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Waqf Amendment Bill 2025: जानें क्या है वक्फ, भारत में कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्यों हो रहा है विरोध

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Waqf Amendment Bill 2025: बुधवार 2 अप्रैल दोपहर 12 बजे लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया गया।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू प्रश्नकाल के बाद दोपहर इसे सदन में चर्चा के लिए पेश किया।

स्पीकर ओम बिरला ने बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया है।

इसमें से NDA को 4 घंटे 40 मिनट दिए गए हैं, बाकी वक्त विपक्ष को मिला है।

चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बिल को समर्थन देने की घोषणा की है।

विपक्ष कर रहा विरोध (opposition to Waqf bill)

दूसरी तरफ विपक्ष बिल के विरोध में है।

तमिलनाडु की AIADMK, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल और के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति जैसी न्यूट्रल पार्टियां भी विपक्ष के साथ हैं।

विपक्ष ने चर्चा का समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग भी की है।

अदालत जाएगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 

मुसलमानों की प्रतिनिधि संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने कहा कि वह वक्फ (संशोधन) विधेयक को अदालत में चुनौती देगा।

आइए जानते हैं कि आखिर क्या है वक्फ बोर्ड, वक्फ का मतलब, कैसे किया जाता है वक्फ और वे 14 संशोधन, जो सरकार चाहती है….

क्या है वक्फ? (What is Waqf) 

‘वक्फ’ अरबी भाषा के ‘वकुफा’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है- ठहरना, रोकना या निषिद्ध करना।

कानूनी शब्दों में ‘इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी प्रॉपर्टी दान करता है तो इसे प्रॉपर्टी वक्फ कर देना कहते हैं।’

फिर वो चाहे कुछ रुपए की रकम हो या बेशकीमती हीरे-जवाहरात से भरी हुई एक पूरी इमारत।

अमूमन ऐसी प्रॉपर्टीज को ‘अल्लाह की संपत्ति’ कहा जाता है।

अपनी प्रॉपर्टी वक्फ को देने वाला इंसान ‘वकिफा’ कहलाता है।

वकिफा ये शर्त रख सकता है कि उसकी संपत्ति से होने वाली आमदनी सिर्फ पढ़ाई पर या अस्पतालों पर ही खर्च हो।

इन संपत्तियों को बेचा या धर्म के अलावा किसी और मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

कौन और कैसे कर सकता है वक्फ (Waqf amendment bill Explainer)

वक्फ करने के कई तरीके हो सकते हैं। जैसे, अगर किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक मकान हैं और वह इनमें से एक को वक्फ करना चाहता है, तो वह अपनी वसीयत में उस मकान को वक्फ के लिए दान करने का उल्लेख कर सकता है।

इस स्थिति में, संबंधित व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका परिवार उस संपत्ति का उपयोग नहीं कर सकेगा।

वक्फ की संपत्ति को संभालने वाली संस्था उसे सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग करेगी।

इसी तरह, शेयर, घर, किताब, कैश या अन्य किसी संपत्ति को भी वक्फ किया जा सकता है।

कोई भी मुस्लिम व्यक्ति, जो 18 साल से ऊपर है, अपनी संपत्ति को वक्फ कर सकता है।

वक्फ की गई संपत्ति पर उसका परिवार या कोई अन्य व्यक्ति दावा नहीं कर सकता है।

भारत में वक्फ की शुरुआत? (Beginning of Waqf in India)

भारत में वक्फ की परंपरा का इतिहास 12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय से जुड़ा है।

सुल्तान मुइज़ुद्दीन सैम ग़ौर ने मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांव समर्पित किए थे और इसका प्रशासन शेखुल इस्लाम को सौंपा था।

जैसे-जैसे दिल्ली सल्तनत और बाद में अन्य इस्लामी राजवंशों का शासन बढ़ा, वक्फ संपत्तियों की संख्या भी बढ़ती गई।

19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान वक्फ को खत्म करने का मामला उठाया गया था।

एक विवाद लंदन की प्रिवी काउंसिल में पहुंचा था, जिसमें ब्रिटिश जजों ने वक्फ को अमान्य घोषित कर दिया था।

हालांकि, भारत में इस फैसले को स्वीकार नहीं किया गया और 1913 के मुसलमान वक्फ वैधीकरण अधिनियम ने वक्फ संस्था को बचाए रखा।

क्या है वक्फ बोर्ड, कितनी प्रॉपटी है इसके पास? (What is Waqf bord)

वक्फ की संपत्ति का संचालन करने के लिए वक्फ बोर्ड होते हैं, जो स्थानीय और राज्य स्तर पर बनाए जाते हैं।

उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में अलग-अलग शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड भी हैं।

ये राज्य स्तर पर वक्फ की संपत्तियों की देखरेख करते हैं, जिसमें संपत्तियों का रखरखाव और उनसे होने वाली आय का प्रबंधन शामिल है।

केंद्रीय स्तर पर, सेंट्रल वक्फ काउंसिल राज्यों के वक्फ बोर्ड को दिशानिर्देश देने का काम करती है।

इसके अलावा, देश भर में स्थित कब्रिस्तान भी वक्फ की संपत्तियों का हिस्सा होते हैं, और इनका रखरखाव भी वक्फ ही करता है।

भारत में कुल 30 वक्फ बोर्ड हैं, जिनमें से अधिकांश के मुख्यालय राज्यों की राजधानियों में स्थित हैं।

इन बोर्डों को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।

भारत में रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्ड के पास है, जो करीब 9.4 लाख एकड़ है।

यह जमीन इतनी है कि इसमें दिल्ली जैसे तीन शहर समा सकते हैं।

वक्फ संशोधन बिल पर अब तक क्या हुआ? (Waqf amendment bill update) 

केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड में संशोधन से संबंधित विधेयक को संसद में पेश करने की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना है।

  • वक्फ संशोधन बिल को 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए थे।
  • बाद में इस बिल का ड्राफ्ट संसद की जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) को भेजा गया।
  • 27 जनवरी 2025 को इस ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई।
  • 19 फरवरी 2025 को कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी।
  • अब यह बिल 2 अप्रैल 2025 को संसद में पेश होगा, जिस पर 8 घंटे की बहस के बाद वोटिंग होगी।

वे 14 संशोधन, जो सरकार चाहती है

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 में वक्फ अधिनियम, 1995 में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव किया गया है।

हाल ही में, संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने इस विधेयक में 14 संशोधनों को मंजूरी दी है।

1. वक्फ बोर्ड की शक्तियों में कटौती:

वक्फ बोर्ड की अनियंत्रित शक्तियों को सीमित करने के लिए कुछ प्रावधान हटाए जाएंगे, ताकि वे बिना उचित जांच के संपत्तियों को वक्फ घोषित न कर सकें।

2. बोर्ड में गैर-मुस्लिम मेंबर:

अब राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में दो गैर-मुस्लिम सदस्य होना अनिवार्य होगा। पहले ये सदस्य पदेन (ex-officio) होते थे, लेकिन अब उन्हें पदेन सदस्यों से अलग कर दिया गया है।

3. महिला प्रतिनिधित्व:

वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 9 और 14 में संशोधन कर वक्फ बोर्ड की संरचना में महिला प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा, जिससे लिंग समानता सुनिश्चित हो सकेगी।

4. अवैध कब्जों की रोकथाम

अवैध रूप से कब्जा की गई वक्फ संपत्तियों को वापस लेने के लिए कानूनी प्रणाली में सुधार किए जाएंगे।

5. वक्फ बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति

राज्य सरकार को वक्फ बोर्ड के सभी सदस्यों की नियुक्ति की अनुमति दी जाएगी, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।

6. सत्यापन प्रक्रियाओं का सुधार

वक्फ संपत्तियों के दावों के लिए अनिवार्य सत्यापन प्रक्रियाएं लागू की जाएंगी, ताकि पारदर्शिता बढ़ सके और अवैध कब्जों पर रोक लगाई जा सके।

7. जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका

वक्फ संपत्तियों की निगरानी में जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका को बढ़ाया जाएगा, जिससे प्रशासनिक निगरानी में सुधार होगा।

8. वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण

वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए उनका डिजिटलीकरण किया जाएगा।

9. ऑडिट प्रणाली में सुधार

वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वक्फ संपत्तियों की ऑडिट प्रणाली में सुधार किया जाएगा।

10. वक्फ न्यायाधिकरण की शक्तियों में वृद्धि

वक्फ न्यायाधिकरण की शक्तियां बढ़ाई जाएंगी, ताकि वक्फ से संबंधित विवादों का जल्दी निपटारा हो सके।

11. अनधिकृत हस्तांतरण पर सख्ती

वक्फ संपत्तियों के अनधिकृत हस्तांतरण के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा।

12. मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति

वक्फ बोर्ड के लिए एक वरिष्ठ स्तर के अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा।

13. वक्फ संपत्तियों का कंप्यूटरीकरण

वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा, जिससे डेटा प्रबंधन में सुधार होगा।

14. वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव

वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव किया जाएगा, ताकि विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके और इसे अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

विधेयक पर सरकार का क्या कहना है?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अगस्त में विधेयक पेश करते हुए कहा था कि यह संशोधन सच्चर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर किया गया है, जिसमें यह कहा गया था कि राज्य और केंद्रीय वक्फ बोर्ड में दो महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

रिजिजू का यह भी कहना था कि इस विधेयक में किए गए प्रावधान संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं करते हैं।

इसके बजाय, यह विधेयक उन लोगों को अधिकार देने के लिए लाया गया है जिन्हें आज तक उनका हक नहीं मिला।

उन्होंने यह भी कहा कि 1995 में किए गए वक्फ संशोधन विधेयक के बाद, 2013 में किए गए संशोधनों ने इसे निष्क्रिय कर दिया था, जिसके कारण यह नया विधेयक लाया गया है।

रिजिजू ने विपक्ष से आग्रह किया कि वे इस बिल का समर्थन करें, क्योंकि इससे करोड़ों मुसलमानों को न्याय मिलेगा, जिन्हें वक्फ बोर्ड पर कुछ चंद लोगों ने कब्जा किया हुआ है।

मुस्लिम समाज क्यों कर रहा है विरोध (Why Muslim community protesting)

मुस्लिम समाज का एक बड़ा हिस्सा इन संशोधनों के खिलाफ है, आइए जानते हैं आखिर मुस्लिम समाज क्यों वक्फ कानून का विरोध कर रहा है…

  1. सरकार का बढ़ता नियंत्रण

मुस्लिम समाज को लगता है कि नए बदलावों से वक्फ संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा और कलेक्टर अपनी मर्जी से संपत्तियों के बारे में निर्णय ले सकेंगे।

2. कानूनी विवादों का डर

नए बिल के तहत वक्फ संपत्तियों को अगर छह महीने के भीतर कानूनी रूप से रजिस्टर्ड नहीं किया गया, तो वक्फ बोर्ड इसे अदालत में चुनौती नहीं दे सकता।

इससे पुराने वक्फ संपत्तियों के मामलों में विवाद बढ़ने की संभावना है।

3. वक्फ प्रॉपर्टी पर कब्जे का बढ़ावा

नए संशोधन से वक्फ संपत्तियों पर 12 साल से ज्यादा समय से कब्जा करने वालों को कानूनी संरक्षण मिल सकता है।

4. गैर-मुसलमानों का वक्फ बोर्ड में शामिल होना

नए बिल में गैर-मुसलमानों को भी वक्फ बोर्ड में शामिल किए जाने का प्रावधान है, जिसे मुस्लिम समाज के कुछ हिस्सों ने विवादित माना है।

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