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श्रद्धा पर भारी अव्यवस्था: अमरनाथ यात्रा के मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए इंदौर में रातभर फुटपाथ पर सो रहे श्रद्धालु

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Amarnath Yatra 2026 Medical Certificate: कहते हैं कि बाबा अमरनाथ का बुलावा आता है तो सारे रास्ते खुल जाते हैं, लेकिन इंदौर में फिलहाल इन रास्तों पर ‘सिस्टम’ का रोड़ा अटका हुआ है।

श्री अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होने वाली है, लेकिन इससे पहले बनने वाले अनिवार्य मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट ने श्रद्धालुओं के पसीने छुड़ा दिए हैं।

इंदौर शहर और आसपास के इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।

रातभर फुटपाथ पर डेरा

इंदौर के जिला अस्पताल और अन्य निर्धारित स्वास्थ्य केंद्रों का हाल यह है कि वहां अस्पताल कम और रैन बसेरा ज्यादा नजर आ रहा है।

श्रद्धालु अपनी बारी आने के इंतजार में रात 11 बजे से ही अस्पताल परिसर में पहुंच रहे हैं।

ठंड या खुले आसमान की परवाह किए बिना लोग रात 3 बजे से फुटपाथ और गलियारों में सो रहे हैं ताकि सुबह खिड़की खुलने पर वे सबसे आगे रह सकें।

महिलाओं और बुजुर्गों की फजीहत

इस बार यात्रा को लेकर महिलाओं में जबरदस्त उत्साह है, लेकिन अस्पताल में उनके लिए कोई अलग या सुगम व्यवस्था नहीं है।

हालत यह है कि घंटों लाइन में खड़े-खड़े महिलाएं थक जा रही हैं और उन्हें कतार में लगे हुए ही नाश्ता और भोजन करना पड़ रहा है।

भीड़ इतनी ज्यादा है कि सुबह खिड़की खुलने से पहले ही धक्का-मुक्की और बहसबाजी शुरू हो जाती है।

प्रशासन की बड़ी लापरवाही

हैरानी की बात यह है कि जहां हजारों की संख्या में लोग सर्टिफिकेट बनवाने पहुंच रहे हैं, वहां प्रशासन ने केवल दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है।

दो डॉक्टरों के भरोसे इतनी बड़ी भीड़ का मेडिकल चेकअप करना लगभग नामुमकिन है।

जांच की प्रक्रिया कछुआ गति से चल रही है, जिससे एक सर्टिफिकेट बनवाने में लोगों के दो-दो दिन खराब हो रहे हैं।

अटक रहा है पंजीयन

नियम के मुताबिक, बिना मेडिकल सर्टिफिकेट के यात्रा का ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन (पंजीयन) नहीं हो सकता।

ऐसे में श्रद्धालु परेशान हैं कि अगर सर्टिफिकेट मिलने में इसी तरह देरी होती रही, तो वे अपनी मनचाही तारीख पर यात्रा का स्लॉट बुक नहीं कर पाएंगे।

श्रद्धालुओं का कहना है कि सरकार एक तरफ यात्रा को सुगम बनाने के बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन धरातल पर इंदौर जैसे बड़े शहर में भी इंतजाम जीरो हैं।

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