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इंदौर में बोरिंग के पानी में हैजा वाला बैक्टीरिया, भोपाल के ग्राउंड वॉटर में मिला घातक ई-कोलाई कीटाणु

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Indore bhopal Water Crisis: मध्य प्रदेश के दो सबसे बड़े शहर, इंदौर और भोपाल, इस समय गंभीर जहरीले पानी के संकट से जूझ रहे हैं।

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि भोपाल में भी भूजल के नमूनों में खतरनाक ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया पाया गया है।

यह स्थिति प्रशासन की सतर्कता और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की जर्जर स्थिति पर बड़े सवाल खड़े करती है।

इंदौर: 60 पानी के सैंपलों में से 35 सैंपल फेल

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में स्थिति बेहद चिंताजनक है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिए गए 60 पानी के सैंपलों में से 35 सैंपल फेल पाए गए हैं।

जांच में सामने आया है कि बोरिंग के पानी में ‘फीकल कोलीफॉर्म’ और हैजा पैदा करने वाले बैक्टीरिया मौजूद हैं।

हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र के भाजपा पार्षद कमल वाघेला के घर का निजी बोरिंग भी दूषित पाया गया है।

अस्पतालों में हाहाकार

अब तक इस दूषित पानी की चपेट में आने से 437 लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं।

हालांकि, इनमें से 381 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, लेकिन 56 मरीज अभी भी उपचाराधीन हैं, जिनमें से 9 की हालत गंभीर होने के कारण वे आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ड्रेनेज लाइन और पानी की लाइन के आपस में मिल जाने के कारण यह संक्रमण फैला है।

प्रशासन ने अब लोगों को बोरिंग का पानी इस्तेमाल न करने और केवल नर्मदा का उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी है।

भोपाल: ग्राउंड वॉटर में मिला ‘ई-कोलाई’

इंदौर की घटना के बाद भोपाल प्रशासन भी अलर्ट पर है।

भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर से लिए गए पानी के 4 सैंपल फेल हो गए हैं।

इन सैंपलों में वही ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया मिला है, जो इंदौर में मौतों का कारण बना था।

हालांकि, नगर निगम के अधिकारियों का तर्क है कि यह बैक्टीरिया नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी में नहीं, बल्कि जमीन के अंदर के पानी (ग्राउंड वॉटर) में मिला है।

खानूगांव की स्थिति विशेष रूप से खराब है, जहां लगभग 2000 लोग सीधे कुएं के पानी पर निर्भर हैं।

स्थानीय पार्षद प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि कुएं में सीवेज का पानी मिल रहा है, जिसकी शिकायत 15 दिन पहले की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

क्या है ‘ई-कोलाई’ और यह कितना खतरनाक है?

ई-कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया का एक बड़ा समूह है।

जबकि इसके कुछ प्रकार सामान्य होते हैं, लेकिन ‘फीकल कोलीफॉर्म’ जैसे प्रकार पेट में गंभीर संक्रमण पैदा करते हैं।

इससे हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और डायरिया जैसी बीमारियां होती हैं।

गंभीर मामलों में यह किडनी को पूरी तरह फेल कर सकता है, जिससे मरीज की मृत्यु हो सकती है।

जर्जर बुनियादी ढांचा और लीकेज की समस्या

भोपाल में जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि शहर के लगभग 22 वार्ड ‘डेंजर जोन’ में हैं।

यहां करीब 400 किलोमीटर लंबी पानी की पाइपलाइन सीवेज लाइनों के बिल्कुल समानांतर बिछी हुई है।

ये पाइपलाइनें लोहे की हैं और अपनी निर्धारित उम्र (Life Span) पूरी कर चुकी हैं, जिससे इनमें जंग लग गया है और लीकेज की समस्या आम है।

जब पानी की सप्लाई बंद होती है, तो इन छेदों के जरिए सीवेज का गंदा पानी पाइपलाइन में घुस जाता है।

नगर निगम के अनुसार, शहर के 75 हजार कनेक्शनों की लाइन बदलने की तत्काल आवश्यकता है, जिसके लिए लगभग 500 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत होगी।

फिलहाल अमृत-2 योजना के तहत नई लाइनें बिछाने का काम चल रहा है, लेकिन मौजूदा संकट ने प्रशासन की सुस्त रफ्तार को उजागर कर दिया है।

आदमपुर छावनी: कचरे के पहाड़ का असर

भोपाल के आदमपुर क्षेत्र में स्थित कचरा खंती (Dump Yard) ने आसपास के 5 गांवों के भूजल को जहरीला बना दिया है।

कचरे से निकलने वाला गंदा तरल पदार्थ (Leachate) जमीन के अंदर रिसकर पानी को प्रदूषित कर रहा है।

पर्यावरणविदों ने इसके खिलाफ एनजीटी (NGT) में याचिका भी लगाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार बहुत कम हुआ है।

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सावधानी ही बचाव है

वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:

  1. पानी को हमेशा उबालकर और छानकर पिएं।
  2. यदि पानी के रंग या गंध में बदलाव लगे, तो तुरंत इसकी सूचना नगर निगम को दें।
  3. खुले कुओं या असुरक्षित बोरिंग के पानी का उपयोग पीने के लिए न करें।
  4. टैंकर से आने वाले पानी में क्लोरीन की जांच जरूर करें।
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