Dhirendra Shastri Apology on Shivaji: मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अक्सर अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं।
हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की, जिसने विवाद का रूप ले लिया।
शास्त्री ने एक कहानी सुनाते हुए कहा था कि एक समय शिवाजी महाराज युद्धों की थकान और जिम्मेदारियों के बोझ से परेशान हो गए थे।

उन्होंने अपना राज-पाठ त्यागने का मन बना लिया था और अपना मुकुट लेकर अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के चरणों में रख दिया था।
शास्त्री के अनुसार, तब गुरु रामदास ने उन्हें वह मुकुट वापस पहनाया और सिखाया कि थकने के बावजूद अपनी प्रजा की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
महाराष्ट्र में विरोध की लहर
जैसे ही यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, महाराष्ट्र में इसके खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
मराठा संगठनों, इतिहासकारों और विपक्षी नेताओं ने इसे इतिहास के साथ छेड़छाड़ करार दिया।

पूर्व राज्यसभा सांसद संभाजीराजे छत्रपति ने शास्त्री के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने पड़ोसी राज्य (बुंदेलखंड) और शिवाजी महाराज के बीच के ऐतिहासिक संबंधों को नहीं जानता, उसे इतिहास पर बोलने का कोई हक नहीं है।
शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत और एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने भी कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज एक संप्रभु शासक थे और यह कहना कि उन्होंने अपना राज्य किसी को सौंप दिया था, एक “ऐतिहासिक पाप” है।
कांग्रेस नेताओं ने तो यहाँ तक मांग कर दी कि धीरेंद्र शास्त्री के महाराष्ट्र में प्रवेश पर पाबंदी लगा देनी चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री की सफाई और माफी
विवाद बढ़ता देख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नागपुर में ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने हाथ जोड़कर क्षमा मांगते हुए कहा, “अगर मेरे शब्दों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुँची है, तो मैं क्षमा प्रार्थी हूँ। मेरा इरादा किसी का अपमान करना नहीं था।”
शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर दिखाया गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल एक गुरु और शिष्य के बीच की अटूट श्रद्धा और भक्ति का उदाहरण दे रहे थे।
उन्होंने शिवाजी महाराज की तुलना महाभारत के अर्जुन से की और कहा कि जैसे कृष्ण ने अर्जुन को कर्तव्य का पाठ पढ़ाया, वैसे ही गुरु रामदास ने शिवाजी को प्रेरित किया था।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वे खुद शिवाजी महाराज के ‘स्वराज्य’ के आदर्शों पर चलते हैं और उनके लिए महाराज का स्थान सर्वोपरि है।

चार बच्चों वाले बयान पर भी दी सफाई
इसी कार्यक्रम में धीरेंद्र शास्त्री ने एक और विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने की सलाह दी थी।
उन्होंने कहा था कि एक बच्चा संघ (RSS) को समर्पित करना चाहिए।
इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनका मतलब बच्चों को राष्ट्रवादी और ‘सनातनी’ विचारधारा वाला बनाने से था।
उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि वे भविष्य में विवाह करेंगे और खुद भी इस दिशा में योगदान देंगे।
फिलहाल धीरेंद्र शास्त्री के माफी मांगने के बाद मामला थोड़ा शांत होता दिख रहा है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में इस मुद्दे ने एक नई बहस छेड़ दी है।

उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतिहास की किताबों में ऐसे किसी प्रसंग का जिक्र नहीं है और सभी को सार्वजनिक मंचों से बोलने से पहले ऐतिहासिक तथ्यों की जाँच कर लेनी चाहिए।
