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मध्य प्रदेश पर कर्ज का ‘पहाड़’: फिर 5800 करोड़ रुपये उधार लेगी सरकार, क्या होगा जनता पर असर?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Govt Debt: मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है।

खबर है कि मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार मंगलवार, 10 मार्च 2026 को एक बार फिर बाजार से 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के खत्म होने से ठीक पहले लिया जा रहा यह कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ‘ई-कुबेर’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से लिया जाएगा।

कर्ज का गणित: किस्तों में उधारी

वित्त विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, यह 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज तीन अलग-अलग किस्तों (बॉन्ड्स) में लिया जा रहा है ताकि चुकाने में आसानी हो:

  • पहली किस्त: 1,900 करोड़ रुपये (10 साल के लिए)

  • दूसरी किस्त: 1,700 करोड़ रुपये (14 साल के लिए)

  • तीसरी किस्त: 2,200 करोड़ रुपये (21 साल के लिए)

इन सभी कर्जों का ब्याज हर छह महीने में चुकाया जाएगा और तय समय सीमा के बाद मूलधन की वापसी होगी।

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एक साल में 84,900 करोड़ का बोझ

हैरानी की बात यह है कि चालू वित्त वर्ष (2025-26) में प्रदेश सरकार अब तक कुल मिलाकर लगभग 84,900 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है।

अभी कुछ दिन पहले होली के ठीक पहले भी सरकार ने 6,300 करोड़ रुपये जुटाए थे।

अगर आज के कर्ज को भी जोड़ लिया जाए, तो मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज की देनदारी 5.66 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।

पिछले साल मार्च 2025 तक यह आंकड़ा करीब 4.21 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें एक साल के भीतर ही भारी बढ़त देखी गई है।

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आखिर सरकार इतना कर्ज क्यों ले रही है?

आम आदमी के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रदेश को इतने कर्ज की जरूरत क्यों है?

इसके पीछे सरकार और विशेषज्ञों के अपने तर्क हैं:

  1. पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): सरकार का कहना है कि यह पैसा सड़कों, पुलों, सिंचाई परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के निर्माण में खर्च किया जा रहा है, जिससे भविष्य में प्रदेश की कमाई बढ़ेगी।
  2. केंद्र का प्रोत्साहन: केंद्र सरकार राज्यों को 50 साल के लिए ‘ब्याज-मुक्त’ कर्ज दे रही है। राज्य सरकारें इस मौके का फायदा उठाकर निवेश बढ़ाना चाहती हैं।
  3. पुराने कर्ज का भुगतान: सरकार को पुराने लिए गए कर्जों का ब्याज और मूलधन भी चुकाना होता है, जिसके लिए अक्सर नई उधारी लेनी पड़ती है।
  4. जनकल्याणकारी योजनाएं: लाडली बहना जैसी बड़ी योजनाओं और कृषि-उद्योगों में सब्सिडी देने के लिए भी भारी फंड की आवश्यकता होती है।
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कांग्रेस का पलटवार

कर्ज के इस बढ़ते आंकड़े पर राजनीति भी तेज हो गई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार ने मध्य प्रदेश के हर नागरिक को कर्जदार बना दिया है।

वहीं, सरकार का पक्ष है कि वे ‘राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम’ (FRBM Act) के दायरे में रहकर ही कर्ज ले रहे हैं और यह विकास के लिए जरूरी है।

सिर्फ एमपी ही नहीं, दौड़ में अन्य राज्य भी

मंगलवार को होने वाली आरबीआई की नीलामी में सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि कर्नाटक (10,000 करोड़) और तमिलनाडु (8,000 करोड़) जैसे राज्य भी बड़ी उधारी ले रहे हैं।

कुल मिलाकर कई राज्य मिलकर 45,960 करोड़ रुपये का कर्ज बाजार से उठाएंगे।

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