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आराम करती रही आंगनबाड़ी सहायिका, मासूम बच्ची धोती रही बर्तन- खाना मांगने पर मिली सजा!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Child forced to wash dishes: मध्य प्रदेश में सरकारी तंत्र और महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही का यह आलम है कि जिस आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को बेहतर बचपन और पोषण देने का वादा किया जाता है, वहां एक मासूम बच्ची के हाथों में किताबों या खिलौनों की जगह जूठे बर्तन थमा दिए गए।

क्या है पूरा मामला?

मामला सतना जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम ‘ललचहा’ का है।

यहाँ के आंगनबाड़ी केंद्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक छोटी सी बच्ची, जिसकी उम्र खेलने-खाने की है, वह जमीन पर झुककर आंगनबाड़ी के भारी-भरकम बर्तन धो रही है।

शर्मनाक बात यह है कि वहीं पास में केंद्र की सहायिका बड़े आराम से बैठी हुई हैं और बच्ची को काम करते देख रही हैं।

खाना मांगने पर मिली ‘सजा’

बताया जा रहा है कि बच्ची ने भूख लगने पर सहायिका से पोषण आहार (खाना) मांगा था।

खाने देने के बजाय, मासूम को कथित तौर पर यह कह दिया गया कि पहले ये बर्तन साफ करो।

यह सीधे तौर पर बाल अधिकारों का उल्लंघन और अमानवीय व्यवहार है।

अधिकारियों की जिम्मेदारी और कार्रवाई

ललचहा आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता के रूप में राधा रजक और सहायिका के तौर पर अंजना लोधी की तैनाती है।

वीडियो वायरल होने के बाद विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए नागौद परियोजना अधिकारी इंद्रभूषण तिवारी ने जांच के आदेश दिए हैं।

वहीं, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी राजीव सिंह ने स्पष्ट किया है कि आंगनबाड़ी में बर्तन साफ करने और साफ-सफाई की पूरी जिम्मेदारी वहां की सहायिका की होती है।

बच्चों से ऐसा काम करवाना न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि एक गंभीर अपराध है।

उन्होंने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में किसी और बच्चे के साथ ऐसा व्यवहार न हो।

सिस्टम पर उठते सवाल

यह घटना सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों की हकीकत पर सवाल उठाती है जहाँ निगरानी की कमी है।

अगर सरकारी केंद्रों में ही बच्चों का शोषण होगा, तो समाज में क्या संदेश जाएगा?

फिलहाल, पूरा जिला प्रशासन इस वायरल वीडियो की जांच में जुटा है, और ग्रामीणों में इस संवेदनहीनता को लेकर भारी आक्रोश है।

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