PM Modi Vande Mataram: लोकसभा में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक भाषण दिया।
उन्होंने इस राष्ट्रीय गीत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति के चलते इसके साथ विश्वासघात किया और इसे तोड़ा।
पीएम ने जवाहरलाल नेहरू और मुस्लिम लीग की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
अंग्रेजों के खिलाफ करारा जवाब था ‘वंदे मातरम्’
लोकसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह गीत अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक करारा जवाब था और आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने बताया कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में रचित यह गीत स्वाभाविक रूप से स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर बन गया और हर भारतीय का संकल्प बन गया।
पीएम मोदी ने इसकी पंक्तियों का उच्चारण करते हुए कहा, “यह महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक अवतार है। यह सिर्फ राजनीतिक आजादी का मंत्र नहीं, बल्कि मां भारती को हर प्रकार की बेड़ियों से मुक्त कराने का पवित्र संकल्प था।”
#WATCH | PM Narendra Modi says, “… When Vande Mataram completed 50 years, India was under British rule. When Vande Mataram completed 100 years, India was in the clutches of Emergency… At that time, the patriots were imprisoned. When the song that inspired our freedom… pic.twitter.com/Kww4ewc6wM
— ANI (@ANI) December 8, 2025
जब नेहरू ने जिन्ना के दबाव में शुरू कराई ‘पड़ताल’
पीएम मोदी ने अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा वंदे मातरम् के साथ हुए ऐतिहासिक ‘विश्वासघात’ पर केंद्रित किया।
उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर 1936 को मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ से वंदे मातरम् के खिलाफ नारा बुलंद किया।
इसके जवाब में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम लीग की आलोचना करने के बजाय खुद वंदे मातरम् की ‘पड़ताल’ शुरू कर दी।
पीएम के अनुसार, नेहरू ने इसके पांच दिन बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें जिन्ना की भावनाओं से सहमति जताते हुए कहा गया कि वंदे मातरम् की ‘आनंदमठ’ वाली पृष्ठभूमि से मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है और वे भड़क सकते हैं।
इसके बाद 26 अक्टूबर 1936 को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई, जिसमें इस गीत के उपयोग की समीक्षा की गई।

कांग्रेस ने तुष्टीकरण में तोड़े वंदे मातरम् के टुकड़े
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि देश भर में वंदे मातरम् के समर्थन में प्रभात फेरियां निकलने के बावजूद, कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में आकर इस राष्ट्रीय गीत के ‘टुकड़े कर दिए’।
उन्होंने कहा, “यह कांग्रेस का तुष्टीकरण की राजनीति को साधने का तरीका था। इसी तरह के दबाव में आकर कांग्रेस को एक दिन भारत के बंटवारे के लिए भी झुकना पड़ा।”
उन्होंने कहा कि यह इतिहास का सबूत है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए।
पीएम ने यह भी कहा कि कांग्रेस की नीतियां आज भी वैसी ही हैं और उसने खुद को आउटसोर्स कर दिया है।
In 1905, Mahatma Gandhi saw ‘Vande Matram’ as national anthem.
But still it not just failed to become national anthem but even got censored.
All because Congress was just the rebranded version of Muslim League and Nehru loved politics and power more than anything else.
More… pic.twitter.com/Afybhc2yED
— Saffron Chargers (@SaffronChargers) December 8, 2025
बंगाल विभाजन के विरोध में गूंजा था वंदे मातरम्
प्रधानमंत्री ने 1905 के बंगाल विभाजन के समय वंदे मातरम् की भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि अंग्रेज जानते थे कि बंगाल को तोड़कर ही वे भारत को कमजोर कर सकते हैं।
लेकिन विभाजन के विरोध में यह गीत गली-गली का नाद बन गया और एक बड़े स्वदेशी आंदोलन को ऊर्जा दी।
अंग्रेजों ने इसकी ताकत को महसूस करते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया।
पीएम ने बारीसाल (अब बांग्लादेश में) के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वहां की महिलाओं ने वंदे मातरम् गाने के अधिकार के लिए संघर्ष किया और शांति घोष जैसी वीरांगनाओं ने चूड़ियां तक तोड़ दीं।
फांसी के फंदे तक गूंजता रहा यह मंत्र
पीएम मोदी ने उन असंख्य क्रांतिकारियों को याद किया, जिन्होंने वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया।
खुदीराम बोस, राजेंद्र नाथ लहरी, रामकृष्ण विश्वाश, मास्टर सुरेश सिंह जैसे युवाओं ने इसी मंत्र के साथ अपने प्राणों की आहुति दी।
मास्टर सुरेश सिंह ने तो फांसी से पहले लिखे अपने अंतिम पत्र में सिर्फ दो शब्द लिखे थे – ‘वंदे मातरम्’।
एकता का प्रतीक, पक्ष-विपक्ष से ऊपर
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि वंदे मातरम् पर यह चर्चा किसी पक्ष या विपक्ष के बारे में नहीं है।
यह राष्ट्रभक्ति के उस उच्च भाव का स्मरण है, जिसने देश को आजादी दिलाई।
उन्होंने आग्रह किया कि इस ऐतिहासिक अवसर का सदुपयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा के रूप में करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की 50वीं वर्षगांठ पर देश गुलाम था, 100वीं पर देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा था, लेकिन आज उसकी 150वीं वर्षगांठ पर देश नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
इस चर्चा का उद्देश्य देशवासियों में राष्ट्रीय भावना, सांस्कृतिक गौरव और एकता का संदेश देना है।
साथ ही, यह ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाना है कि कैसे तुष्टीकरण की राजनीति ने राष्ट्रीय एकता के प्रतीकों को नुकसान पहुंचाने का काम किया।


