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संत रामपाल को देशद्रोह केस में हाईकोर्ट से मिली जमानत, जानें क्या हुआ था 11 साल पहले?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Sant Rampal Bail: हरियाणा के चर्चित सतलोक आश्रम के प्रमुख संत रामपाल के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उन्हें देशद्रोह (Sedition) के एक पुराने मामले में जमानत दे दी है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब रामपाल पिछले करीब 11 सालों से सलाखों के पीछे हैं।

 

इस खबर के बाहर आते ही उनके समर्थकों और अनुयायियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है, लेकिन क्या वो वाकई तुरंत जेल से बाहर आ पाएंगे? यह सवाल अब भी बना हुआ है।

क्या है ताजा फैसला?

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया को देखते हुए रामपाल की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है।

वर्तमान में रामपाल हरियाणा की हिसार जेल में बंद हैं।

अदालत का यह आदेश उनके वकीलों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि देशद्रोह जैसे गंभीर मामले में जमानत मिलना एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ है।

गिरफ्तारी की कहानी (2014)

साल 2014 में हरियाणा के बरवाला स्थित ‘सतलोक आश्रम’ में जो हुआ, उसने पूरे देश का ध्यान खींचा था।

प्रशासन जब रामपाल को कोर्ट के आदेश पर गिरफ्तार करने पहुंचा, तो उनके हजारों समर्थकों ने पुलिस का रास्ता रोक लिया था।

कई दिनों तक आश्रम के बाहर तनाव बना रहा।

पुलिस और समर्थकों के बीच हुई इस भीषण हिंसक झड़प में 6 लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।

स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि सुरक्षा बलों को भारी बल प्रयोग करना पड़ा था।

इसी घटना के बाद रामपाल पर देशद्रोह, हत्या और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे कई गंभीर मुकदमे दर्ज किए गए थे।

कौन हैं संत रामपाल?

बहुत कम लोग जानते हैं कि आध्यात्मिक गुरु बनने से पहले रामपाल हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में एक जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर तैनात थे।

1951 में जन्मे रामपाल ने बाद में नौकरी छोड़ दी और कबीर पंथ की शिक्षाओं का प्रचार करना शुरू किया।

उन्होंने बरवाला में सतलोक आश्रम की स्थापना की और दावा किया कि उनकी शिक्षाएं भगवद गीता और कबीर सागर पर आधारित हैं।

देखते ही देखते उत्तर भारत के कई राज्यों में उनके लाखों अनुयायी बन गए।

जेल से बाहर आने में क्या हैं पेंच?

भले ही हाई कोर्ट ने देशद्रोह वाले मामले में जमानत दे दी हो, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि रामपाल आज ही जेल से बाहर आ जाएंगे।

उनके खिलाफ अलग-अलग अदालतों में हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत कई मुकदमे अब भी लंबित हैं।

कुछ मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा भी सुनाई जा चुकी है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि जब तक उन्हें उन सभी मामलों में जमानत या राहत नहीं मिल जाती जिनमें उनकी न्यायिक हिरासत अनिवार्य है, तब तक उनकी रिहाई मुमकिन नहीं है।

जेल प्रशासन और कानूनी टीम अब इन बारीकियों पर काम कर रही है।

संत रामपाल को मिली यह जमानत उनके समर्थकों के लिए एक उम्मीद की किरण है।

 

फिलहाल हिसार जेल के बाहर और सोशल मीडिया पर उनके अनुयायी इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं।

हालांकि, अंतिम रिहाई के लिए उन्हें अभी कई और कानूनी बाधाओं को पार करना होगा।

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