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मंदिर में रील बनाई तो खैर नहीं! तमिलनाडु के 52 मंदिरों में स्मार्टफोन बैन, VIPs को भी छूट नहीं

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Tamil Nadu temple smartphone ban: तमिलनाडु के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिरों में दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद अहम खबर है।

राज्य सरकार के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग ने तमिलनाडु के 52 बड़े और प्रमुख मंदिरों में स्मार्टफोन ले जाने, फोटो खींचने और रील बनाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है।

यह नया नियम मंगलवार से राज्यभर में लागू हो चुका है।

अब कैसे दर्शन कर पाएंगे श्रद्धालु?

अगर आप इन मंदिरों में दर्शन के लिए जा रहे हैं, तो आपको मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही अपना स्मार्टफोन जमा कराना होगा।

इसके लिए मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष फोन डिपॉजिट काउंटर बनाए गए हैं।

* स्मार्टफोन जमा करने की फीस: हर स्मार्टफोन को सुरक्षित रखने के लिए श्रद्धालुओं को ₹5 प्रति फोन का शुल्क देना होगा।

 * कीपैड फोन को छूट: जिन मोबाइल फोन में कैमरा नहीं है (यानी साधारण कीपैड फोन), उन्हें मंदिर के अंदर ले जाने की अनुमति रहेगी।

VIP और मशहूर हस्तियों को भी नहीं मिलेगी छूट

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नियम सभी के लिए बराबर है।

किसी भी VIP, राजनेता, अभिनेता या मशहूर हस्ती को मंदिर परिसर के अंदर फोटो खिंचवाने या वीडियो बनवाने की इजाजत नहीं होगी।

देवी-देवताओं की प्रतिमाओं, धार्मिक अनुष्ठानों और मंदिर की वास्तुकला की किसी भी तरह की रिकॉर्डिंग पर पूर्ण रोक लगा दी गई है।

मद्रास हाईकोर्ट का आदेश और फैसले की वजह

यह कदम मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच द्वारा 2 दिसंबर 2022 को दिए गए एक ऐतिहासिक आदेश के बाद उठाया गया है।

दरअसल, तिरुचेंदूर के प्रसिद्ध अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह निर्देश दिए थे।

कोर्ट और HR&CE विभाग का मानना है कि पिछले कुछ समय से मंदिरों में श्रद्धालुओं, खासकर युवाओं द्वारा रील बनाने, रील्स के लिए डांस करने और लगातार सेल्फी लेने से मंदिर की पवित्रता और शांति प्रभावित हो रही थी।

मंदिरों का माहौल धार्मिक न रहकर मनोरंजन केंद्र जैसा बनता जा रहा था।

इसी शांति और पवित्रता को दोबारा बहाल करने के लिए यह कड़ा फैसला लिया गया है।

मंदिरों में कैसी है व्यवस्था?

कांचीपुरम के मशहूर देवराजस्वामी-अथि वरदार मंदिर में यह व्यवस्था सुबह 6 बजे से ही लागू कर दी गई है।

यहां श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए फोन काउंटर पर कंप्यूटर ऑपरेटर और कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

इसके अलावा, श्रद्धालुओं को जागरूक करने के लिए मंदिर परिसर के बाहर बड़े-बड़े सूचना बोर्ड लगाए गए हैं और लाउडस्पीकर के जरिए लगातार इस नियम की घोषणा की जा रही है।

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