Homeन्यूजचुनाव आयुक्त नियुक्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट फिर करेगा फैसले की समीक्षा, निष्पक्षता...

चुनाव आयुक्त नियुक्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट फिर करेगा फैसले की समीक्षा, निष्पक्षता पर उठे सवाल

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Supreme Court CEC Appointment Case: देश में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विवाद एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट पर पहुंच गया है।

केंद्र सरकार द्वारा चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बाहर किए जाने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर से सुनवाई करने की बात कही है।

यह पूरा मामला हाल ही में सुनाए गए एक विभाजित फैसले (Split Verdict) और उसमें शामिल एक जज की निष्पक्षता को लेकर उठी आपत्तियों से जुड़ा हुआ है।

Supreme Court, Indian Army, dismissed officer, Samuel Kamaleson, indiscipline, Gurudwara, temple, religious parade, secularism, Army Rules, Delhi High Court, Sarva Dharam Sthal, Article 25, Indian Army discipline

क्या है पूरे विवाद की जड़?

वर्ष 2023 से पहले तक देश में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए संसद द्वारा बनाया गया कोई अलग कानून मौजूद नहीं था।

केंद्र सरकार की कैबिनेट अपनी पसंद के अधिकारियों के नाम तय करती थी और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उनकी सीधी नियुक्ति कर दी जाती थी।

यानी इस प्रक्रिया में पूरी तरह सरकार का ही फैसला चलता था।

इसके बाद मामला अदालत पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि जब तक नया कानून नहीं बनता, तब तक चुनाव आयुक्तों का चुनाव तीन लोगों की एक समिति करेगी—जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होंगे।

हालांकि, 2023 के अंत में केंद्र सरकार ने संसद के जरिए एक नया कानून पारित किया।

इस नए नियम के तहत चयन समिति से CJI को हटा दिया गया और उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल कर लिया गया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे समिति में सरकार का 2-1 का बहुमत हो जाता है, जिससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर सीधा असर पड़ता है।

दो जजों की बेंच में नहीं बन सकी थी सहमति

इसी कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों—जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने फैसला सुनाया था।

लेकिन दोनों जजों की राय एक-दूसरे से पूरी तरह अलग रही:

* जस्टिस दीपांकर दत्ता का मानना था कि चयन समिति में कैबिनेट मंत्री को शामिल करना और CJI को हटाना सरकार को एकतरफा बढ़त देता है। इसलिए इस मामले की गहराई से जांच के लिए इसे 5 जजों की बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए।

 * वहीं, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा था कि मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने की कोई जरूरत नहीं है।

दोनों जजों में एकराय न बनने के कारण इस फैसले को अंतिम दिशा तय करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया था।

नया मोड़: जज की निष्पक्षता पर उठे सवाल

इस विभाजित फैसले के बाद मामले में एक नया और गंभीर मोड़ आया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में एक अर्जी दाखिल की गई, जिसमें फैसले में शामिल रहे जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा को लेकर पक्षपात की आशंका (Apprehension of Bias) जताई गई।

याचिका में कहा गया कि जस्टिस शर्मा के बेटे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में खुद ‘इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया’ (ECI) के स्टैंडिंग काउंसिल यानी आधिकारिक वकील हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि न्याय का सिद्धांत यह कहता है कि निष्पक्षता केवल होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखनी भी चाहिए।

चूंकि जज साहब के परिवार का सीधा संबंध उस संस्था से है जिसके नियम पर बहस हो रही थी, इसलिए इस फैसले पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस आधार पर 23 सितंबर के विभाजित फैसले को वापस लेने और रद्द करने की मांग की गई है।

Corona Vaccine, Supreme Court Corona Vaccine, Corona Vaccine Side Effects, Supreme Court, Vaccine Compensation, No-Fault Compensation Policy, Covishield Side Effects, Vaccine Death Compensation, Supreme Court Verdict, कोरोना वैक्सीन मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या होगा?

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस अर्जी को रखा।

इस विशेष पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत इस पूरे विषय की जांच करेगी और उसके बाद ही कोई निर्णय लेगी।

अब सर्वोच्च अदालत इस बात की पड़ताल करेगी कि क्या पिछले आदेश को वापस लिया जाए और नए सिरे से किसी अन्य बेंच के सामने इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

#SupremeCourt #ElectionCommission #CECAppointment #CJI #LegalNews #IndianJudiciary

- Advertisement -spot_img