणा की है

* एक ‘साक्षी पोर्टल’ भी लॉन्च किया गया है, जहां लोग पुलिस कार्रवाई से जुड़े फोटो और वीडियो अपलोड कर सकते हैं।

दिल्ली पुलिस का पक्ष

दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान 2,873 लोगों का सत्यापन किया गया, जिनमें से 989 लोगों का आपराधिक इतिहास रहा है।

पुलिस के मुताबिक, इनमें हत्या, लूट, डकैती, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के आरोपी शामिल हैं।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए हैं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की गई है।

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