TMC Sushmita Dev Resign: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
उनकी बेहद करीबी मानी जाने वाली नेता सुष्मिता देव ने बुधवार को राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन छोड़ दिया है।
इस इस्तीफे के तुरंत बाद सुष्मिता देव की एक तस्वीर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के साथ सामने आई है, जिसके बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकती हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि पिछले तीन दिनों के भीतर टीएमसी को लगा यह दूसरा बड़ा झटका है।
इससे पहले 8 जून को पार्टी के एक और वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने भी पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था।
सुखेंदु शेखर ने तो जाते-जाते ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को ‘अराजक’ तक कह दिया और आरोप लगाया कि इसी वजह से पार्टी का यह हश्र हो रहा है।

सांसद-विधायक सब हुए अलग, ममता के पास क्या बचा?
28 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पार्टी के अंदर इतनी बड़ी बगावत पहले कभी नहीं देखी गई।
आंकड़ों पर नजर डालें तो टीएमसी के पास लोकसभा में कुल 28 सांसद थे, जिनमें से 20 सांसदों ने बगावत कर दी है।
अब ममता बनर्जी के पाले में सिर्फ 8 लोकसभा सांसद बचे हैं।
वहीं राज्यसभा में 13 में से 2 सांसदों के इस्तीफे के बाद अब केवल 11 सांसद ही बचे हैं।

अगर हम पश्चिम बंगाल विधानसभा की बात करें, तो वहां तो पूरी की पूरी कहानी ही बदल चुकी है।
3 जून को टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने बगावत करते हुए अपना एक अलग गुट बना लिया।
इस बागी गुट ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुन लिया है।
विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस ने इस गुट को मंजूरी भी दे दी है और ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित कर दिया है।
यानी जिस पार्टी की सरकार थी, अब उसके पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं और वह पूरी तरह अल्पमत में आ चुकी है।

“अब मैं आजाद हूं…” – इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देव के बेबाक बोल
पार्टी छोड़ने के बाद सुष्मिता देव ने खुलकर मीडिया से बात की।
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने टीएमसी क्यों छोड़ी, तो उन्होंने बेहद सादगी से जवाब दिया, “मैं सिर्फ अपने बारे में कह सकती हूं। जब मैंने पार्टी छोड़ दी, तो नैतिकता के नाते मुझे राज्यसभा की सीट भी छोड़ देनी चाहिए थी, क्योंकि वह सीट मुझे पार्टी की बदौलत मिली थी। इसके पीछे मेरे कुछ व्यक्तिगत और राजनीतिक कारण हैं।”

जब मीडिया ने उनसे पूछा कि क्या टीएमसी में और भी इस्तीफे होने वाले हैं, तो उन्होंने कहा कि वह असम से हैं और बंगाल की राजनीति में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें बाकी लोगों के बारे में जानकारी नहीं है।
असम के सीएम हिमंता बिस्व सरमा से मुलाकात पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “देखिए, अब मैं आजाद हूं। हिमंता जी के साथ मेरे रिश्ते कांग्रेस के समय से ही बहुत अच्छे हैं, इसलिए यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात थी।”
हालांकि, बीजेपी में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वो फिलहाल कुछ दिन रिलैक्स करना चाहती हैं और अपने परिवार से मिलने असम जा रही हैं।

संकट से उबरने की कोशिश में जुटे ममता और अभिषेक
इस महासंकट के बीच पार्टी को बचाने के लिए ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी लगातार दौड़-भाग कर रहे हैं। दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज है।
8 जून को विपक्ष के ‘INDIA’ गठबंधन की बैठक में शामिल होने के बाद, ममता बनर्जी ने खुद सोनिया गांधी के आवास ’10 जनपथ’ जाकर उनसे करीब एक घंटे तक मुलाकात की।
वहीं दूसरी तरफ, अभिषेक बनर्जी ने भी राहुल गांधी से मिलकर दोनों पार्टियों के बीच आपसी तालमेल और मजबूती बनाए रखने पर गंभीर चर्चा की है।

अब देखना यह है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों का यह साथ ममता बनर्जी की डूबती नैया को पार लगा पाता है या नहीं।
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