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सुप्रीम कोर्ट का सख्त अल्टीमेटम: ’48 घंटे में भरो सड़कों के गड्ढे, लापरवाही की तो खैर नहीं!’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Potholes Repair Order: हमारे देश में हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं।

अक्सर इन हादसों के पीछे खराब सड़कें, गहरे गड्ढे और प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार होती है।

अब इसी गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ‘कमेटी ऑफ रोड सेफ्टी’ (सड़क सुरक्षा समिति) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है।

कमेटी ने मध्य प्रदेश समेत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त चेतावनी जारी की है।

इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को एक विशेष पत्र भेजकर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

कमेटी ने साफ शब्दों में कहा है कि सड़कों के किनारे जो खुले और बिना रोशनी वाले जलभराव वाले इलाके हैं, या फिर जो टूटी-फूटी सड़कें हैं, वे लोगों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ यानी जानलेवा साबित हो रहे हैं।

सड़क सुरक्षा को लेकर की जा रही लापरवाही के कारण कई मासूम लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

48 घंटे का ‘डेडलाइन’ और सख्त नियम

इस पूरे निर्देश की सबसे बड़ी और अहम बात यह है कि अब अफसरों को सुस्ती दिखाने का मौका नहीं मिलेगा।

कमेटी ने साफ आदेश दिया है कि जैसे ही किसी सड़क पर गड्ढे या किसी अन्य खतरे की जानकारी मिलती है, उसके ठीक 48 घंटे (2 दिन) के भीतर उस पर एक्शन लेना होगा।

चिन्हित किए गए गड्ढों को तुरंत भरना होगा। यह जिम्मेदारी केवल कागजों पर नहीं होगी, बल्कि स्थानीय प्रशासन और सड़क बनाने वाली एजेंसियों (जैसे PWD, NHAI आदि) की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।

इसके अलावा, कमेटी ने कुछ और जमीनी गाइडलाइंस भी दी हैं:

सुरक्षित बैरिकेडिंग: सड़कों पर खुले पड़े मैनहोल, बड़े नालों और पानी भरे स्थानों पर मजबूत बैरिकेडिंग लगानी होगी, ताकि कोई उसमें न गिरे।

रिफ्लेक्टिव टेप और लाइट: इन बैरिकेड्स पर रिफ्लेक्टिव टेप (चमकने वाली पट्टी) लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही रात के समय वहां पर्याप्त रोशनी (लाइटिंग) का इंतजाम करना होगा, ताकि दूर से ही ड्राइवर को खतरा दिख जाए। खासकर बारिश के दिनों में यह व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।

IRC के नियमों का करना होगा पालन

अक्सर देखा जाता है कि शिकायत के बाद गड्ढे तो भर दिए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में वो दोबारा उखड़ जाते हैं।

इस घटिया निर्माण को रोकने के लिए कमेटी ने कहा है कि सड़कों का रखरखाव और मरम्मत ‘भारतीय सड़क कांग्रेस’ (Indian Road Congress – IRC) के तय मानकों के हिसाब से ही होना चाहिए।

IRC हमारे देश में सड़क बनाने और उनकी क्वालिटी तय करने वाली सबसे बड़ी संस्था है।

कमेटी ने चेतावनी दी है कि जो भी राज्य इन नियमों को हल्के में लेगा या अनदेखी करेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

2 महीने में देनी होगी रिपोर्ट और 5 साल का हिसाब

मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में साफ कहा गया है कि राज्य सरकार को अगले दो महीने के भीतर एक प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपनी होगी।

इस रिपोर्ट में सरकार को यह बताना होगा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए जमीन पर क्या-क्या कदम उठाए हैं।

साथ ही, जिला सड़क सुरक्षा समितियों को आदेश दिया गया है कि वे हर जिले में सड़कों का ऑडिट करें और सुरक्षा इंतजामों की लगातार समीक्षा करें।

इतना ही नहीं, कमेटी ने राज्यों से पिछले 5 सालों का पूरा कच्चा-चिट्ठा भी मांग लिया है।

सरकार को बताना होगा कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में गड्ढों, खुले मैनहोल या बिना बैरिकेड वाले जलभराव वाले इलाकों के कारण कितने हादसे हुए, कितने लोगों की मौत हुई और कितने लोग घायल हुए।

इस डेटा के जरिए कमेटी यह आकलन करेगी कि सड़कों की खराब हालत ने वास्तव में कितना नुकसान पहुंचाया है।

मध्य प्रदेश के लिए क्यों अहम है यह आदेश?

मध्य प्रदेश में मानसून के आते ही सड़कों की सूरत बिगड़ जाती है।

भोपाल, इंदौर, जबलपुर जैसे बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में सड़कें तालाब में बदल जाती हैं और गहरे गड्ढों के कारण आए दिन लोग हादसों का शिकार होते हैं।

हालांकि, रोड सेफ्टी कमेटी ने साल 2018 में भी ऐसे ही निर्देश दिए थे, जिसमें हाईवे पेट्रोलिंग, स्पीड पर लगाम और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) को सुधारने की बात कही गई थी। लेकिन जमीन पर हालात ज्यादा नहीं बदले।

अब सुप्रीम कोर्ट की इस नई सख्ती और 48 घंटे की डेडलाइन के बाद उम्मीद जागी है कि शायद इस बार एमपी के लोगों को गड्ढामुक्त और सुरक्षित सड़कें मिल सकेंगी।

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