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MP में बिजली का बड़ा झटका: 1 अप्रैल से 10% तक बढ़ सकते हैं दाम, जेब पर पड़ेगा 3600 रुपये का बोझ!

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Electricity Bill Hike: एमपी के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है।

प्रदेश की तीनों प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों (पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र) ने राज्य विद्युत नियामक आयोग (MPERC) को बिजली की दरों में 10.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव सौंपा है।

अगर इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो 1 अप्रैल 2026 से नए टैरिफ लागू हो जाएंगे।

आइए जानते हैं कितना बढ़ेगा बिजली बिल और कंपनियां ऐसा क्यों कर रही हैं…

बिल में कितनी होगी बढ़ोतरी? 

बिजली कंपनियों ने जो प्रस्ताव राज्य विद्युत नियामक आयोग (MPERC) को सौंपा है, उसके मुताबिक आम घरेलू उपभोक्ता के बिल में औसत 300 रुपये प्रति माह का इजाफा हो सकता है।

इसका सीधा मतलब है कि साल भर में आपको 3,600 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। इसे उदाहरण से समझते हैं:

  • अभी का बिल: अगर आपका परिवार महीने में 400 यूनिट बिजली खर्च करता है, तो फिलहाल आपको करीब 3,250 रुपये देने होते हैं।
  • प्रस्तावित बिल: नई दरें लागू होने के बाद यही बिल बढ़कर 3,550 रुपये से ऊपर निकल जाएगा।

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प्रस्तावित नई दरें: पहले क्या था और अब क्या होगा?

कंपनियों ने न केवल रेट बढ़ाने की बात कही है, बल्कि स्लैब (Slab) में भी बदलाव का सुझाव दिया है।

सबसे बड़ा झटका उन लोगों को लगेगा जो 151 से 300 यूनिट के बीच बिजली जलाते हैं, क्योंकि इस स्लैब को खत्म कर ऊंचे रेट वाले स्लैब में जोड़ने की तैयारी है।

खपत (यूनिट में) वर्तमान दर (प्रति यूनिट) प्रस्तावित दर (प्रति यूनिट)
0 से 50 यूनिट 4.45 रुपये 4.78 रुपये
51 से 150 यूनिट 5.41 रुपये 5.82 रुपये
151 से 300 यूनिट 6.79 रुपये 7.30 रुपये
300 यूनिट से ऊपर 8.98 रुपये 7.30 रुपये (स्लैब विलय के बाद)

नोट: कंपनियों का कहना है कि 151-300 यूनिट वाले स्लैब को 300 से ऊपर वाले स्लैब में मर्ज कर दिया जाए, जिससे इस श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए दरें और महंगी हो जाएंगी।

कंपनियां क्यों बढ़ाना चाहती हैं दाम? 

बिजली वितरण कंपनियों (पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र) का कहना है कि वे भारी वित्तीय संकट से गुजर रही हैं। उनके प्रस्ताव के पीछे मुख्य कारण ये हैं:

  • भारी घाटा: प्रदेश की तीनों बिजली कंपनियां कुल मिलाकर 42,375 करोड़ रुपये के घाटे में डूबी हुई हैं। इस साल के परिचालन खर्चों और पुराने नुकसान को पाटने के लिए उन्हें 6,044 करोड़ रुपये की सख्त जरूरत है।

  • स्मार्ट मीटर का खर्च: प्रदेश में जो स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, उन पर करीब 820 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। अब कंपनियां चाहती हैं कि यह पैसा उपभोक्ताओं से वसूला जाए।

  • महंगी बिजली खरीद: बिजली खरीदने की लागत में भी करीब 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।

  • पुराने प्रस्तावों की नामंजूरी: कंपनियों का दावा है कि पिछले सालों में उनके कई टैरिफ प्रस्ताव ठुकरा दिए गए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई।

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क्या वाकई रेट बढ़ाना जायज है?

विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों ने कंपनियों के इन तर्कों पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, जनता पर बोझ डालना गलत है क्योंकि:

  1. कोयले पर सेस हटा: केंद्र सरकार ने कोयले पर लगने वाला 400 रुपये प्रति टन का ‘जीएसटी सेस’ हटा दिया है। जानकारों का कहना है कि इससे बिजली बनाने की लागत 17 से 18 पैसे प्रति यूनिट कम हुई है। इसका फायदा जनता को मिलने के बजाय कंपनियां दाम बढ़ाना चाहती हैं।
  2. स्मार्ट मीटर का वादा: जब स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत हुई थी, तब सरकार और कंपनियों ने दावा किया था कि इसका बोझ जनता पर नहीं आएगा। कहा गया था कि इससे बिजली चोरी रुकेगी और जो बचत होगी, उसी से मीटर का खर्च निकलेगा। अब 820 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं से मांगना ‘वादाखिलाफी’ जैसा लग रहा है।
  3. पड़ोसी राज्यों से तुलना: मध्य प्रदेश में बिजली पहले से ही पड़ोसी राज्यों के मुकाबले महंगी है।

  • छत्तीसगढ़ में 400 यूनिट का बिल करीब 2,200 रुपये आता है।

  • गुजरात में यह 2,100 रुपये के आसपास है।

  • जबकि मध्य प्रदेश में अभी भी यह 3,250 रुपये है। रेट बढ़े तो यह खाई और चौड़ी हो जाएगी।

सरकार का विरोधाभासी बयान

इस पूरे मामले में सरकार का रुख थोड़ा उलझा हुआ नजर आ रहा है।

एक तरफ ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने हाल ही में दावा किया था कि उनका प्रयास है कि जनता पर कोई बोझ न पड़े और 2028 तक कंपनियां घाटे से बाहर आ जाएंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के 1.35 करोड़ उपभोक्ताओं में से लगभग 1 करोड़ लोग ‘अटल गृह ज्योति योजना’ के तहत मात्र 100 रुपये में बिजली पा रहे हैं।

लेकिन हकीकत यह है कि बिजली कंपनियां अब सीधे तौर पर भारी टैरिफ हाइक की मांग कर रही हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह केवल एक ‘प्रस्ताव’ है। अंतिम फैसला राज्य विद्युत नियामक आयोग (MPERC) को लेना है।

आयोग अभी जनसुनवाई कर रहा है, जहां आम लोग, विशेषज्ञ और संगठन अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।

अगर आयोग इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे देता है, तो 1 अप्रैल 2026 से आपके मोबाइल पर आने वाले बिजली बिल के मैसेज आपको थोड़ा परेशान कर सकते हैं।

तब तक के लिए, बिजली की बचत ही एकमात्र रास्ता नजर आ रहा है!

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