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उज्जैन में मटन शॉप पर बवाल: हिंदूवादी संगठनों ने कहा- ‘दुकानें हटीं तो मेयर का दूध से अभिषेक करेंगे’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ujjain Mutton Shop Controversy: धार्मिक नगरी उज्जैन में एक बार फिर मांस-मटन की दुकानों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है।

शहर में शराबबंदी के बाद अब मटन और मछली की दुकानों को नगर निगम की सीमा से बाहर का रास्ता दिखाने की मांग तेज हो गई है।

हाल ही में मेयर (महापौर) मुकेश टटवाल ने इन दुकानों को हटाने के लिए बड़ा दावा किया था, लेकिन जब मेयर इन काउंसिल (MIC) की बैठक हुई, तो यह प्रस्ताव गायब मिला।

इस बात से नाराज हिंदूवादी संगठनों ने अब जनप्रतिनिधियों की नीयत पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

हिंदू जागरण मंच ने चुनौती भरे लहजे में कहा है कि अगर महापौर वाकई शहर से मटन की दुकानें हटवाने में कामयाब रहे, तो उनका दूध से नहलाकर शानदार स्वागत किया जाएगा।

‘दावे बहुत हुए, काम कुछ नहीं’ – वादों से नाराज संगठनों ने याद दिलाया पुराना इतिहास

उज्जैन को भगवान महाकाल की नगरी कहा जाता है।

जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पद संभाला, तो उन्होंने सबसे पहले उज्जैन की नगर निगम सीमा से शराब की दुकानों को बाहर करवाया था।

इसके बाद से ही पूरे शहर में मांस, मटन और मछली की दुकानों को भी शहर से बाहर शिफ्ट करने की मांग उठ रही है।

हाल ही में महापौर मुकेश टटवाल ने भरोसा दिलाया था कि वे एमआईसी (MIC) की बैठक में इस मुद्दे पर कड़ा प्रस्ताव लाएंगे।

लोगों को लगा था कि प्रस्ताव पास होते ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी, लेकिन बैठक में ऐसा कुछ नहीं हुआ।

हिंदू जागरण मंच के नेताओं, अर्जुन भदौरिया और रितेश माहेश्वरी, ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने याद दिलाया कि दो साल पहले भी पार्षद गब्बर भाटी और रजत मेहता ने नगर निगम परिषद में बैनर लहराकर महाकाल मंदिर मार्ग से मटन दुकानें हटाने का दावा किया था, लेकिन जमीन पर आज तक एक भी दुकान नहीं हटी।

संगठनों का कहना है कि इस बार भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है, ठोस कार्रवाई नहीं।

फाइलें घूमती रहीं, पर बैठक के एजेंडे से गायब रहा मटन दुकान का प्रस्ताव

जब बैठक में यह प्रस्ताव नहीं आया, तो शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।

इस पर सफाई देते हुए महापौर मुकेश टटवाल ने बताया कि उनकी तरफ से पूरी तैयारी थी।

उन्होंने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करवाकर नगर निगम आयुक्त (कमिश्नर) अभिलाष मिश्रा के पास भेज दिया था।

लेकिन प्रशासनिक फेरबदल या तकनीकी कारणों की वजह से इसे एमआईसी की बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल नहीं किया जा सका।

यही वजह रही कि इस संवेदनशील और बड़े मुद्दे पर बैठक में कोई चर्चा या फैसला नहीं हो पाया।

अब हिंदूवादी संगठन इसे प्रशासनिक ढीलापन और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी मान रहे हैं।

महाकाल के रास्तों पर सजती हैं मांस की दुकानें, शहर में हैं 150 से ज्यादा ठिकाने

उज्जैन में सबसे ज्यादा आपत्ति इस बात पर है कि भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के प्रमुख रास्तों पर ही धड़ल्ले से मांस और मटन बेचा जा रहा है।

आंकड़ों की मानें तो पूरे उज्जैन शहर में इस समय 150 से ज्यादा छोटी-बड़ी मांस, मटन और मछली की दुकानें चल रही हैं।

इन प्रमुख रास्तों पर बनी है विवाद की स्थिति:

  • हरिफाटक से बेगमबाग मार्ग
  • मालीपुरा से तोपखाना और बसफोड़ गली
  • सब्जी मंडी से छत्री चौक का इलाका
  • पटनी बाजार से महाकाल मंदिर जाने वाला मुख्य मार्ग
  • तेलीवाड़ा से छोटा पुल होते हुए खारकुआं क्षेत्र

इन इलाकों से रोज हजारों की संख्या में देश-विदेश से आए श्रद्धालु गुजरते हैं।

हिंदू संगठनों का कहना है कि पवित्र नगरी की मर्यादा बनाए रखने के लिए इन दुकानों को तुरंत शहर की सीमा से बाहर एक निश्चित ‘नॉन-वेज जोन’ में शिफ्ट कर देना चाहिए।

अब देखना यह है कि प्रशासन और महापौर अगली बैठक में इस वादे को पूरा कर पाते हैं या यह मुद्दा यूं ही सियासत की भेंट चढ़ा रहेगा।

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