Kerala HC Viral Girl Case: सोशल मीडिया पर महाकुंभ की ‘वायरल गर्ल’ के नाम से मशहूर MP की युवती और उसके पति के मामले में केरल हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
अदालत ने शुरुआती सबूतों के आधार पर युवती को बालिग (वयस्क) माना है और उसके पति को एक महीने की ‘ट्रांजिट बेल’ (अग्रिम जमानत के लिए सुरक्षित समय) दे दी है।
इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश पुलिस अगले एक महीने तक युवती के पति को गिरफ्तार नहीं कर पाएगी।
इस दौरान वह मध्य प्रदेश की संबंधित अदालत में जाकर अपने लिए अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की गुहार लगा सकता है।

जन्मतिथि और दस्तावेजों पर कोर्ट की टिप्पणी
यह पूरा मामला तब गरमाया जब युवती की उम्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
केरल हाईकोर्ट के जस्टिस कौसर एडप्पागथ के सामने जब यह मामला आया, तो उन्होंने पाया कि युवती के जन्म प्रमाणपत्र (Birth Certificate) में उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज है। इस हिसाब से वह पूरी तरह बालिग है।
हालांकि, अदालत में मध्य प्रदेश पुलिस की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने इस दावे का कड़ा विरोध किया।
उन्होंने दलील दी कि यह जन्म प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी है और असलियत में लड़की नाबालिग है।
लेकिन जज ने पुलिस की इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सिर्फ जन्म प्रमाणपत्र ही नहीं, बल्कि लड़की का वोटर आईडी कार्ड और बैंक पासबुक भी कोर्ट में पेश किए गए हैं।
इन सभी सरकारी दस्तावेजों से साफ पता चलता है कि वह बालिग है। खुद युवती ने भी अदालत में हलफनामा (शपथपत्र) देकर यह साफ किया है कि वह बालिग है और उसने अपनी मर्जी से युवक के साथ शादी की है।
अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए पति को 3 जून से एक महीने के भीतर मध्य प्रदेश की सक्षम अदालत में जाने का समय दिया है।
अलग-अलग धर्म और ऑनर किलिंग का डर
युगल (कपड़े) ने अपनी संयुक्त याचिका में कोर्ट के सामने एक गंभीर चिंता जताई थी।
उन्होंने कहा था कि चूंकि वे दोनों अलग-अलग धर्मों (युवती हिंदू और युवक मुस्लिम) से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए अगर वे सीधे मध्य प्रदेश जाते हैं, तो रूढ़िवादी और कट्टरपंथी तत्वों द्वारा उनकी जान को खतरा हो सकता है, यानी उनकी ‘ऑनर किलिंग’ की जा सकती है।
उन्होंने यह भी दलील दी थी कि यदि उन्हें पुलिस की गिरफ्तारी से सुरक्षा नहीं मिली, तो वे न तो यात्रा कर पाएंगे और न ही मध्य प्रदेश में किसी वकील से कानूनी मदद ले पाएंगे।
दूसरी तरफ, सरकारी वकील ने कोर्ट में यह तर्क भी दिया कि चूंकि युवती हिंदू है और युवक मुस्लिम है, इसलिए मंदिर में की गई उनकी शादी कानूनी रूप से जायज नहीं है।
इस वजह से वहां के मैरिज रजिस्ट्रार को उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट देने का कोई अधिकार नहीं है।
फिल्म की शूटिंग से शुरू हुई थी प्रेम कहानी
इस पूरी कहानी की शुरुआत केरल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। यहीं पर ‘वायरल गर्ल’ और इस युवक की पहली मुलाकात हुई।
धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदली और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली।
मामला तब कानूनी पचड़े में फंसा, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने इस शादी पर आपत्ति जताई।
आयोग का दावा था कि शादी के वक्त लड़की की उम्र केवल 16 साल थी और इसके लिए फर्जी कागजात तैयार किए गए थे।
आयोग की इस रिपोर्ट के बाद मध्य प्रदेश की खरगोन पुलिस ने युवक के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया था।
फिल्म डायरेक्टर पर भी दर्ज है पॉक्सो का केस
इस मामले में एक और नया मोड़ तब आया जब खुद ‘वायरल गर्ल’ ने 29 अप्रैल 2026 को फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा और तीन अन्य लोगों के खिलाफ केरल के एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस स्टेशन में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी।
पीड़िता का आरोप है कि जब वह नाबालिग थी, तब फिल्म ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने उसके साथ गलत व्यवहार किया और एक्टिंग का झांसा देकर उसका शोषण किया।
इस मामले में केरल के विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेता और वकील अनिल विलायल का नाम भी शामिल है, जिन पर सोशल मीडिया पर लड़की को बदनाम करने का आरोप है।
डायरेक्टर ने आरोपों को बताया ‘लव जिहाद’ की साजिश
वहीं दूसरी ओर, फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है।
उनका कहना है कि वे फिल्मों के जरिए ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं, इसलिए उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है।
मिश्रा का दावा है कि उनकी फिल्म की हीरोइन को बहला-फुसलाकर केरल ले जाया गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसकी शादी करा दी गई।
अब जब वे इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, तो उन पर ही झूठा केस लाद दिया गया है।
उम्र को लेकर उलझा है पेंच
प्रशासनिक जांच में लड़की की उम्र को लेकर दो अलग-अलग रिकॉर्ड सामने आए थे। महेश्वर नगर परिषद के जन्म प्रमाणपत्र में कुछ कमियां पाई गई थीं।
मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक लड़की का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था, जिसके अनुसार मार्च 2026 में शादी के वक्त उसकी उम्र 16 साल 2 महीने थी।
इसी आधार पर प्रशासन ने पुराने प्रमाणपत्र को रद्द करने की बात कही थी और माता-पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर भगाया गया है।
माता-पिता पर प्रताड़ना का आरोप
हालांकि, ‘वायरल गर्ल’ की अपनी एक अलग कहानी है।
उसने केरल के थंपानूर थाने में बयान दिया था कि उसके माता-पिता उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे और उसके चचेरे भाई से शादी करने का दबाव बना रहे थे।
लड़की का कहना है कि उस मुश्किल वक्त में इस युवक ने उसका साथ दिया, जिससे उनका प्यार परवान चढ़ा और उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से मंदिर में शादी कर ली।
फिलहाल, केरल हाईकोर्ट के इस फैसले ने इस जोड़े को कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए एक महीने का सुरक्षित समय दे दिया है।
