CM Mohan on convoy culture: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को राज्य सरकार में निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग और प्राधिकरणों के नवनियुक्त अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों के लिए एक खास प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद नेताओं को सरकारी कामकाज के तौर-तरीके सिखाना था।
लेकिन इस बैठक की सबसे बड़ी सुर्खी बनी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पार्टी संगठन द्वारा नेताओं को दी गई एक सख्त नसीहत।

बैठक में दो टूक शब्दों में कहा गया कि जिन नेताओं को ‘मंत्री का दर्जा’ मिला हुआ है, वे अब भारी-भरकम काफिला लेकर चलने की अपनी पुरानी आदत को पूरी तरह से छोड़ दें।
उन्हें साफ हिदायत दी गई है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस राष्ट्रव्यापी अपील का पालन करें, जिसमें ईंधन (पेट्रोल-डीजल) और ऊर्जा बचाने की बात कही गई है।
उत्साह में उड़ती है नियमों की धज्जियां, कार्यकर्ताओं को रोकें
ट्रेनिंग के दौरान बड़े नेताओं ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि जब कोई नया नेता पद संभालता है, तो कार्यकर्ता भारी उत्साह में आ जाते हैं।
वे दर्जनों गाड़ियां लेकर सड़कों पर निकल पड़ते हैं, जिससे न सिर्फ ट्रैफिक जाम होता है बल्कि ईंधन की भी भारी बर्बादी होती है।
नेताओं से कहा गया है कि वे कार्यकर्ताओं के इस उत्साह पर थोड़ा ब्रेक लगाएं।
अगर कार्यकर्ता गाड़ियां लेकर आ भी रहे हैं, तो उन्हें शालीनता से रोकें।
नेताओं को समझाया गया कि उनका आचरण समाज में एक बड़ा संदेश देता है।
अगर वे खुद सादगी अपनाएंगे, तो जनता के बीच सरकार और पार्टी की छवि मजबूत होगी।
नेताओं को यह भी नसीहत दी गई कि वे अपने-अपने विभागों के मंत्रियों और सीनियर अफसरों के साथ बेहतर तालमेल (सामंजस्य) बनाकर काम करें, ताकि विकास कार्यों में कोई रुकावट न आए।
वायरल वीडियो पर हुई खिंचाई, दो अध्यक्षों ने दी सफाई
इस बैठक में माहौल उस वक्त थोड़ा गंभीर हो गया जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में वाहन रैलियों के वायरल हुए वीडियो को लेकर नवनियुक्त अध्यक्षों से सीधे सवाल-जवाब शुरू कर दिए।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह की मौजूदगी में सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल और महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव से इस बारे में पूछा गया।

वीरेंद्र गोयल की सफाई:
उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका कोई बड़ी रैली निकालने का इरादा नहीं था। स्वागत समारोह में बहुत कम गाड़ियां थीं।
लेकिन जिस सड़क से उनका काफिला गुजर रहा था, वहां पहले से मौजूद रूटीन गाड़ियों (आम जनता के वाहनों) को भी वीडियो में इस तरह जोड़कर दिखा दिया गया जैसे वे सब उनकी रैली का हिस्सा हों।
उन्होंने इसे वीडियो एडिटिंग और सोशल मीडिया का कमाल बताया।
रेखा यादव का जवाब:
महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने भी कुछ ऐसी ही सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका सागर और छतरपुर का दौरा सरकारी था।
वे सागर में वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण करने गई थीं। रास्ते में कुछ जगहों पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें सड़क पर चल रहे अन्य राहगीरों के वाहनों को जोड़कर दिखा दिया गया है, जबकि उनका रैली निकालने का कोई कार्यक्रम नहीं था।
पार्टी की दो टूक: बिना आदेश के भी करें पालन
मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष ने दोनों की बातों को सुनने के बाद साफ किया कि पीएम मोदी की ईंधन और ऊर्जा बचाने की अपील केवल कागजों के लिए नहीं है।
इसे बिना किसी सरकारी आदेश का इंतजार किए, सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने निजी जीवन में भी लागू करना चाहिए।
पार्टी ने साफ कर दिया कि पदों पर बैठे लोगों को समाज के सामने एक मिसाल (उदाहरण) पेश करनी होगी।

दिए गए कामकाज और वित्तीय प्रबंधन के गुर
इस एक दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम में राज्यभर से आए करीब 60 ऐसे नेता शामिल हुए थे, जिन्हें सरकार ने अलग-अलग विभागों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य बनाकर मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा दिया है।
प्रशिक्षण के दौरान इन नेताओं को सरकारी कामकाज की बारीकियां सिखाई गईं।
उन्हें बताया गया कि बजट का सही इस्तेमाल (वित्तीय प्रबंधन) कैसे करना है, शासन की प्रक्रियाएं क्या होती हैं, और एक अध्यक्ष के रूप में उनके अधिकार, दायित्व और सीमाएं क्या हैं।
लापरवाही पर पहले ही हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
बैठक में नेताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए यह भी याद दिलाया गया कि पार्टी और सरकार नियमों को लेकर कितनी गंभीर है।
उदाहरण के तौर पर हाल ही में हुई दो बड़ी कार्रवाइयों का जिक्र हुआ:
1. भिंड किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह ठाकुर को अनुशासनहीनता के चलते उनके पद से हटाया जा चुका है।
2. पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर के सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को फ्रीज (रोक) कर दिया गया है।

इन कार्रवाइयों का हवाला देकर नेताओं को साफ संदेश दे दिया गया है कि पद मिलने का मतलब मनमानी करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से जनता की सेवा करना है।
