Vaibhav Suryavanshi IIM Indore: आईपीएल 2026 के सीजन में अगर किसी एक नाम की सबसे ज्यादा गूंज रही है, तो वह है वैभव सूर्यवंशी।
राजस्थान रॉयल्स के इस 15 साल के युवा ओपनर ने मैदान पर ऐसी तूफानी बल्लेबाजी की है कि दुनिया भर के दिग्गज दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए हैं।
लेकिन बात सिर्फ क्रिकेट के मैदान तक सीमित नहीं रही।
अब वैभव की इस बेमिसाल कामयाबी की गूंज देश के सबसे प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थानों में से एक, IIM इंदौर (Indian Institute of Management, Indore) में भी सुनाई देने लगी है।

IIM इंदौर अब वैभव सूर्यवंशी की इस चमत्कारी सफलता पर एक बेहद खास और देश की पहली ‘मल्टी-डिसिप्लिनरी’ केस स्टडी तैयार करने जा रहा है।
इस पूरी रिसर्च को नाम दिया गया है—’वैभव मॉडल’।
आखिर IIM इंदौर क्यों कर रहा है वैभव पर रिसर्च?
जब कोई बच्चा महज 15 साल की उम्र में देश के सबसे बड़े और दबाव वाले टूर्नामेंट (IPL) में उतरता है, तो अमूमन लोग उम्मीद करते हैं कि वह धीरे-धीरे चीजें सीखेगा।
लेकिन वैभव ने आते ही तहलका मचा दिया।
उन्होंने बड़े-बड़े और अनुभवी इंटरनेशनल गेंदबाजों के छक्के छुड़ा दिए।

IIM इंदौर के डायरेक्टर प्रो. हिमांशु रॉय के मुताबिक, यह स्टडी सिर्फ वैभव के क्रिकेट खेलने के तरीके या उनकी बैटिंग तकनीक तक सीमित नहीं रहने वाली है।
इस रिसर्च का असली मकसद यह समझना है कि इतनी छोटी उम्र में कोई बच्चा मानसिक रूप से इतना मजबूत कैसे हो सकता है?
इस ‘वैभव मॉडल’ के जरिए संस्थान यह समझने की कोशिश करेगा कि:
- इतनी कम उम्र में बिना डरे बड़ा मुकाम हासिल करने का फार्मूला क्या है?
- खिलाड़ी के पीछे उसके परिवार का त्याग और उनके बचपन के कोच की क्या भूमिका रही?
- सबसे जरूरी बात— इस मॉडल से कॉरपोरेट जगत (बड़ी कंपनियों) को यह सीखने को मिलेगा कि अपने यहां आने वाले नए और युवा टैलेंट को कैसे तराशा जाए और उन्हें लंबे समय तक कंपनी के साथ जोड़े रखा जाए।

सफलता की ‘डार्क साइड’ पर भी होगी नजर
आज के दौर में जब किसी युवा को अचानक बहुत ज्यादा शोहरत, पैसा और मीडिया अटेंशन मिलती है, तो उसके भटकने का खतरा भी बढ़ जाता है।
प्रो. हिमांशु रॉय का कहना है कि अचानक मिलने वाली इस स्टारडम के साथ सोशल मीडिया का भारी दबाव भी आता है। कई बार बच्चे इस उम्मीद के बोझ तले दब जाते हैं और मानसिक रूप से थक जाते हैं।
इसलिए इस केस स्टडी में ‘टैलेंट मैनेजमेंट’ के उस पहलू पर खास काम किया जाएगा, जिससे यह पता चल सके कि सोशल मीडिया के इस दौर में युवाओं के टैलेंट को कैसे सुरक्षित रखा जाए और उन्हें लंबे समय तक स्टार बनाए रखने में कैसे मदद की जाए।

क्या है वैभव की बल्लेबाजी का सीक्रेट?
मैदान पर वैभव का बल्ला जब चलता है, तो टाइमिंग और स्पीड देखने लायक होती है।
क्रिकेट एक्सपर्ट्स बताते हैं कि वैभव का डिसीजन टाइम (Decision Time) सिर्फ 0.3 सेकंड का है।
यानी गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटने के बाद वैभव मात्र 0.3 सेकंड में यह तय कर लेते हैं कि शॉट कहां मारना है।
इतनी तेज बैट स्पीड के आगे गेंदबाजों को अपनी रणनीति बदलने का मौका ही नहीं मिलता।

इस सफर में उनके बचपन के कोच मनीष ओझा और राजस्थान रॉयल्स के जुबिन भरूचा की मेहनत का बड़ा हाथ है।
भारत के पूर्व कोच विक्रम राठौड़ भी वैभव के गजब के बॉडी बैलेंस के मुरीद हो चुके हैं।
राहुल द्रविड़ से जुड़ा एक दिलचस्प वाकया
एक बार जब भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ी राहुल द्रविड़ ने वैभव को थोड़ा संभलकर और संभलकर खेलने की सलाह दी थी, तो वैभव ने बेहद मासूमियत और आत्मविश्वास से कहा था— “सर, मुझे संभलकर खेलने की जरूरत नहीं है, गेंदबाज मुझे देखकर संभले।”
यह किस्सा दिखाता है कि वैभव बिना किसी डर के खुलकर खेलते हैं।

IPL 2026 में वैभव के वो आंकड़े, जिन्होंने होश उड़ा दिए
वैभव ने इस सीजन में न सिर्फ रन बनाए, बल्कि रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया। उन्होंने वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज क्रिस गेल का 14 साल पुराना एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड (59 छक्के) ध्वस्त कर दिया और खुद 72 छक्के जड़ दिए।
आइए एक नजर डालते हैं उनके इस सीजन के लाजवाब आंकड़ों पर:
रिकॉर्ड कैटेगरी | आंकड़े
- कुल मैच (पारियां) | 16
- कुल रन | 776
- सर्वोच्च स्कोर | 103 रन
- शतक / अर्धशतक | 1 / 3
- चौके / छक्के | 63 / 72
- स्ट्राइक रेट| 237.31
- बल्लेबाजी औसत| 48.50

सीजन में जीते ये 5 बड़े अवॉर्ड्स:
- ऑरेंज कप: सीजन में सबसे ज्यादा 776 रन बनाने के लिए।
- सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन: 237.30 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट के लिए।
- मोस्ट सिक्सेस अवॉर्ड: एक सीजन में रिकॉर्डतोड़ 72 छक्के लगाने के लिए।
- इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन: साल के सबसे बेहतरीन उभरते खिलाड़ी के रूप में।
- रिकॉर्ड ब्रेकर प्लेयर: आईपीएल के इतिहास में 230+ के स्ट्राइक रेट से 700 से ज्यादा रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बनने के लिए।

वैभव सूर्यवंशी की यह कहानी केवल खेल की नहीं, बल्कि इंसानी जज्बे, गजब के आत्मविश्वास और सही मेंटरशिप की कहानी है।
यही वजह है कि आज देश का सबसे बड़ा बिजनेस स्कूल उनके इस सफर को किताबों और केस स्टडीज में ढालने जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां और कॉरपोरेट लीडर्स इससे प्रेरणा ले सकें।
