Tirupati Laddu Controvery : दक्षिण भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तिरुपति मंदिर में मिलने वाले पवित्र लड्डू प्रसादम् को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है।
मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘सुकृति फूड्स’ के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार कर लिया है।
एजेंसी के मुताबिक, मंगला को हैदराबाद स्थित उसके कार्यालय से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद विशाखापट्टनम की विशेष PMLA कोर्ट में पेश करने पर अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

शुद्ध गाय के घी के नाम पर केमिकल्स का खेल
ED की तफ्तीश में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ के नाम पर जो घी सप्लाई किया जा रहा था, वह वास्तव में शुद्ध देसी घी था ही नहीं।
जांच में पता चला कि इस नकली घी को तैयार करने के लिए भारी मात्रा में रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलिन का इस्तेमाल किया जाता था।
यही नहीं, इसे असली जैसा दिखाने और इसमें सही टेक्सचर लाने के लिए MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवसेट सॉफ्ट 400 और एसीटिक एसिड एस्टर जैसे खतरनाक केमिकल्स मिलाए जाते थे।

₹230 करोड़ का फर्जीवाड़ा और कागजों की हेराफेरी
ED के दावों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को करीब ₹230 करोड़ मूल्य का घी सप्लाई किया गया था।
इस पूरे रैकेट में कैलाश चंद मंगला की सीधी भूमिका थी। उसने अकेले अपनी फैक्ट्री में लगभग ₹96 करोड़ का मिलावटी घी तैयार कराया था।
मिलावट के इस खेल को छिपाने के लिए आरोपी ने बोगस और फर्जी कागजात तैयार किए।
घी और पाम ऑयल की खरीद-बिक्री के झूठे बिल बनाए गए ताकि कागजों पर यह दिखाया जा सके कि शुद्ध गाय का घी ही तैयार किया जा रहा है।

मंगला ने वैष्णवी डेयरी स्पेशियलिटीज, मल्गंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स और ए.आर. डेयरी फूड्स जैसी फ्रंट कंपनियों के जरिए इस नकली घी की सप्लाई को अंजाम दिया।
इससे पहले ED ‘भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क’ के डायरेक्टर विपिन जैन को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
राजनीतिक बहस और आरोपों का दौर
तिरुपति लड्डू में मिलावट का मामला तब गरमाया था जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP ने पिछली YSRCP सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे।
TDP का दावा था कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान प्रसादम् के घी में जानवरों की चर्बी और फिश ऑयल की मिलावट की गई।
इसके समर्थन में एक प्राइवेट लैब की टेस्ट रिपोर्ट भी सार्वजनिक की गई थी। हालांकि, YSRCP ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था।

300 सालों से भी पुराना है लड्डू प्रसाद का इतिहास
तिरुपति का लड्डू केवल एक मिष्ठान नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है।
तिरुमाला मंदिर में प्रतिदिन 3.5 लाख से भी अधिक भक्तों को यह लड्डू प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
यह परंपरा वर्ष 1715 से, यानी करीब 300 से अधिक वर्षों से अनवरत चली आ रही है।
यह प्रसाद मंदिर की विशेष रसोई में तैयार होता है जिसे ‘पोट्टु’ कहा जाता है। सदियों से पारंपरिक कारीगरों के परिवार ही इस कला को संभाल रहे हैं।

क्या है ‘दित्तम’ प्रक्रिया?
लड्डू बनाने की सख्त और पारंपरिक रेसिपी प्रणाली को ‘दित्तम’ (Dittam) कहा जाता है। इसमें किस सामग्री की कितनी मात्रा होगी, इसके मानक बेहद सख्त तय किए गए हैं।
सदियों के इतिहास में इस रेसिपी में मात्र छह बार ही थोड़े-बहुत बदलाव किए गए हैं।
शुरुआत में लड्डू बेसन और गुड़ की चाशनी से बनाए जाते थे ताकि वे लंबे समय तक खराब न हों, लेकिन बाद में स्वाद और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसमें शुद्ध गाय का घी, काजू, बादाम और किशमिश मिलाना शुरू किया गया।
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