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MP आयुष्मान कार्ड स्कैम: एक ही ID पर दर्ज हुए 54 नाम, खान-मिश्रा-जैन सब एक ही परिवार के सदस्य बना डाले

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ayushman Card Fraud MP: भारत सरकार की ‘आयुष्मान भारत’ योजना, जिसका उद्देश्य देश के करोड़ों गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देना है, आज मध्य प्रदेश में जालसाजों और भ्रष्ट नेटवर्क का शिकार हो गई है।

हाल ही में सामने आए खुलासों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

राज्य में सक्रिय एजेंटों ने सरकारी ‘समग्र आईडी’ (Samagra ID) और आयुष्मान पोर्टल की कमियों को इस कदर पकड़ा है कि वे महज कुछ हजार रुपये लेकर किसी भी अमीर या अपात्र व्यक्ति को ‘पात्र’ घोषित कर रहे हैं।

एक आईडी, 54 लोग और अजीबोगरीब परिवार

फर्जीवाड़े का सबसे हैरान करने वाला उदाहरण इंदौर से सामने आया है।

यहां वार्ड नंबर 1 और जोन 16 की एक समग्र आईडी की जांच की गई, तो पता चला कि उस एक ही आईडी पर कुल 54 लोगों के नाम दर्ज हैं।

ताज्जुब की बात यह है कि इस ‘काल्पनिक परिवार’ में 4 साल के बच्चे से लेकर 87 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं।

इतना ही नहीं, इस फर्जी परिवार में जाति और धर्म की कोई दीवार नहीं है।

एक ही परिवार के सदस्य के रूप में जैन, खान, मिश्रा, पाटीदार, इब्राहिम, पांडे और राठौर जैसे अलग-अलग सरनेम वाले लोगों को जोड़ दिया गया है।

जब इस आईडी पर दिए गए पते (45-सी, कालानीनगर) की पड़ताल की गई, तो वहां ऐसा कोई मकान मिला ही नहीं।

वहां रहने वाले पुराने निवासियों का कहना है कि वे दशकों से वहां रह रहे हैं, लेकिन प्रदीप कुमार जायसवाल नाम का कोई व्यक्ति वहां कभी रहा ही नहीं।

कैसे काम करता है यह पूरा काला खेल?

इस फर्जीवाड़े के पीछे एक सोची-समझी तकनीक और भ्रष्ट तंत्र का हाथ है।

मीडिया रिपोर्ट्स और स्टिंग ऑपरेशन बताते हैं कि एजेंट 15 से 20 हजार रुपये लेकर एक घंटे के भीतर आयुष्मान कार्ड तैयार कर देते हैं।

इस प्रक्रिया में सबसे पहले ‘पात्रता’ का खेल खेला जाता है।

एजेंट किसी अपात्र परिवार की 2019 की समग्र आईडी को तकनीकी हेरफेर के जरिए 2014 का दिखा देते हैं।

इसके बाद, लॉगिन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल कर डेटा को अपडेट किया जाता है।

हैरान करने वाली बात यह है कि शिवपुरी की किसी आईडी को सागर नगर निगम से अप्रूव करा लिया जाता है, और यह पूरा जाल सतना या भोपाल से संचालित होता है।

सुरक्षा प्रणालियों को ठेंगा: ओटीपी डाइवर्जन का खेल

सरकारी पोर्टल पर सुरक्षा के लिए ‘ओटीपी’ (One Time Password) की व्यवस्था की गई है, लेकिन इन जालसाजों ने इसे भी मात दे दी है।

ये लोग ‘ब्राउज़र एक्सटेंशन’ और ‘कस्टम स्क्रिप्ट्स’ का इस्तेमाल करते हैं।

इसके जरिए ओटीपी असली लाभार्थी के पास जाने के बजाय सीधे एजेंट के सिस्टम पर पहुंच जाता है।

इसे ‘ओटीपी डाइवर्जन’ कहा जाता है।

एक बार पोर्टल का एक्सेस मिल जाने के बाद, एजेंट अपनी मर्जी से फोटो, उम्र और पता बदल देते हैं।

अधिकारियों और अस्पतालों की मिलीभगत

यह पूरा फर्जीवाड़ा सिर्फ एजेंटों के भरोसे नहीं चल रहा।

इसमें नगर निगम के कंप्यूटर ऑपरेटर, जिला स्तर के कर्मचारी और ‘आयुष्मान मित्र’ भी शामिल हैं।

जब कोई एजेंट फर्जी डेटा अपलोड करता है, तो विभाग में बैठे लोग बिना जांच-पड़ताल किए उसे हरी झंडी दे देते हैं।

कार्ड बनने के बाद, कुछ निजी अस्पतालों के साथ सेटिंग की जाती है, जहाँ अपात्र लोगों को भर्ती दिखाकर सरकारी बजट से पैसा निकाला जाता है।

दावों के मुताबिक, अगर 5 लाख की लिमिट खत्म हो जाती है, तो कमीशन लेकर और पैसा जारी करवाने की सेटिंग भी ये एजेंट करते हैं।

आम जनता पर इसका असर

इस फर्जीवाड़े का सबसे बुरा असर उन गरीब परिवारों पर पड़ रहा है, जो वास्तव में इलाज के हकदार हैं।

जब फर्जी लोग इस योजना का लाभ उठाते हैं, तो संसाधनों की कमी हो जाती है और बजट का गलत इस्तेमाल होता है।

यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने की चोरी और गरीबों के अधिकारों का हनन है।

मध्य प्रदेश का यह मामला एक चेतावनी है कि तकनीक जितनी भी उन्नत हो, अगर उसे चलाने वाले लोग भ्रष्ट हों, तो हर सुरक्षा घेरा तोड़ा जा सकता है।

सरकार को चाहिए कि वह समग्र पोर्टल और आयुष्मान भारत के डेटाबेस का ऑडिट कराए और उन सभी आईडी की जांच करे जिनमें संदिग्ध रूप से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं।

साथ ही, ओटीपी सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने की जरूरत है ताकि ऐसी जालसाजी को रोका जा सके।

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